00:0020 अगस 2026 को पुर्व कॉंग्रेस सांसल सज्जन कुमार का निधन हो गया
00:041984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामले में उम्रकैद की सजाकाट रहे सज्जन कुमार की तब्यत बगड़ने के बाद
00:11उन्हें दिल्ली के सब्दजंग अस्पताल ले जाया गया जहां अस्पताल सुत्रों के अनुसार डॉक्टरों ने उन्हें में तगोशित कर दिया
00:19उनके मृत्यों का सठीक चिकत सक्या कारण ततिकाल सारवजनिक नहीं किया गया है
00:24सज्जन कुमार की कहानी भारती राजनीती के उसे दौर से जुड़ी है जिसमें एक तरफ वे दिल्ली के प्रभावशाली कॉंगरस
00:32नेता और तीन बार लोकसभा सांसत बने तो दूसरी तरफ
00:351984 की हिंसा से जुड़े मामलों में लंबे समय तक आरोपी रहे और अंततह अदालतों ने उन्हें दोशी करार करके
00:43उम्रकैद की सजा सुनाई
00:45तो आखेर 1984 में क्या हुआ था चलिए आज आपको सज्जन कुमार की पूरी कहाने विस्तार से बताते हैं
00:54नमस्कार मेरा नाम है रिचा पराशवर और आप देख रहे हैं One India Hindi
01:02सज्जन कुमार का जन्म 23 सितंबर 1945 को हुआ था
01:06उनका राजनितिक सफर दिल्ली की स्थानिया राजनीती से शुरू हुआ
01:09रिपोर्ट्स के अनुसार वे कभी आनंद पर्वत शेतर में चाय की दुकान चलाते थे
01:14धीरे धीरे वे कॉंग्रेस की राजनीती में आगे भढ़े और दिल्ली नगर निगम से लेकर संसत तक पहुँचे
01:21वे पश्यमे दिल्ली की राजनीती में प्रभावशाली नेथा माने जाते थे
01:25उन्होंने लोकसभा चुनाव जीतकर राष्ट्री राजनीती में अपनी जगे बनाई और तीम बार सांसत रहे
01:31लंबे समय तक उनका अदली कॉंग्रेस अंगठन और स्थानियर राजुनितिक नेटवर्क पर मजबूत प्रभाव रहा
01:37लेकिन 1984 के बाद उन पर लगे आरोपो ने उनकी राजुनितिक करियर को उसकी दिशा ही बदल दी
01:46तो 1984 में आखिर हुआ क्या था
01:4931 ओक्टूबर 1984 को ततकालिन प्रिधान मंतरी इंद्रा गांधी की उनके दो सिख अंगर अक्षपोय ने की बॉडिगार्ड्स ने हत्या
01:58कर दे थी
01:58यह हत्या जून 1984 में हुए ओपरेशन ब्लू स्टार के बाद गी गई थी
02:04इंद्रा गांधी की हत्या के अगले दिनों में दिल्ली और देश के कई हिस्सों में सिख समुदाय के खिलाफ हिंसा
02:12भड़क उठी
02:12दिल्ली में हजारों सिख मारे गए और घरू और दुकानों को जलाया गया तथा अनेक परिवार विस्थापित हुए
02:20अलग-अलग सोर्स में मृतकों की संख्या अलग-अलग बताई गई है
02:24दिल्ली के लिए सरकारी आकडाबाद में लग-भग 2733 मृतकों का बताया गया
02:30इस हिंसा को लंबे समय तक 1984 के सिख विरोधी दंगे कहा जाता रहा
02:35जबकि कई मानवादिकार संगठनों और विशलेशकों ने इसे संगठित हिंसा या सिख विरोधी नर संहार की रूप में वढ़नित किया
02:55हिंसा के दौरान आमनागरिकों के साथ साथ कुछ हिंदू और मुस्लिम परिवारों ने सिख पड़ोसियों को बचाने की कोशिश भेकी
03:02इसलिए हम इतिहास को किसी पूरे समुदाई के खिलाफ आरोप की तरहें नहीं बलकि राजुनेतिक हिंसा प्रिशासनिक विफलता और पेडित
