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Hal Chhath Kab Hai 2026: हरछठ यानी हलषष्ठी व्रत इस साल 2 सितंबर को रखा जाएगा. संतान की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए महिलाएं व्रत करेंगी. पूजा में जौ, मक्का, धान, गेहूं, चना, मूंग, सेमी और अरहर दाल शामिल की जाती है.हरछठ का व्रत अपने खान-पान के नियमों की वजह से थोड़ा कठिन माना जाता है. इस दिन हल से जुती जमीन में पैदा होने वाली चीजों का सेवन नहीं किया जाता है. तालाब या पानी के किनारे उगने वाले मखाने और सिंघाड़े का सेवन किया जा सकता है. मान्यता के अनुसार, हल भगवान बलराम का शस्त्र है, इसलिए व्रत में हल से जुड़ी उपज से दूरी रखी जाती है.Hal Chhath Kab Hai 2026: 2 Ya 3 September Lalai Chhath Kab Hai,Puja Muhurt,Samagri,Vidhi..

Harchhath, or Halshasthi, will be observed on September 2nd this year. Women will observe the fast for the long life and good health of their children.Explained that barley, corn, paddy, wheat, gram, mung bean, semolina, and pigeon pea are included in the puja.Harchhath fast is considered somewhat difficult due to its dietary rules. On this day, produce grown on plowed land is not consumed. Water chestnuts and water chestnuts grown near ponds or water bodies can be consumed. According to belief, the plow is Lord Balarama's weapon, so produce related to plowing is avoided during the fast.

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~HT.318~PR.111~ED.464~VG.HM~
Transcript
00:00प्रशनाय वाशुदेवाय हरय परमात्मने प्रणतहक्लेशनाशाय गोविंदाय नमोनमा प्यारे मित्रों जैश्याराम जैमातादी मित्रों आज आप से चर्चा करते हैं
00:10हल सर्ष्टी हल चंदन सर्ष्टी हल छट ब्रत के पामन पर्व को कब मनाया जाएगा दो सितंबर दो हजार चब्विस
00:21बुद्धवार को यह पामन पर्व मनाया जाएगा जिसको कहीं कहीं पर हल छट या हर छट के रूप में भी
00:29जाना जाता है
00:30पंचांगे के अनुशार भाद्र प्रदमास के कृष्ण पक्ष की सश्टी तिथी जितको छट बोलते हैं एक सितंबर को सुबह दस
00:40बच करके 49 मिनट से प्रारंब हो रही है और दो सितंबर को रात में 11 बच करके 13 मिनट
00:49पर यह तिथी पूर्ण होगी
00:51तो ऐसे में दो तारिक को हलचट का पावन पर्व मनाना है अब ब्रत और पूजा के मुख नियम की
00:59अगर हम बात करते हैं तो यह ब्रत मुख रूपशे माताएं अपनी संतान की लंबी आयू के लिए अच्छे स्वास्त
01:09के लिए उनकी सुरक्षा के लिए रखती हैं इस दिन �
01:14नियम क्या किये जाते हैं कि हल से जोती हुई किसी भी प्रकार की वस्तु का प्रियोग नहीं किया जाता
01:23है और बिना हल लगी जमीन से उपजे हुए अन जैसे पसाई के चावल का विसेश रूप से शेवन किया
01:33जाता है और विसेश इसमें दूद का प्रियोग किया जाता है
01:38पूजा में भैंस के दूद, भैंस के दही और घी का विसेश रूप से प्रयोग किया जाता है
01:47पूजा की सामग्री में बिदिवत रूप से सत नजा, शात प्रकार के भुने हुए अनाज जैसे गेहू है, चना है,
01:58धान है, मक्का है, जौार है, बाजरा है, जौँ है
02:03ये चड़ाये जाते हैं, पेन की साखाएं, बेर, जिसको जहलवेली भी बोला जाता है, पलास, गूलर, इनकी साखाओं को एक
02:15जगे जमीन में गड़ा करके गाड़ा जाता है
02:19और इसके बाद में हलचट के रूप में उनकी पूजा की जाती है, भगवान बलराम का आज के दिन जनम
02:29दिन मनाया जाता है, जनमोशो मनाया जाता है, क्योंकि बलराम जी का मुख्य जो अस्त्र है, वो हल है, इसलिए
02:39हल से जुती हुई किसी भी वस्तु का प्रियोग माता�
02:44आज नहीं करती हैं, और हलचट के दिन अनेका अनेक तरह से दही, मौवा, पसई के चावल, इत्यादि का धाक
02:55के पते में रख करके बालक को प्रशाद के रूप में ग्रहन करने के लिए माताएं देती हैं, और आज
03:03के दिन जैसे हल से जुती हुई वस्तु का प्रियोग नह
03:09आप सभी को मैंने बताया, हलचट का पावन पर्व और हलचट का पर्व जो होता है, भगवान बलराम जी के
03:17जो कृष्ण जी के बड़े भाई हैं, उनके जनमोश्यों के रूप में मनाया जाता है, अधिक जानकारी चाहते हैं, तो
03:25शंपर करिएगा, मैं पुना मिलता हूं �
03:27नए वीडियो में तब तक के लिए आप सभी को, जैजै स्त्रीशीता राम
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