00:08रक्षा बंधन का त्योहार नजदीक आते ही बाजारों में मिठाईयों की मांग बढ़ने लगी है।
00:30अगलग मिठाईयों की कीमत में करीब 20-50 रुपे प्रती किलो तक की बढ़ोतरी हुई है।
01:00मिठाई बनाने में चीनी एक प्रमुख कच्चा माल है। ऐसे में इसके महंगे होने से दुकानदारों की लागत बढ़ गई
01:05है।
01:06इसके अलावा परिवहन और दूसरे खर्चों में बढ़ोतरी ने भी दुकानदारों की परिशानी बढ़ा दी है।
01:11दुकानदारों का कहना है कि इन सभी खर्चों को देखते हुए मिठाई के दाम बढ़ाना उनकी मजबूरी बन गया है।
01:17रक्षा बंधन जैसे त्योहार पर मिठाई की बिक्री आम दिनों की मुकाबले बढ़ जाती है।
01:22लोग राखी बांधने के साथ अपने भाई बहनों और परिवार के लिए मिठाई खरीदते हैं।
01:27ऐसे में त्योहार से ठीक पहले कीमत बढ़ने का असर सीधे ग्राहकों की जेब पर बढ़ रहा है।
01:32कई ग्राहकों का कहना है कि महंगाई बढ़ने के बावजूद त्योहार तो मनाना ही है।
01:37लेकिन अब पहले की तुलना में ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ेंगे।
01:40ग्राहकों के सामने एक तरफ त्योहार की खुशी है तो दूसरी तरफ बढ़ते दामों का दबाव।
01:45परिवार के लिए मिठाई खरीदने का बजट बढ़ने से लोगों को अपने खर्च का हिसाब भी बदलना पड़ सकता है।
01:51खास तोर पर अगर कोई परिवार ज्यादा मात्रा में मिठाई खरीदता है तो 20-50 रुपे प्रतिकिलों की बढ़ोतरी का
01:57कुल खर्च पर अच्छा खासा आसर पड़ सकता है।
02:00दुकानदारों ने ये भी बताया कि पिछले करीब धाई से 3 साल में मिठाईयों के दाम में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी
02:06नहीं की गई थी।
02:07लागत बढ़ने की बावजूद लंबे समय तक कीमतों को नियंतरित रखने की कोशिश की गई।
02:12लेकिन अब कच्चे माल की कीमत और दूसरे खर्चों में बढ़ोतरी के चलते दाम बढ़ाना जरूरी हो गया है।
02:17रक्षा बंधन से पहले मिठाई बाजार में बढ़े हुए दाम ऐसे समय पर आए हैं जब त्योहार की खरीदारी जूर
02:24पकड़ने वाली है।
02:24आने वाले दिनों में मिठाई की मांग और बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में ग्राहकों को अब मिठाई खरीदने के
02:30लिए पहले की तुलना में ज्यादा बजट रखना होगा।
02:33यानि इस बार रक्षा बंधन पर रिष्टों की मिठास तो बरकरार रहेगी लेकिन मिठाई की मिठास जेब पर थोड़ी भारी
02:39पड़ सकती है।
02:40चीनी के बढ़े दामों का असर अब सीधे मिठाई की कीमतों में दिखाई देने लगा है। और त्योहार मनाने वाले
02:45लोगों को महंगाई के बीच ही अपनी खुशियां बांटनी होंगी।
02:49चीनी के दाम अगर इसी रफ्तार से बढ़ते रहे तो आने वाले त्योहारों में मिठाई से लेकर रोज मरहा की
02:56चाय तक महंगी हो सकती है।
02:57लेकिन बड़ा सवाल है आखिर भावत जैसे दुनिया के बड़े चीनी उतपादक देश को कच्ची चीनी यानि रोशुगर आयात करने
03:04की नौबत क्यों आई? और क्या इसके पीछे E20 पेट्रोल की नीती जिम्मेदार है? सबसे पहले आंकड़ा समझ ये. सरकार
03:12के ताजा अन
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03:38ने साफ कहा कि इसका मकसद जमाखोरी और सट्टे बा�
03:42कीमतों को स्थिर रखना और बाजार में चीनी की उपलब्धता सुनिश्चित करना है. यानि 28 जुलाई को सरकार को बाजार
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03:56बेहत पानी निर्भर फसल है.
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04:05सरकार के मुताबिक उतपादन में आई कमी को सिर्फ एथनोल के खाते में डालना सही नहीं होगा. हाँ, E20 और
04:12एथनोल नीती का सवाल जरूर महत
04:25अर्थनोल की तरफ तो नहीं जा रहा. लेकिन यहां एक जरूरी फर्क है. E20 को चीनी संकट का अकेला कारण
04:31बताना सही तस्वीर नहीं होगी. उतपादन में गिरावट, मौसम, घट्टा स्टॉक और त्योहारों से पहले बढ़ती मांग इन सब का
04:39असर मिलकर कीमतों पर प�
04:55भारत आम तोर पर कच्ची चीनी के आयात को लेकर सावधान रहता है. और सामान्य परिस्थितियों में आयात पर भारी
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06:09मुश्किलिम बनी रह सकती ह
06:11यानि चीनी की इस कहानी में E20 सिर्फ एक किरदार है. पूरी कहानी नहीं.
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