00:00ज्यो नलिनी सुविटा कहो उड़नको मनमाही शूटे तो उड़ जाई है पकड़ छूटत नाही सुवा जानते नो सुवा तोता तोता
00:15पकड़ने वाला जो होता है वह एक नलिनी एक नाल दे करके आता है उस नाल पर जब तोता बैठ
00:22जाता है तोते को रिजाया जाता है उस �
00:24बैठाने के लिए खाने का कुछ दिखा दिया है कोई और थी इसकर दी तब तोट्य ने पकड़ लिया
00:52जिसने उसको बांध रखा है, छूटे तो उड़ जाई है, पकड़ छूटत ना ही, यह है मनुष्य के बंधन का
01:01कारण, बंधन समझ जाईए, सुतंतृता अपने आप उपलब्ध हो जाएगी, आप अपने बंधन को सिर्फ पकड़ते नहीं हो, जब आपको
01:11दुख मिलता है, �
01:12ए बंधन को जर्ख मिला होता है, आप उसी को और जोर के पकड़ लेते हो, कि आप देखो पर
01:18दुख चाता है, तो ऐसा थोड़ी है कि फिर उसे वेरागिये वैरस से हो जाता है, वह चलाやता है, सीथे
01:23कहता है, ना ना, शत्य चाहिए, जब किसी के घर में दुख हाता है, तो
01:28तो और अन्दविश्वासी हो जाते हैं लोग वो और ज्यादा टोना टोटका करने लग जाते हैं जब किसी वो असफलता
01:34मिलती है तो वो और ज्यादा भीतर से जूठा हो करके असफलता के जूठे कारण खोजता और उनको दोश देता
01:41है छूटे तो उड़ जाई है पकड़ �
01:44अभी छूटो अभी उड़ जाओगे पर जैसे जैसे उस तोते को दिखता है कि फसरा है वो जिस चीज ने
01:52उसको फसा रखा होता है वो उसी चीज को और जोर से बगड़ लेता है और फिर वो अंततर क्याद
01:57हो जाता है पूरी उम्र के लिए अब पहड़े का तोता बन जाता
02:00है यह इनसान का हाल है हम जिनको अपना दुख का साथ ही समझते हैं ऐसा तो नहीं वो हमारे
02:07दुख के कारण हो और ऐसा ही है
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