जिले के 1167 स्कूलों में बंटता है पोषाहार, मिड-डे-मिल से जुड़े हे 96 हजार बच्चे
सवाईमाधोपुर. प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पन्नाधाय बाल गोपाल योजना के तहत बच्चों को दिए जाने वाले पाउडर मिल्क के भंडारण और वितरण में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों ने सरकार को कठोर रुख अपनाने पर मजबूर कर दिया है। अब अन्नपूर्णा बाल गोपाल योजना में वितरण में गड़बड़ी या हेरफेर करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।शिकायतों के बाद अब सरकार ने साफ कर दिया है कि यदि किसी भी विद्यालय में नौनिहालों को खराब दूध पिलाने, पाउडर के दुरुपयोग, कालाबाजारी या सार्वजनिक धन की हानि का मामला सामने आया तो जिला शिक्षा अधिकारी से लेकर संबंधित जिम्मेदार अधिकारी तक व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह होंगे।
शिक्षा विभाग में शुरू हुई हलचल
पन्नाधाय बाल गोपाल योजना में पाउडर मिल्क वितरण को लेकर सरकार की सख्ती के बाद जिले में शिक्षा विभाग की हलचल तेज हो गई है। आयुक्त विश्व मोहन शर्मा ने साफ चेतावनी दी है कि बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। किसी भी स्कूल में पाउडर मिल्क की बिक्री, अनधिकृत हस्तांतरण, गलत भंडारण, रिकॉर्ड में हेरफेर या एक्सपायर्ड दूध मिलने पर संस्था प्रधान, पीईईओ, यूईओ और सीबीईईओ के खिलाफ तत्काल कार्रवाई होगी। जिले में पोषाहार का बड़ा नेटवर्क है शिक्षा विभाग के अनुसार सवाईमाधोपुर जिले की 1167 स्कूलों में मिड‑डे मील पोषाहार का वितरण हो रहा है। पहली से आठवीं तक राजकीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, संस्कृत और मदरसा विद्यालयों में कुल 96 हजार बच्चे इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। ऐसे में दूध वितरण में गड़बड़ी सीधे नौनिहालों के स्वास्थ्य पर असर डाल सकती है।
टीम करेगी स्कूलों में भौतिक सत्यापन
सरकार ने स्कूलों में पाउडर मिल्क के रखरखाव और वितरण के लिए पांच सख्त नियम लागू किए हैं। विद्यालयों में फर्स्ट एक्सपायरी, फर्स्ट आउट सिद्धांत का पालन अनिवार्य होगा। केवल 15 दिन की आवश्यकता अनुसार ही मिल्क का स्टॉक रखा जाएगा। पैकेट और डिब्बों को नमी, धूप, चूहों और कीड़ों से बचाने के लिए सुरक्षित स्थान पर रखना होगा। संस्था प्रधान समिति हर महीने स्टॉक, निर्माण तिथि, एक्सपायरी डेट, बैच नंबर और वितरण रजिस्टरों का सत्यापन करेगी। जिला शिक्षा अधिकारी हर सप्ताह योजना की समीक्षा करेंगे और आकस्मिक निरीक्षण भी कराएंगे। जिले में निरीक्षण की भागदौड़ शुरू आदेश जारी होते ही जिला शिक्षा अधिकारियों ने विद्यालयों में जाकर स्टॉक रजिस्टर, बैच नंबर, एक्सपायरी डेट और वितरण व्यवस्था की जांच शुरू कर दी है। कई जगहों पर अचानक निरीक्षण कर यह देखा जा रहा है कि पाउडर मिल्क सुरक्षित स्थान पर रखा गया है या नहीं, पैकेट नमी और कीड़ों से बचाए गए हैं या नहीं, और बच्चों को सही समय पर दूध उपलब्ध कराया जा रहा है या नहीं।
इनका कहना है...
फिलहाल जिले में दूध पाउडर की सप्लाई पर्याप्त है। आगामी तीन माह के लिए हमने राज्य सरकार को मांग भेज दी है। स्कूलों में पोषाहार, दूध पाउडर, स्टॉक, निर्माण तिथि, एक्सपायरी डेट आदि के लिए सीबीईओ, पीईईओ, लेखाकर कमेटी बनाई है। ये कमेटी लगातार स्कूलों में निरीक्षण कर रही है। कई ब्लॉकों से रिपोर्ट आ गई है। शेष विद्यालयों से भी मंगवा रहे है। देवीलाल मीणा, जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक, सवाईमाधोपुर
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