00:04प्रिधान मंतरी नागरिक सहायता और आपात कालेंस तिती रहत कोश यानि की पीएम केर्स फंड एक बार फिर चर्चा में
00:10है वजह है इसका आकार और इसके खर्ज के बीच दिखाई देने वाला बड़ा अंतर
00:1518 अगस 2026 को सारवजनी किये गए और इटेड खातों के अनुसार 31 मार्च 2015 तक पीएम केर्स फंड का
00:23कुल कोश बढ़कर करीब 8,452 करोड रुपे हो गया लेकिन वितवर्च 2024-2025 में इस फंड से केवल 87
00:31.85 लाख करोड रुपे खर्च किये गए
00:34ये फंड मार्च 2020 में COVID-19 में हमारी जैसी आपाच स्तितियों से निपचने के उदेश्य से बनाया गया था
00:41शुरुवात में इसमें करीब 2.25 लाख करोड की राशी थी इसके बाद देश भर से कंपनियों, संस्थाओं और आब
00:48नागरिकों ने इसमें योगदान दिया
00:50कुछ वर्शों में ये रकम हजारो करोड रुपय तक पहुच गई तो खाते में कितनी रकम ने
00:56Audited विवरण के अनुसार वित वर्श 2024-2025 में फंड को कुल लगभग 1289.9 करोड रुपय मिले
01:05इसमें घरेलू और विदेशी योगदान, बैंक तथा फिक्स डेपोजिट से मिला हुआ ब्याज और विभिन एजंसियों से प्राप्त रकम या
01:13रिफंडर शामिल थे
01:14अलग इस अवधी में सीधे मिलने माले घरेलू और विदेशी चंदे में गिरावट दर्ज की गई
01:18घरेलू योगदान लगभग 480 करोड रुपे रहा जब की विदेशी योगदान लगभग 9.28 लाख रुपे बताया गया
01:26हंड की कोल राशी बढ़ने में ब्याज की भी बड़ी भूमी का रही
01:30रिपोर्ट्स के मुताबिक लगभग 6,641 करोड रुपे फिक्स डेपोजिट में रखे गए थे और इनसे करीब 450 से 475
01:38करोड रुपे का ब्याज राप्ट हुआ
01:40खर्च सिर्फ 87.85 लाख जीहां जो सबसे बड़ा सवाल खर्च को लेकर ही है
01:46पितवर्ष 2024-2025 में पीम केर्स फंड से जो कुल भुगतान केवल 87.85 लाख रुपे दर्ज किया गया
01:54इसमें लगबग 87.84 लाख रुपे पीम केर्स फॉर चिल्डर्न स्कीम पर खर्च किये गया
02:00यह योजना COVID-19 के दौरान माता पिता या अभिभावक खोने वाले बच्चों की सहायता के लिए शुरू की गई
02:06थी
02:06इसके लावा बैंक और SMA से शुल्क के रूप में केवल 451 लुपे का बुगतान दर्ज हुआ
02:11यानि एक और फंड में 8,452 करोड रुपे से अधिकी राशी जमा रही वहीं
02:17पूरे साल खर्च की गई राशी उसके मुकाबले बहुत छोटी थी
02:20कुछ रिपोर्ट्स ने इसे फंड के कुल बैलेंस का लगभग 0.01 प्रतिशत बताया
02:26तो इसमें सवाल क्या है?
02:28यहां सवाल यह नहीं कि फंड में इतनी बड़ी रकम क्यों जमा हुई
02:31आपातकाले इस स्थि के लिए एक मजबूत वितिया कोश होना उप्योगी है
02:35असली सवाल यह है कि जब फंड का उदेश्य संकट और आपदा के समय मदद करना है
02:40तब इतनी बड़ी राशी का वियोग किस नीती के तहत किया जा रहा है
02:44क्या सरकार के पास किसी बड़ी आपदा के सिथी के लिए पहले से तयार खर्ची हो जोना है
03:10कि फंड की आये निवेश, रिफंड, भुगतान और लाभार्तियों की जानकारी अधिक विस्तार से सारवजनीक की जाए
03:16सरकार और फंड किस थी
03:18दूसरी और फंड के समर्थक ये तरक दे सकते हैं कि पीम के एक आपाद का लिन्स रक्षा कोश है
03:24ऐसे फंड का उदेश ये हर साल पूरी राशी खर्च करना नहीं बलकि किसी बड़ी संकट के समय तुरंत पैसा
03:30उपलब्द रखना हो सकता है
03:31लेकिन इस तर्ग के साथ भी पादरशिता की जरूरत खत्म नहीं गूती
03:35अगर अधिकान शिरकम फिक्स डेपोजित में रखी गई है तो जनता को ये बताया जाना चाहिए कि उसका निवेश किस
03:43सनियम के तहत हुआ
03:44उस पर कितना अभ्याज मिला और जरूरत पढ़ने पर कितनी रकम तुरंत उपलब्द कराई जा सकती है
03:49दो साल बाद खाते सारवजनिक
03:53एक और महतोपर्ण बात ये है कि 2023, 24 और 24 पचुस के खाते अगस 2026 में सारवजनिक किये गए
03:59रिपोर्ट्स के अनुसार दोनों वर्षों के audited statements एक साथ वेबसाइट पर उपलंद कराए गए
04:05इससे ये सवाल भी उठा कि खातों को सारवजनिक करने में देरी क्यों हुई
04:10और नियमित रूप से जानकारी पहले क्यों नहीं दी गई
04:13हलाकि audited खाते सारवजनिक होना पारदर्शिता के दिशा में कदम आना जा सकता है
04:18लेकिन एक पन्ने के वित्टी अविवरेंट से जनता को पूरी तस्वीर नहीं मिलती
