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शिव को कैसे पाया जाए, सावन में क्यों बढ़ जाता है जलाभिषेक का महत्व? कथावाचकों से जानिए
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00:00चले हमारे साथ इस सेशन में जिसका नाम हमने रखा है शिव कथा दो खास महमान हमारे साथ है मैं
00:07परिचे करा देती है एक बार फिर से चिनमेनेंद बापू जी हमारे साथ है कथा वाचक और महेश गुरू जी
00:13हमारे साथ है आप दोनों का बहुत-बहुत स्वागत है आज तक
00:28सवाल से करूंगी कि क्या किवल जल चढ़ा देना चार सुंबर कवरत रख लेना ही शिव है शिव को कैसे
00:36पाया जाए आप से शुरुबात करूंगे चिन्मेन जी
00:46यह बहुत प्यारा उसर चल रहा है शुरावन का महीना जिस वक्त भगवान नारायन योग निद्रा में विश्राम में चले
00:58जाते हैं और इस वक्त सारी जिम्मेदारी भगवान शिव के हाथ में होती है
01:03यानि सरजन पालन और विसरजन ये तीनों कारिय भगवान शिव के द्वारा हो रहा होता है जैसा कि आपने प्रशुन
01:13किया शिव संकिर्ण नहीं है शिव विराट है आज की जनरेशन शंकरोत शंकरह शंक का मतलब होता है सुख शम
01:29सुखम
01:31तो मैं आज की जनरेशन को ये कहना चाहूंगा कि जीवन में जहां जहां भी सात्विक सुख का अनुभो हो
01:38रहा हो तो आप ये महसूस करना कि वह सुख डारेक्ट भगवान महादेव के द्वारा ही प्राप्त हो रहा है
01:47जीवन में जहां जहां भी संयम आपके जीवन में है वह संयम स्वेम भगवान शिव के द्वारा ही प्राप्त हो
01:56रहा है
01:58संसार के भोग में और अध्यात्म मेदि आपने संतुलन बना करके रखा है तो वो शिव के बगएर संभव नहीं
02:07है
02:07तो आज के प्रसंग में भगवान महादेव को अनुभो करना है
02:11तो हर सात्विक सुख में और जीवन के हर स्वैयम में
02:16भगवान महादेव को अनुभो किया जा सकता है
02:20भगवान शंकर एक क्रियात्मक रूप नहीं है
02:22उनका बड़ा विराट रूप में है
02:24भावात्म कुरूप है, शिव जी किवल क्रिया में बंधे हुए नहीं है, यह तो शिव जी की एक क्रिया को
02:30महत्व दिया गया है ताकि व्यक्ति की श्रद्धा वहाँ पर जुड़ी रहे, भाव बना रहे, और हकीकत यह है कि
02:38भोले नात क्रिया से प्रशन नहीं होते हैं, भोल
02:53स्मरण कर लेंगे, स्मरण कर लेंगे, तो भगवान खुद बखुद आपको दर्शन दे देगे, हाँ निश्यत रूप से भगवान का
03:03स्मरण कहीं भी आप करेंगे, यसे हम रुद्राष्ट कम में पढ़ते हैं, नमामी, शमीशान, निर्वान रूपम, विभुम व्यापक
03:52शिव क्या है?
03:53जहां से इस सिर्ष्टी की शुरुवात होती है, जहां से सारा संसार सुरू होता है, जहां से इस पंदन सुरू
04:00होता है, उस तत्तो का नाम शिव है.
