00:04इसलाम धर में एद मिलाद नबी को पाक और अजमत वाले दिनों में शामिल किया गया है।
00:30तो ऐसे में जानेंगे कि आखिर 12 रवी उल और एद मिलाद नबी में क्या फर्क है।
00:35सबसे पहले समझे कि 12 रवी उल एक तारीख है।
00:38जबकि एद मिलादुन नभी उस तारिख या रबियुल अवल में रसूल अल्लह की विलादत की याद में की जाने वाली
00:44महफिल या कारिकरम को कहा जाता है
00:47लेकिन यहां एक जरूरी बाथ है
00:48नभी सललला एल सलम की परदाईश के सटीक दिन और तारिख को लेकर उलिमा में मद्धेद है
00:53सحी हदीश से ये बात साफ तोर पर साबित है कि आप सलललला एल सलम की परदाईश सुमवर के दिन
00:58हुई थी
00:58यानि पीर के दिन
00:59सही मुस्लिम की हदीस नंबर 11.62 में
01:02हजरत अबू पदाता रजियल्लाहु अनुहु से रिवायत है
01:05कि नभी सुमवार के रोजे के बारे में पूछा गया
01:09तो आपने फर्माया कि ये वो दिन है जिस दिन मैं पैदा हुआ
01:12और जिस दिन मुझ पर वही नाजिल हुई
01:15यानि पीर को आपकी विलादत होना सही हदीस साबित
01:18लेकिन 12.12 की तारिख को लेकर ऐसी कोई सही हदीस नहीं है
01:22जो इसे निश्चित रूप से आपकी विलादत की तारिख को बताता हो
01:26कुरान में सुरह यूनिस की आयत 58 में अल्ला फर्माता है
01:29कि अल्ला के फजल और उसकी रहमत पर लोगों को खुशी मनाने चाहिए
01:33मिलाद के जायज होने की राय रखने वाले कई उल्मा इस आयत को भी एक नॉर्मल आधार के तोर पर
01:38पेश करते हैं
01:39और कहते हैं कि रसूल अल्ला पूरी इंसानियत के लिए अल्ला की रहमतें
01:42इसी वज़ा से मिस्तर की दारल इफरा जैसी संस्थाय मिलाद की याद मनाने को जायज और मुस्तहब मानती है
01:48वो कुरान पढ़ने, सीरत बयान करने, दरूत पढ़ने और खाना किलाने जैसी चीजों को जायस तरीका मानती है
01:55इसके लावा एक एहम दलील वही सोमवार वाली सही हदीस है
01:59नभी अपनी पैदाईश के दिन को याद करते वे सोमवार का रोजा रखते थे
02:03इसलिए कुछ उलिमा कहते हैं कि अपनी विलादत की नेमत पर शुक्र अदा करना सुन्नत से एक आधार रखता है
02:09लेकिन दूसी तरफ कुछ बड़े उलिमा मिलाद कि हर साल एक खास धार में गायोजन जैसे कि जलूस को सही
02:16नहीं मानते
02:17उनका मानना है कि नभी, सहाबा और पहली नसलों से इस तरह की सलाना महफिल का कोई भी सबूत नहीं
02:24मिलता
02:25इसलिए वो इसे बिद्दत कहते हैं
02:27हलांकि यहां भी बात इतनी सीधी नहीं है
02:29अबने हजर असकलानी से मिलाद के बारे में ऐसी राय नकल की गई है
02:34जिसमें उन्होंने कहा कि इसकी मूल शकल पहले लोगों से थाबित नहीं थी
02:39लेकिन अगर इसमें अच्छे और शरीयत के मताबिक काम हो और गलत चीजों से बचा जाए
02:43तो इसे एक अच्छी नई पृता के तोर पर देखा जा सकता है
02:46तो 12 रभी उल अवल एक तारीख है
02:48मिलाद ुन नभी उस तारीख या रभी उल अवल में
02:51नभी की विलादत की याद में मनाने वाला जश्न है
02:54और सबसे जरूरी बार बार रभी उलवल को
02:56नबी की विलादत की निश्चित तारिक कहना एक अलग मसला है
03:00जबकि पीर को विलादत होना सही हदीश से थावित है
03:03इसलिए इस मुद्दे पर मुसल्मानों को एक दूसरे को तुरंट गलत या गुमरा करने के बजाए
03:07ये समझना चाहिए कि मिलाद के हुक्म को लेकर उलिमा में कई एक्टिलाफ मौजूद है
03:12अगर कोई मिलाद में कुरान पढ़ता है, सीरत सुनाता है, दुरूद पढ़ता है, सत्का करता है
03:33कॉमेंट सेक्शन में हमें लिख कर जरूर बताएं वीडियो को लाइक करें शार करें और चैनल को सब्सक्राइब करना बिल्कुल
03:37न भूलें
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