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  • 2 months ago
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को साफ किया कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) और राज्य बार काउंसिलों के पास लॉ के छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि छात्रों पर ऐसा नियंत्रण उनके वकील के रूप में पंजीकृत होने के बाद ही शुरू होता है. इस मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की. यह पीठ मिहिरा सूद और अभिषेक तिवारी द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी. इस याचिका में बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा द्वारा 13 अगस्त को जारी निर्देशों को चुनौती दी गई थी. हालांकि, बीसीआई अध्यक्ष ने कुछ ही घंटों के भीतर इन निर्देशों को वापस ले लिया था.

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Transcript
00:28Supreme Court
00:30The fourth year at BCI is a customer who won't be able to do it, but it's not the first
00:47year.
01:00रोक लगाने को कहा गया था ये निर्देश विश्व विद्याले के दीक्षान समारोह में चात्रों द्वारा मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को
01:07मुख्य अतिथी के रूप में बुलाने के विरोध पर दिया गया था
01:11हलाकि बाद में बार काउंसल अफ इंडिया ने इन निर्देशों पर रोक लगा दी थी

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