04:06एक चीज जो मैं चाहूंगी, चिर्मेनन जी, आपसे थोड़ा हमारे दर्शकों को भी विताइए, क्योंकि यहां जो तमाम लोग बैठे
04:13हैं, सुभा से हमें सुन रहे हैं, जब हम इस धर्ती पर हैं, धर्म संसार चल रही है, तो इसका
04:19बढ़नन करना, इसकी व्याख्या करन
04:31इन दोनों में बहुत अंतर है, धर्म हमें धारन करता है, और आध्यात्म हमें ब्रह्मान भूति कराता है, शिवान भूति
04:45कराता है, हमारी पहचान हमारे शरीर से नहीं है, हमारी अंतरात्मा से है, वेदांत में प्रशन उठता है को हम,
04:57कौन है हम, इसका उत्तर धर्म के पा
05:01पास नहीं है इसका उत्तर अध्यात्म के पास है शिवु हम जो शिव हैं वही मैं हूं जो हमारे वेदों
05:09के महावाक्यों ने कहा अहम ब्रह्मास्मी तत्व मसी ये चार महावाक्य है चार वेदों के अहम ब्रह्मास्मी मैं ही ब्रह्म
05:18हूं तत्व मसी जो तुम हो वही मैं हूं
05:24प्रज्ञानम ब्रह्म्ह जिस व्यक्ति को बोध हो जाए ज्ञान हो जाए सत्यका वही शिव है और आयमात्मा ब्रह्म्ह ये चौथा
05:35सुत्र जो दिया चार महावा क्यों में आयमात्मा ब्रह्म्ह हमारी जो अंतरात्मा है वही ब्रह्म्ह है तो अध्यात्म के पास
05:45उत्तर है श
05:46वो हम, हम कौन है, हमारी पहचान जो हमारा नाम है, वो हमारी पहचान नहीं है, अंदर से जो बैठ
05:53कर बोल रहा होता है, ये मेरा हाथ, ये मेरा पैर, ये मेरी आखें, ये मेरा मस्तक, ये मेरा शरीर,
06:00इसका मतलब है, कि वो जो बोल रहा है, वो शरीर नहीं है, कोई और है, जो
06:05जो वो बोल रहा है उसी को पहचान लेना इसका उत्तर सिर्फ अध्यात्म के पास है धर्म वो है जो
06:13हमें धारण करके रखता है जो हमें अनुशाशित करके रखता है मनुश्यजाती का Sannakshand मैं समझता हूँ केवल और केवल
06:23धर्म के माध्यम से हो सकता है क्योंकि धर्म ही हमे
06:27यह बताता है, यह हमारी माँ है, यह हमारी बहन है, यह हमारा पुत्र है, यह हमारा भाई है, यह
06:33हमारा पिता है, यदि धर्म न होगा, तो इस सुत्र का ज्यान हमको कैसे होगा, इसलिए पूरी दुनिया जो भी
06:41संसार में लोग कहते हैं, कि मैं धर्म को नहीं मानता, मैं कहता ह
06:57लेकिन धर्मों को माने बगेर जीवन हो ही नहीं सकता तो धर्म और अध्यात्म में बहुत अंतर हैं चले शेव
07:05की ही बात करते हैं क्योंकि हमारा सेशन जो है
07:26और हम सब देखते भी हैं, गंगा की धारा भगवान संकर के सिर से गिरती है, है ना, विश्नु के
07:33चरणों से जल गंगा मया बही और वो सिब जी के सिर में आ गई, सिब जी के सिर से
07:39गंगा मया बहती है और सास्त्रों में अगर गहराई में जा करके देखेंगे, तो सारे संसार
07:45में जो जल ब्यापत है वो गंगा का ही जल है असल में तो स्वभाव से ही
07:51शिब को जल प्रिये है और बारिस के चार महीनों में अगर देखा जाए
07:56तो सबसे ज़्यादा बारिस सावन के महीने में होती है इसलिए
08:00स्वाभाविक है जिस महीने में
08:01सबसे ज़्यादा पानी गिरता है
08:03वो शिप को सबसे ज़्यादा प्यारा होगा ही सही
08:05इसलिए सावन और शिप का बड़ा
08:07connection है जो सावन के
08:10महीने में भगवान शिप की
08:11भक्ती करता है निश्वित
08:13शिप उस पर बहुत प्रसन
08:16होते हैं दूसरी बात
08:17एक और है
08:20चतुरमास प्रारम हो जाता है
08:21भगवान नाराइन
