00:0015 साल पहले पहली बार आया था शिमला तब भी दिखाई दिया था कि बहुत बहुत ज्यादा यहां बसाव हो
00:08गया है
00:08और हर बार जब आता हूँ दो दो तीन साल बाद तो उसका घनत तो बढ़ा ही दिखाई देता है
00:15बुरा लगता है ऐसा लगता है जैसे परवत की खाल नोच लियो किसी ने
00:19परवत की खाल हरे रंग की होती है जैसे हमारी होती है खाल ऐसी परवत की होती है
00:27उसकी जैसे चमड़ी उतार लियो किसी ने और वहां पे घर बना दिया होटल बना दिया
00:32दुकाने बना दिए, पार्किंग लोट्स बना दिए, चोडी-चोडी सडकें बना दिए, जैते कि जीवित प्रणी कि जीते जी खाल
00:40उतारी जा रही हो, ये तो हिंसा ही है, सीधी-सीधी हिंसा है, और जो हिंसा कर रहा है वो
00:48परवत के साथ भी हिंसा कर रहा है, परवत की सारी
00:50प्रजातियों के साथ हिंसा कर रहा है
00:53और अपने साथ भी कर रहा है
00:54क्योंकि उसे भी कुछ मिलने नहीं वाला ये सब करके
00:57कुछ नहीं मिलने वाला
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