00:15प्रुषिस्त्री आपस में ही तै कर लेते हैं
00:28वहाँ उनका गड़ित चलता है
00:30गड़ित लगाना आता किसी को नहीं है
00:32अरे जब प्रेम ही नहीं पता तो प्रेम विवाह कैसे कर डालोगे
00:36और वैसे ही जो घर वाले उनसे पुछता हूँ कि
00:38आयोजन शब्द का अर्थ पता है क्या योजना माने क्या होता है
00:43विवस्था पक कौन है बीतर बैठा मन है
00:45उसको नहीं समझा
00:47तो उसके द्वारा रची गई विवस्था पर भरोसा कैसे कर लिया
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