08:23इस समय जल में शयन करते हैं
08:25हरी और हर अभेद हैं
08:28जब नाराइन जल में सयन
08:29करते हैं तो उस समय जल
08:31शिप को बहुत जादा इतना
08:33प्रिय हो जाता है जैसे उनको नारायन प्रिय है इसलिए उस समय
08:38जो भगवान शिब के जैसे कावड यातरा अभी आप चर्चा हो रही थी
08:42कावड यातरी जल लेकर के आते हैं कोई छिपरा मया से लेता है
08:47कोई नर्मदा से लेता है उदर उतर में चले जाएं तो फिर गंगा का जल भगवान भोले नात पर चड़ाते
08:54हैं इसलिए चड़ाते हैं क्योंकि उस समय जल में भगवान का बास होता है हरी का बास होता है वो
09:00जल जाकर के जब सिप पर चड़ता है तो सिप निश्यत रूप से
09:14कावड यात्रा करें लेकिन पूजा अक्सर हर कोई करता है सावन के ही महीने में एक आम ग्रहस्त के लिए
09:20कितनी एहम है ये पूजा और किस तरीके से वो शिव को पाश सकता है
09:24बहुत अच्छा प्रश्न किया हमारे शास्त्र कहते हैं पूकार्थ है ऐश्वर्य पूकार्थ है लक्ष्मी पूकार्थ है सुख जिनको जीवन में
09:39सुख ऐश्वर्य धन की अकांग्षा हो जा का मतलब होता है प्राप्ति
09:45तो जिस क्रिया को करने से अईश्वर्य लक्ष्मी धन इत्याद की प्राप्ति होती है उस क्रिया का ही नाम है
09:53पूजा अब पूजा की बहुत सारी विधिया हैं जैसे जैसे हमारा भाव बढ़ता जाता है हमारी श्रद्धा बढ़ती जाती है
10:02पूजा की सामगरी बढ़ती चल
10:06जाती है यद्यपी हमारे भोले नात उनका नाम ही भोले नात है अउगरदानी है उनको कुछ भी अरपितन किया जाए
10:15यदि सनान करते हुए केवल हर हर महादेव कह दिया जाए हमारे भोले नात उतने में ही प्रशन हो जाते
10:23हैं और उसको जो चाहिए भोले नात वो प्रदान क
10:26कर देते हैं तो पूजा की कोई भी लिमिटेशन नहीं है पूजा की कोई भी एक अवधी नहीं है जितनी
10:34देर कर सकते हैं जैसे मर्जी कर सकते हैं भगवान कहते हैं भाव का भुखाहूं में भाव ही वससार है
10:42भाव से मुझ को भजे तो भव से बेड़ा पा रहे
10:47तमाम बातें जो शिव से सीखी जा सकते हैं, खास तोर पर जब हम सावन की बात करते हैं, प्रकृति
10:54को सीधे तोर पर इससे जोड़ा गया है, प्रकृति सेवा भी अपने आप में शिव की प्राप्ति का एक रास्ता
10:59हो सकता है, क्या इसका वर्डनन है शास्त्रों में?
11:02ये को प्रकृति के रूप में भी शिव ही है, बिभूम व्यापकम ब्रमवेदेस रूपम, जैसे हमने का कि वो इस
11:09सश्टी का मूल है, मूल में अगर कहते हैं कि ये बीज यहां आम का बोया गया है, तो तना
11:16भी आम हिका ही कहलाएगा, पत्तियां भी आम की कहलाएंगी, फूल
11:20जो लगेंगे वो भी आम के कहलाएंगे, और फल जब मार्केट में लखनव से चलके उज्जेन में आएगा, तो वो
11:26जो फलों का राजा है, अगर पूछा जाएगा फलों का राजा क्या है, तो आम ही नाम लिया जाएगा, तो
11:33उस जो बीज में है, उस से उसका संबंद चा�
11:49अगर ये समझ के की जाए, कि इसमें भी शिव व्याप्त है, विभूम व्यापकम, ब्रह्म वेदा स्वरूपम, तो प्रकृति सेवा
11:57भी शिव की सेवा हो जाती है, चिर्मेन जी कुछ जोड़ना चाहा है साथ में, मैं बहुत अच्छा प्रशन आपने
12:03किया, और हमारे आध
12:18कि पूजा, पश्वों की पूजा, पक्षियों की पूजा, परवतों की पूजा, पूरी प्रकृति की पूजा क्यों होती है, मैं लंडन