03:11परिवारों के न्याई के संगर्ष के रूप में समझना चाहिए
03:14लेकिन ये तो पूरी घट ना थी
03:18सबसे जो दिल्चस पहलू है वो यह है कि सजन कुमार पर आखित क्या आरोप लगे इस दंगे का
03:25सजन कुमार पर आरोप था कि उन्होंने भीड को उटसाया और सिखों के खिलाफ हिंसा में भूमिका निभाई
03:31उनके खिलाफ सबसे महतोपुन मामलों में दिल्ली कैंट के राजनगर इलाके में एक ही परिवार के पात सदस्क्यों के हत्या
03:38और एक गुरुद द्वारे को जलाने का मामला शामिल था
03:42इस मामले में निचली अदालत ने पहले उन्हें बरी कर दिया था लेकिन पेडितों, CBI और अन्य पक्षों की अपील
03:50के बाद दिल्ली हाई कोट ने निचली अदालत का फैसना पलट दिया
03:5417 दिसंबर 2018 को दिल्ली हाई कोट ने सजयन कुमार को आप राधिक साजिश समुदायों की बीच दुश्मनी बढ़ाने और
04:02हिंसा भढ़काने से जुड़े अपराधों में दोशी ठहरा दिया
04:06अदालत ने उन्हें उनके शेश प्राकरतिक जीवन तक जेल में रखने की सजा सुनाई
04:13अदालत के अनुसार मामला 1 और 2 नवेंबर 1984 को राजनगर और पालम कॉलनी छेतर में हुई हत्याओं और गुरुद्वारों
04:22को जलाने से संबंध है था
04:24इस फैसले को 1984 के मामलों में एक महतोपुन रिन्याई कदम माना गया क्योंकि इतने वरिष्ट राजनितिक नेता को पहली
04:32बार इतनी गंभीर सेजा में ले
04:34इसके बाद सजन कुमार ने आत्म समर्बन किया और उन्हें जेल भीश दिया गया
04:43सजन कुमार के खिलाफ कानूनी मामले 2018 के फैसले के बाद भी सिमाप नहीं हुए
04:482025 में दिली के एक अदालत ने उन्हें सरसुति विहार छेतर में जस्वन्स सेंग और उनके बेटे तरून देप सिंग
04:54की हत्या के मामले में दोशी ठहराया
04:56अदालत ने 25 परवरी 2020 को उन्हें उम्रिकैद की सेजा सुनाए
05:01अभिहोजन पक्ष ने मृत्यू दंड की मांग की थी लेकिन अदालत ने उम्रिकैद का फैसला दिया
05:08रिपोर्ट्स के अनुसार ये घटना एक नमंबर 1984 की थी जब दोनों सिख पिता पुत्र की हत्या करती गई थी
05:14इस फैसले के बाद सजन कुमार दो अलग-अलग जो 1984 दंगा मामलों में उम्रिकैद की सेजा काट रहे थे
05:25जिसके बाद जनवरी दोसारबश में दिली की एक अदालत ने सजन कुमार को जनक पुरी और विकास पुरी छेतरों में
05:30हिंसा भड़काने से जुड़े एक अन्य मामले में बरी कर दिया
05:35अदालत ने कहा कि उस मामले में अब योजन पक्ष दोश्य सिद्धी के लिए जरूरी कारूनी मानग पुरा नहीं कर
05:41पाया
05:41ये बरी होना उनके खिलाफ पहले से मौजूद उम्रिकैद की सजाओं को समाप्त नहीं करता था
05:47वे अन्य मामलों में दूशी ठहराए जा चुके थे और जेल में सजा काट रहे थे
05:53ये बिंदु जो है ये पॉइंट बहुत महत्वपून है क्योंकि किसी व्यक्ति के खिलाब कई मामले हो सकते हैं
06:00और हर मामले में अदालत का निर्णय अलग हो सकता है
06:03एक मामले में बरी होना दूसरे मामले की सजा को अपने आप खत्म नहीं करता है
