00:08अमेरिका और रूस की जंग का असर अब सिर्फ यूक्रेन के मोर्चे तक सीमित नहीं रह गया है।
00:30और इसी मुद्दे पर अमेरिका के प्रभावशाली सीनेटर रांड पॉल ने अपनी ही सरकार को चेतावनी दे दी है।
01:06अमेरिकी राष्ट्रपती को ये अधिकार देने की बात है कि वो रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल या प्राकृतिक
01:12ग्यास खरीदने वाले देशों के सामान पर 100% तक टैरिफ लगा सके।
01:16उन देशों को भी निशाना बनाया जा सकता है जिन पर रूस के खिलाफ लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों को दरकिनार
01:22करने में मदद करने का आरोप हो।
01:24यही प्रावधान भारत के लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है।
02:18इसके बाद कीमते बढ़ सकती है और इसका असर आम अमेरिकी परिवार की जेब पर पढ़ सकता है।
02:27अमेरिका पिछले कही वर्षों से भारत के साथ अपने स्ट्राटेजिक रिष्टे मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
02:33खासकर चीन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए वाशिंग्टन के लिए भारत एक महत्वपूर्ण साझेदार माना जाता है।
02:39ऐसे में पॉल का तर्क है कि अगर अमेरिका भारत पर ही 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की धमकी देगा
02:45तो ये रन नीती उल्टी पड़ सकती है।
02:47भारत को रूस से दूर करने के बजाए अमेरिका की ऐसी नीती नई दिल्ली को मॉस्को और बीजिंग के और
02:52करीब ला सकती है।
03:17निशाना बनाना होगा। लेकिन विरोधियों का सवाल है क्या रूस पर दबाव बनाने के लिए भारत जैसे स्ट्राटिजिक साजहिदार को
03:23आर्थिक रूप से निशाना बनाना सही रास्ता है।
03:26रैंट पॉल ने प्रस्ताव में राष्ट्रपती को मिलने वाली व्यापक टैरिफ शक्तियों पर भी सवाल उठाए है।
03:31डेमोक्राटिक सीनेटर रॉन वीडन ने भी इतनी व्यापक राष्ट्रपती शक्तियों और संभावित आर्थिक नुकसान को लेकर चिंता जाहिर की है।
04:01साजहदार को नाराज करने का जोखिम उठाएगा। क्योंकि ये सिर्फ टैरिफ की लडाई नहीं है। ये रूस भारत चीन और
04:07अमेरिका के बीच बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन की लडाई भी है। और रैंट पॉल की चेटावनी ने वाशिंग्टन के सामने
04:14यही सव
04:14पाल खड़ा कर दिया है। रूस को दबाने के चक्कर में कहीं अमेरिका अपने ही आर्थिक हित और भारत के
04:20साथ स्ट्राटेजिक रिष्टे तो कमजोर नहीं कर देगा।
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