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RBI ने floating-rate loans को लेकर नए rules का प्रस्ताव रखा है, जिससे borrowers को interest rate और benchmark changes में ज्यादा transparency और protection मिल सकती है। Reserve Bank of India के proposed Interest Rates on Loans and Advances Directions, 2026 के तहत existing loans को नए framework में migrate करने के लिए borrower consent की requirement और migration पर fee न लेने जैसे provisions प्रस्तावित किए गए हैं... अगर finalised होता है, तो नया framework 1 April 2027 से लागू होने का प्रस्ताव है। Existing internal या external benchmark-linked loans को 1 April 2029 तक नए framework में migrate करने की one-time process प्रस्तावित है।


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00:00अगर आपका होम लोन, परसनल लोन या कोई दूसरा फ्लोटिंग रेट लोन चल रहा है तो RBI का नया प्रस्ताव
00:06आपके लिए काफी एहम हो सकता है
00:08क्योंकि अब बैंक अगर आपके लोन का बेंचमार्क बदलते हैं तो उन्हें मनमाने तरीके से इंट्रेस्ट रेट बदलना आसान नहीं
00:17होगा
00:17रिजब बैंक ओफ इंडिया यानि की RBI ने इंट्रेस्ट रेट ओन लोन एडवांस टाइरेक्सन 2026 का ड्राफ्ट फ्रेमवर्क प्रस्तावित किया
00:26है
00:26अगर इससे फाइनल एप्रोबल मिल जाता है तो नय रूल्स एक अप्रेल 2027 से लागू होने का प्रस्ताव है
00:32तो सवाल है कि इसका borrowers पर क्या असर पड़ेगा यानि कि जो करज ले रखा है उस पर क्या
00:38असर पड़ेगा और existing loans वाले को क्या फायदा मिल सकता है
00:43आईए आसान भाशा में समझते हैं सबसे पहले समझिए कि floating rate loan काम कैसे करता है
00:48तो floating interest rate आम तोर पर दो चीजों से मिलकर बनता है
00:52एक benchmark rate और दूसरा bank का spread या margin यानि benchmark में बदलावाता है तो आपकी loan की interest
01:00rate भी बदल सकती है
01:01और इसका सीधा असर आपकी EMI या loan की repayment पर बढ़ सकता है
01:06उधारन के लिए अगर benchmark बढ़ता है तो interest rate बढ़ सकती है
01:10ऐसे में EMI बढ़ सकती है या फिर अगर EMI को जादा नहीं बढ़ाया जाता तो loan चुकाने में जादा
01:16समय लग सकता है
01:17यानि की tenure बढ़ सकती है
01:19इसलिए benchmark और उससे reset करने का तरीका borrowers के लिए बहुत महत्पून है
01:24RBI के प्रस्ताव के मताबिक loan agreement में benchmark से जुड़ी जानकारी साफ साफ दी जानी होगी
01:30इसमें बताया जाएगा कि loan किस benchmark से linked है
01:34benchmark कितनी frequency पर reset होगा और reset date क्या होगी
01:38यानि borrowers को पहले से जादा clarity मिल सकती है
01:41कि उसकी floating interest rate कब और किस अधार पर बदलेगी
01:45इसका मकसद यही है कि lender और borrowers के बीच interest rate को लेकर transparency बढ़े
01:51और pricing में अचाना क्या इसपस्ट बदलाव की घुंचाइस कम हो
01:55अब सबसे महत्पून हिस्सा पे आते हैं
01:57RBI ने existing loan को नए framework में migrate करने के लिए one time exercise का प्रस्ताव रखा है
02:05Internal या external benchmark से जुड़े existing loan को नए framework में एक अपरेल दोहजार उनतीस तक migrate की आजा
02:12सकेगा
02:13लेकिन यहाँ एक एहम बात है
02:14borrowers की consent ज़रूरी होगी
02:16यानि existing loan को नए framework में shift करने के लिए borrower की सहमती लेनी होगी
02:22और migration के समय revised interest rate भी उस rate से ज़्यादा नहीं हो सकती है
02:27जो loan को नए framework में shift करने से ठीक पहले लागू थी
02:31परपोज framework के मताबिक lender को इस migration के लिए borrower से कोई fees यानि की charge लेनी की अनुमती
02:38नहीं होगी
02:38यानि कि अगर आपका existing loan नए framework में shift होता है तो सिर्फ इस migration के नाम पर अलग
02:44से charge नहीं लगाया जा सकेगा
02:46यह borrower के लिए एक महत्पून protection हो सकता है यहाँ एक बात बिलकुल साप समझना जरूरी है कि यह
02:52proposal लागू होने का मतलब यह नहीं है कि हर borrower की EMI तुरंट कम हो जाएगी
02:57interest rate अभी भी benchmark और lender के spread पर depend करेगा
03:02RBI का focus मुखे रुप से transparency, benchmark clarity और borrower protection पर है
03:07यानि borrower को यह समझने का बेहतर मौका मिलेगा कि उसकी interest rate किस अधार पर तै हो रही है
03:13और कब reset हो सकती है
03:15तो इसका सबसे बड़ा फायदा है productivity और transparency
03:19अगर आप floating rate loan ले रहे हैं तो आपको पता होना चाहिए कि आपका loan किस benchmark से चुड़ा
03:25है
03:25rate कब reset होगी और benchmark बदलने पर आपकी loan पर क्या असर पर सकता है
03:30existing borrowers के मामले में consent की requirement और migration पर फीड न लगाने का प्रस्ताव भी महत्पून है
03:37तो कुल मिलाकर RBI का या proposed framework floating rate loan borrowers के लिए एक बड़ा regulatory change हो सकता
03:44है
03:44अगर roles final होते हैं तो एक अपरेल 2027 से नया framework लागू होने का प्रस्ताव है
03:50जबकि existing loans को नय framework में migrate करने की one time process एक अपरेल 2029 तक पूरी करने का
03:58प्रस्ताव है
03:58लेकिन ध्यान रखिए अभी ये proposed roles है final regulation नहीं
04:02इसलिए borrowers को final RBI notification और उसमें दिये गए actual implementation rules पर नज़र रखनी चाहिए
04:09अगर आपके पास floating rates, home loan या कोई दूसरा loan है
04:13तो इस बड़ाव का आपकी EMI और interest cost पर क्या असर पर सकता है
04:17या समझना अब और भी जरूरी हो गया है
04:20इस पूरे मामले को लेकर अगर आपको कोई और भी चानकारी चाहिए
04:24तो आप अपने सवाल को comment section में पूछ सकते हैं
04:27हम जवाब देनी की कोशिश करेंगे
04:28और ऐसे ही तमाम updates और share market से जुड़ी तमाम चानकारी के लिए
04:32आप बने रहें good returns डिश्टल के साथ
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