00:00यह भारत का वो कुंड है जहां भगवान परशुराम ने अपनी मा की हत्या करने के बाद अपने हाथ से
00:05चिपकी हुई कुलहाडी से मुक्ति पाई थी।
00:08यह कहानी है महान रश्य जमदग ने और उनकी पत्नी पतिवरता रेणुका की।
00:12कहते हैं रेणुका हर दिन नदी से कच्चे घरे में पानी लाती थी और उनके सतीत्व के बल से वह
00:18घड़ा तूटता नहीं था।
00:42बटक गया था। वो इतने क्रोधित हुए कि उन्होंने अपने पुत्रों को आज्या दी।
00:47अपनी मा का वध कर दो। जब चारों बरे भाईयों ने मना कर दिया तो क्रोधित पिता ने उन्हें तुरंत
00:53पत्थर बन जाने का श्राप दे दिया।
00:55इसके बाद परशुराम ने पिता की आज्या को अपना धर्म समझा। उन्होंने भारी मन से अपनी कुलहारी उठाई और अपनी
01:01ही मा का सिर्धर से अलग कर दिया।
01:03उनकी आज्याकारिता से ब्रसन्न होकर जमदग्न ने वर्दान मांगने को कहा। परशुराम ने तुरंत अपनी मा को फिर से जीवित
01:10करने और साथ ही पत्थर बन चुके अपने चारों भाईयों को भी मुक्त करने का वर मांग लिया।
01:16सब फिर से जीवित हो गए। मानो कुछ हुआ ही न हो लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।
01:46के नाम से जाना जाता है आज भी