06:08अब आते हैं उनकी जीवन की आखरी जो पड़ाव रहा है उस पर
06:13जेल में आखरी समय
06:1420 अगस 2016 को जेल में उनकी तब्रत बिकरी
06:18उन्हें सफदर जंग अस्पताल लाया गया
06:20लेकिन अस्पताल सुत्र के अनुसार उन्हें बृत अवस्था में लाया गया
06:23उनकी उम्र को लेकर शुरुवाती रिपोर्ट में अंतर दिखाई दिया
06:26कुछ रिपोर्टों ने उम्र 80 जबकि कुछ ने 81 वर्ष बताई
06:30उनकी मृत्यों के समय वे 1984 के सिख विरोधी हिंसा के मामले में उम्रकैद की सजा कार्ट रहे थे
06:36उनका अंतिम समय न्याइक हिरासत ने बीता जबकि उनके खिलाफ चलने वाली कानूनी प्रक्रिया
06:42और पिडित परिवारों के न्याय का सवाल कई दशकों तक जारी रहा
06:49सजन कुमार के विरासत दो बिल्कुल अलग हिस्सों में बटी हुई दिखाई देती है
06:53एक तरफ वे दिल्ली के जमीनी निता थे जिन्होंने स्थानिय राजनिती से उठकर संसत तक का सपरताई किया
07:00उनके समर्थक उन्हें संगठन बनाने वाला और जणाधार वाला निता मानते थे
07:04तो दूसरी तरफ 1984 के हिंसा से जुड़े मामलों में अदालतों के फैसलों ने उनके राजनितिक जीवन पर गंभीर सवाल
07:12खड़े किये
07:122018 के दिल्ली जो हाई कोट के फैसले के बाद उन्होंने कॉंगर्स से दूरी बनाई और उनका सक्रियर राजनितिक करियर
07:21समाथ हो गया
07:22परिद परिवारों और सिक संगठनों के लिए उनका दोश सिद्ध होना लंबे इंतिजार के बाद न्याय मिला था
07:30वही इस मामले ने ये बहस में उचाई कि राजनितिक प्रभावशारी लोगों के खिलाफ न्याय कारवाई में इतनी देरी क्यों
07:37हुई
07:38तो खुल मिलाकर आपको ये बता सकते हैं कि सज्जन कुमार का जीवन भारतिय राजनिति के उठान और पतन की
07:44एक जटिल कहानी है
07:45वे स्थानिय राजनिति से उठकर संसत बने लेकिन 1984 की हिंसा से जुड़े आरोपों ने उनके पूरे सारवजनिक जीवन को
07:53बदल दिया
07:54दशकों बाद अदालतों ने उन्हें अलग अलग मामलों में दोशी ठहराया और उम्रकैद की सजा सुनाई
08:00जनवरी 2026 में उन्हें एक मामल में बरी भी किया गया लेकिन अन्य मामलों की सजा जारी रही
08:07अगस्ट 2026 में जेल में उनके मृत्यों के साथ उनका जीवन समाथ हुआ
08:12लेकिन 1984 के पिडित परिवारों के लिए न्याय जवाब देही और राशनितिक संरक्षन की बहस आज भी महत्रपुन बनी है
08:19इस अतिहास से सबसे बड़ा सबक यही है कि सामप्रदाइक हिंसा में दोश किसी पूरे समुपाय का नहीं होता
08:25जम्यदारी उन लोगों के तय होनी चाहिए जिन्होंने हिंसा की उसे भढ़काया उसे संगठित किया या उसे रोकने में विफल
08:33रहे
08:33नियाय में देरी पिडितों के घावों को और गहरा कर सकती है और 1984 की कहानी इसी दर्द की सबसे
08:41बड़ी मिसालों में से एक है
08:43और आज वो व्यक्ति भी अब इस दुनिया में नहीं है जिस पर दंगे को भड़काने का
09:10और आज से नहीं है
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