04:22लोगों को ये भी जानना होगा कि चंदा किन सोर्स से आया रकम किनकिन बैंकों में रखी गई
04:27किसी ओजना के लिए कितनी राशी स्विकृत हुई और किसे वास्तों में लाव मिला
04:48अब उसमें मिलने वाले चंदे में गिरावट का ट्रेंड दिखाई दे रहा है
04:52सवाल ये है कि आखिर घरेलू और विदेशी दोनों तरह की योगदान में कमी क्यों आई
04:57और इस फंड का पैसा किन कामों में इस्तिमाल किया गया
05:00PM CARES यानी Prime Minister Citizen Assistance and Relief in Emergency Situations Fund की स्थापना
05:07मार्च 2020 में कोरोना महामारी जैसी आपात और संकट की परिस्थितियों से निपटने के उद्देशे से की गई थी
05:14आधिकारिक जानकारी के मुताबिक ये फंड पूरी तरह स्वेचिक योगदान पर आधारित है और इसे बजटिये सहायता नहीं मिलती
05:21कोरोना के शुरवाती दौर में देश के आम नागरिकों से लेकर कमपनियों और संगठनों तक ने PM CARES फंड में
05:27योगदान दिया
05:28घरेलू स्तर पर व्यक्तियों और संस्थाओं के अलावा कमपनियों और PSU की और से CSR के तहट भी योगदान किया
05:35जा सकता है
05:36हालाकि सरकारी PSU के बजटिये स्त्रोतों से आने वाला पैसा PM CARES फंड में स्वीकार नहीं किया जाता
05:42लेकिन अब उपलब्ध वित्तिय रिपोर्टों में महामारी के शुरुवाती वर्षों की तुलना में योगदान की रफ्तार कम होती नजर आती
05:49है
05:49घरेलुदान अभी भी फंड का एक महित्वपूर्ण हिस्सा है लेकिन शुरुवाती उच्छाल के मुकाबले इसमें कमी दर्ज हुई है
05:55यानि जिस समय कोरोना का संकट चरम पर था उस समय लोगों और संस्थाओं ने जिस तर पर योगदान किया
06:01था बात के वर्षों में वही गती कायम नहीं रही
06:04यही तस्वीर विदेशी योगदान को लेकर भी सामने आती है
06:07PM Cares Fund को विदेशी नागरिकों और विदेशों में स्थित संगठनों से दान स्वीकार करने की अनुमती है
06:13इसके लिए विदेशी क्रेडिट या डेविट कार्ड और वाया ट्रांसफर या स्विफ्ट जैसे माध्यम उपलब्ध है
06:18हालाकि विदेशी दान में भी महामारी के दोरान आये शुरुवाती योगदान के मुकाबले बात के वर्षों में कमी का ट्रेंड
06:24देखा गया है
06:25इसका एक स्वाभाविक कारण ये माना जा सकता है कि कुरोना जैसी असाधारन आपात स्थिती के दोरान लोगों और संस्थाओं
06:32की प्रात्मिक्ता बड़ी पैमाने पर राहत और स्वास्थे सहायता थी
06:36जबकि संकट की तीवरता कम होने के साथ योगदान का स्तर भी सामान ने हुआ
06:40अब बात आती है कि इस फंड का इस्तिमाल कहां किया गया
06:43पीम केर्स फंड के उदेश्यों में आपात परिस्थितियों से प्रभावित लोगों को सहायता और राहत देना शामिल है
06:49कोरोना महमारी के दोरान इससे स्वास्थि सुविधाओं, मेडिकल उपकरणों, ऑक्सिजन से जुड़ी व्यवस्थाओं और अन्य राहत गतिवितियों के लिए सहायता
06:57दी गई
06:58फंड की खर्च और स्वीकृतियों से जुड़ी जानकारी उसके आधिकारिक रिकॉर्ड में उपलब्ध कर आई जाती है
07:03एक और महत्वपोन बात ये है कि PM केर्स फंड की आधिकारिक वेबसाइट पर घरेलू और विदेशी दोनों तरह के
07:09दान की व्यवस्था आज भी मौजूद है
07:11यानि योगदान में कमी का मतलब ये नहीं है कि फंड ने दान लेना बंद कर दिया है
07:16बलकि मौजूदा व्यवस्था के तहट नागरिक और संगठन अभी भी इसमें स्वैच्छिक योगदान कर सकते हैं
07:21तो कुल मिलाकर तस्वीर ये है कि PM केर्स फंड में कुरोना के शुरुवाती दौर जैसा बड़ा योगदान अब दिखाई
07:27नहीं देता
07:28घरेलू और विदेशी दोनों स्त्रोतों से आने वाले चंदे में महामारी के चरम के मुकाबले गिरा वटाई है
07:33ये बदलाव उस दौर की असाधारन परिस्थितियों और मौजूदा सामान्य स्थिति के बीच अंतर को भी दिखाता है
07:39आखिर में PM Cares Fund को समझने के लिए केवल ये देखना परियाप्त नहीं है कि कितना पैसा आया बल्कि
07:45ये भी देखना जरूरी है कि किस अवधी में कितना योगदान मिला, कितना पैसा स्वीकृत या खर्च किया गया और
07:51किन उद्देश्यों के लिए उसका इस्तिमाल हुआ
08:09एखिर टो अट वैट आप नहीं है कि उनक्तिया खर्च कि अवधी में कितना आपर द्च को अवधी में कितना
08:13पैसा स्वीकृत इस्तिमा वोगद आप समयभरे बादान मिला प्रूबीर है कितना और कि आवधी पैसे देखना झाहिएंग।
Comments