12:27में कथा कर रहा था, तो वहां पर एक धर्म समेलन था, तो उसमें बहुत सारे धर्म के धर्मानुयाई और
12:33धर्म गुरु आये थे, त
13:13विष्व जानता है, आप लोग भी जो यहां पर बैठे हुए है,
13:17मैं आप लोगों से भी पूछना चाहूंगा
13:19परमात्मा एक है कि दो है
13:23परमात्मा एक ही है ना
13:24सारे जगत को ये पता है परमात्मा एक ही है
13:28इस स्रिष्टी के पहले भी
13:30एक ही ब्रह्म था
13:31एको ब्रह्म दितियो नास्ति
13:33और स्रिष्टी के साथ भी
13:35एक ही ब्रह्म है और स्रिष्टी के बाद
13:38भी एक ही ब्रह्म रहेगा
13:39तो जब एक ही ब्रह्म था और कुछ
13:41भी न था तो संसार बना कैसे
13:44जगत बना कैसे
13:45तो हमारा वेद कहता है
13:47जगत को बनाने
13:50वाला भी वही है और
13:51जगत में सब कुछ बनने वाला भी
13:53वही है वही परवत वही नदियां वही ब्रक्ष वही पशू वही धर्ती वही आकाश वही हवाएं सब कुछ वही बना
14:03इसलिए हमारा सनात अंधर में मानता है कि सरवं खलुईदं ब्रम्हा इसलिए परमातमा को पूरी प्रकृती में दर्शन करते हुए
14:13पहचानते करते हुए
14:42परमात्मा की पूजा करता है
14:44रास्ता दिखांगे कैसे सनातन के साथ उसको जोड़ेंगे
14:48देखिए
14:50भगवान श्री कृष्ण भगवत गीता में कहते हैं
14:55कि ये सारा जगत
14:58जो भी आपको दिखाई दे रहा है
15:00वो सारा का सारा जगत
15:02सनातन ही है
15:05जीव भूतह सनातन
15:06बगवान कृष्ण कहते हैं जीव मात्र सभी सनातन है सनातन कारत है जो बगवान के द्वारा उत्पन्न है
15:14हम सभी परमातमा के अंश हैं सोने का टुकड़ा लोहा नहीं हो सकता है
15:19सोने का टुकडा सदेव सोना ही होगा
15:22तो हम जितने भी यहां इस संसार में हमको दिखाई दे रहे हैं
15:26अथवा तो हमारी आँखों से ओजल भी हैं
15:29वो सभी शिव के ही स्वरूप हैं
15:32इसलिए हमारा धर्मी कहता है कंकर कंकर संकर का रूप है
15:35तो मैं आज की युवा जिनरेशन को कहना चाहूंगा
15:39कि जहां सत्य दिखाई देता है वहीं शिव हैं
15:42जहां संदर्य दिखाई देता है वहीं शिव हैं
15:46और जहां आनंद की प्राप्ती होती है वहीं शिव हैं
15:50तो हम दुख भोगने के लिए नहीं आये हैं
15:57हम असत्य भाशन करने के लिए नहीं आए हैं, हम सत्य बोलने के लिए आए हैं, इसलिए आज की युवापिढ़ी
16:05भगवान शंकर से सत्य का ज्यान ले सकती है, आनंद का अनुभो कर सकती है, और सुख की प्राप्ति कर
16:14सकती है, वही आज की युवापिढ़ी को करना चाहिए,
16:17हम दुख भोगने के लिए नहीं आये हैं धर्ती पर
16:20वयम अम्रितस से पुत्रा है
16:22हम अम्रित की संताने हैं
16:24हम उदास होने के लिए नहीं
16:25रोने के लिए नहीं आये हैं
16:27एक बार
16:29आज का विज्ञान ये कहता है न कि
16:31वही प्रेक्टिकल की जो बाते होंगी
16:33हम उसी को मानेंगे तो मैं आज की युवा जिनरेशन को कहना चाहूंगा
16:37कि आप भी हमारी बात ऐसे ही मत मान लो शास्त्र की बात ऐसे ही मत मान लो
16:42आप भी पहले प्रेक्टिकल कर लो आप जीम जाते हो तो जीम ट्रेनर आप से कहता है
16:48कि कम से कम तीन महीने गुरो रेगुलर आपको करना पड़ेगा तब इफेक्ट दिखाई देगा
16:53तो मैं भी आज कल के युवा पिढ़ी और बच्चों को कहना चाहूंगा
16:57कि आप तीन महीने भगवान शंकर पर केवल जल ही चड़ा करके एक देख लेओ
17:02फिर आपको यदि आपको इफेक्ट ने दिखाई दे तो आप मत मानना छोड़ देना
