00:01साथियों, मैं लाइब की कुछ प्रैक्टिकल बाते भी आपसे शेयर करना चाहता हूँ।
00:07कैंपस का जीवन और कैंपस के बाहर का जीवन इन दोनों में बहुत बड़ा अंतर होता है।
00:26आएटी की परिक्षा में सिलेबस होता है। लेकिन जिन्दगी की परिक्षा में सब कुछ आउट आप सिलेबस होता है।
00:44आप याग करिए।
00:46कैंपस लाइक में सारे फंडे क्लियर होते थे।
00:55क्या पढ़ना है। कौन सा एसाइन्मेंट पूरा करना है। कौन सी परिक्षा देनी है।
01:05साब पहने से तय होता था। लेकिन जिन्दगी कुछ अलग तरह से चलती है।
01:16वहाँ न कोई तय कोर्ष होता है न कोई question paper होता है।
01:25कई बार तो ये भी कोई नहीं बताता कि असली सवाल क्या था।
01:33कि वह सवाल भी आपको खुद पहचानना पड़ता है।
01:42मैंने आईटी के अनेक अलमनाई की यात्रा को देखा है।
01:50उनकी सक्सेस का कारण सिर्फ ये नहीं था कि उन्होंने सही जवाब दिये।
01:58उनकी सक्सेस का कारण ये था कि उन्होंने वो सवाल पहचाने जिने दुनिया ने सवाल मानना ही छोड़ दिया था।
02:16उन्होंने उन समस्याओं का समाधान खोचा जिनके साथ बाकी लोग समझोते कर चुके थे।
02:32और इसलिए लाइप में क्यूरियोसिटी बनाए रखिये।
02:41अपनी लर्निंग इंस्टिक को जलाए रखिये, जगाए रखिये, चेतना बनाए रखिये।
02:51जो बाते बीना सोचे समझे स्विकार कर ली जाती हैं, जरा उन्हें पर रखिये।
03:01उन पर सवाल उठाईए, लेकिन सिर्फ सवाल पुछ का मत रुकिये, उनका समाधान खोजने का साहस भी रखिये।
03:16यही सोच आपकी ये अलग पहचान बनाएगे।
03:31जानोड वनन्दीया अबनाएगे।
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