Skip to playerSkip to main content
12 रबीउल अव्वल और ईद मिलाद-उन-नबी को लेकर अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है कि दोनों में क्या फर्क है। क्या 12 रबीउल अव्वल नबी ﷺ की निश्चित पैदाइश की तारीख है? कुरान और सहीह हदीस इस बारे में क्या कहते हैं? इस वीडियो में अलग-अलग उलमा की राय और प्रमुख दलीलों को आसान भाषा में समझिए।

What is the difference between 12 Rabi ul Awal and Eid Milad un Nabi? Is 12 Rabi ul Awal the confirmed birth date of Prophet Muhammad ﷺ? What do the Quran and authentic Hadith say? In this video, we explain the key evidence and different scholarly views in simple language, helping you understand this important Islamic topic.


#12RabiUlAwal #EidMiladUnNabi #MiladUnNabi #RabiUlAwal #ProphetMuhammad #SeeratUnNabi #IslamicKnowledge #IslamicHistory #Quran #Hadith #SahihHadith #IslamicVideo #Milad #NabiKiWiladat #IslamicFacts #IslamicHistory #Muslim #Deen #Sunnah #IslamicEducation

~HT.318~ED.120~PR.115~VG.HM~
Transcript
00:04इसलाम धर में एद मिलाद नबी को पाक और अजमत वाले दिनों में शामिल किया गया है।
00:30तो ऐसे में जानेंगे कि आखिर 12 रवी उल और एद मिलाद नबी में क्या फर्क है।
00:35सबसे पहले समझे कि 12 रवी उल एक तारीख है।
00:38जबकि एद मिलादुन नभी उस तारिख या रबियुल अवल में रसूल अल्लह की विलादत की याद में की जाने वाली
00:44महफिल या कारिकरम को कहा जाता है
00:47लेकिन यहां एक जरूरी बाथ है
00:48नभी सललला एल सलम की परदाईश के सटीक दिन और तारिख को लेकर उलिमा में मद्धेद है
00:53सحी हदीश से ये बात साफ तोर पर साबित है कि आप सलललला एल सलम की परदाईश सुमवर के दिन
00:58हुई थी
00:58यानि पीर के दिन
00:59सही मुस्लिम की हदीस नंबर 11.62 में
01:02हजरत अबू पदाता रजियल्लाहु अनुहु से रिवायत है
01:05कि नभी सुमवार के रोजे के बारे में पूछा गया
01:09तो आपने फर्माया कि ये वो दिन है जिस दिन मैं पैदा हुआ
01:12और जिस दिन मुझ पर वही नाजिल हुई
01:15यानि पीर को आपकी विलादत होना सही हदीस साबित
01:18लेकिन 12.12 की तारिख को लेकर ऐसी कोई सही हदीस नहीं है
01:22जो इसे निश्चित रूप से आपकी विलादत की तारिख को बताता हो
01:26कुरान में सुरह यूनिस की आयत 58 में अल्ला फर्माता है
01:29कि अल्ला के फजल और उसकी रहमत पर लोगों को खुशी मनाने चाहिए
01:33मिलाद के जायज होने की राय रखने वाले कई उल्मा इस आयत को भी एक नॉर्मल आधार के तोर पर
01:38पेश करते हैं
01:39और कहते हैं कि रसूल अल्ला पूरी इंसानियत के लिए अल्ला की रहमतें
01:42इसी वज़ा से मिस्तर की दारल इफरा जैसी संस्थाय मिलाद की याद मनाने को जायज और मुस्तहब मानती है
01:48वो कुरान पढ़ने, सीरत बयान करने, दरूत पढ़ने और खाना किलाने जैसी चीजों को जायस तरीका मानती है
01:55इसके लावा एक एहम दलील वही सोमवार वाली सही हदीस है
01:59नभी अपनी पैदाईश के दिन को याद करते वे सोमवार का रोजा रखते थे
02:03इसलिए कुछ उलिमा कहते हैं कि अपनी विलादत की नेमत पर शुक्र अदा करना सुन्नत से एक आधार रखता है
02:09लेकिन दूसी तरफ कुछ बड़े उलिमा मिलाद कि हर साल एक खास धार में गायोजन जैसे कि जलूस को सही
02:16नहीं मानते
02:17उनका मानना है कि नभी, सहाबा और पहली नसलों से इस तरह की सलाना महफिल का कोई भी सबूत नहीं
02:24मिलता
02:25इसलिए वो इसे बिद्दत कहते हैं
02:27हलांकि यहां भी बात इतनी सीधी नहीं है
02:29अबने हजर असकलानी से मिलाद के बारे में ऐसी राय नकल की गई है
02:34जिसमें उन्होंने कहा कि इसकी मूल शकल पहले लोगों से थाबित नहीं थी
02:39लेकिन अगर इसमें अच्छे और शरीयत के मताबिक काम हो और गलत चीजों से बचा जाए
02:43तो इसे एक अच्छी नई पृता के तोर पर देखा जा सकता है
02:46तो 12 रभी उल अवल एक तारीख है
02:48मिलाद ुन नभी उस तारीख या रभी उल अवल में
02:51नभी की विलादत की याद में मनाने वाला जश्न है
02:54और सबसे जरूरी बार बार रभी उलवल को
02:56नबी की विलादत की निश्चित तारिक कहना एक अलग मसला है
03:00जबकि पीर को विलादत होना सही हदीश से थावित है
03:03इसलिए इस मुद्दे पर मुसल्मानों को एक दूसरे को तुरंट गलत या गुमरा करने के बजाए
03:07ये समझना चाहिए कि मिलाद के हुक्म को लेकर उलिमा में कई एक्टिलाफ मौजूद है
03:12अगर कोई मिलाद में कुरान पढ़ता है, सीरत सुनाता है, दुरूद पढ़ता है, सत्का करता है
03:33कॉमेंट सेक्शन में हमें लिख कर जरूर बताएं वीडियो को लाइक करें शार करें और चैनल को सब्सक्राइब करना बिल्कुल
03:37न भूलें
Comments

Recommended