17:06नहीं लेकिन उसमें भी भाव बहुत ज़रूरी है
17:08अब आपने कह दिया वो सीधा जाके जल चड़ा देंगे और तीन मैने बाद आपके पास आजाएंगे
17:12बिल्कुल मैं कहूंगा हमारा धर्म ये भी कहता है
17:14भाय कुभाय अनक आलस हूं
17:18कैसे भी इस कलिकाल में परमातमा की यही तो कृपा है
17:21परमातमा ने कल जुग में अपने आपको बहुत सस्ता कर दिया है
17:26मुझे लगता है 80% डिसकाउंट किया प्रभू ने
17:30जैसे हर युगों में भगवान बड़े महंगे थे
17:32बड़ी कठिंता से प्राप्त होते थे
17:34कलिकाल में केवल और केवल
17:36आप उनके नाम का समरन कर लीजिए
17:40सामबशदासिव
17:41आप केवल इसी का जाप कर लीजिए
17:44नमः शिवाय किसी इसी का जाप कर लीजिए
17:47अथवातो केवल हर हर महादेओ कह दीजिए
17:50तो मैं भरोसे के साथ कहता हूं
17:52तीन महीने आप करके देख लीजिए
17:53आपके भीतर खुदी परिवर्तन दिखाई देगा
17:56और आप अपने आपको
17:58बदलता हुआ महसूस करेंगे
17:59यह मैं भरोसे के साथ कह रहा हूँ
18:01मैं यहीं से मैशगरी जी आपसे आप कितना एगरी करते हैं पहली बात तो यही और दूसरी बात इनुने कहा
18:05कि इश्वर सत्य सत्य शिव
18:07जब सत्य को खोजने और सत्य को प्राप्त करने की बात आती तो उसी में तो confusion है
18:12सारी generation वही तो confused हो रहे है कि सत्य है क्या
18:16असल में यह है कि generation वहां तक नहीं पहुंच रही जहां से पता चलता है
18:22यह सिर्फ अपने इसाफ से जो इनके पास mobile है laptop है उसमें ही देख लेते हैं
18:28अब उसमें यह देखते हैं तो वही देखते हैं जो इनको पता है
18:31उस से आगे का देखनी पाते हो ना
18:34वहां तक जाते हैं
18:35तद्विद्धि प्रणी पाते हैं ने परी प्रश्ने
18:37से भया ओप देख्षन थी ते
18:39ग्यानम ग्यानी नस तर्ट दर्शिनाए
18:41हमें वहां जाना पड़ेगा
18:43वो यात्रा करना पड़ेगी
18:44जब हम वहाँ तक जाएंगे तो समझ में निश्यत रूप से आएगा
18:48क्योंकि अभी तक जितनों ने जाना है
18:50सुरू से ले करके
18:52गहरे भक्तों की बात छोड़ो जिनके नाम दुनिया जानती है
18:55दुरूप प्रहलाद सत्युग में ले लीजिए
18:57आप भिवीशन सुग्रीव हनुमान त्रेता में ले लीजिए
19:00दुआपर में आजाई उद्दब विदुर जी त्यादी को ले लीजिए
19:05और कल्यूग में आजाईए तो रहदास से ले करके
19:08तुलसीदास सब जितने भी हैं
19:10जिसने भी जाना है
19:11किसी सदुगुरु की सरण में जाकर के जाना है
19:14जो भी सच में उस्तत्य को जानना चाहता है
19:17वो इसी मार्ग से जान सकता और कोई मार्ग नहीं है
19:20हम अपने
19:20ये इतने लोग बैठे हैं
19:22ये अलग-अलग डेस पेंड के बैठे
19:24स्वामी मुस्कुरा की टीम भी सामने बैठी हुए
19:27आप बताइए यहां कि सुन्दर्ता बढ़ रही है कि गट रही है
19:31बढ़ रही है न सुन्दर्ता
19:32जितनी बिविद्धता है उतनी सुन्दर्ता
19:34एक इस्तरी होती है
19:36सोला सरंगार करती है
19:40सोला सरंगार इसलिए करती है क्योंकि उसकी सुन्दर्ता उसकी ब्यूटी उससे और ज़्यादा बढ़ती चली जाती है
19:46ऐसे बच्चों की दिमाग में एक सबसी बड़ा जो कुशन है और जिससे ज़्यादा ब्रमित हो जाते हैं
19:52कि इतनी बिविदता है यार समझ में नहीं आता क्या करें क्या न करें
19:55ये असल में सनातन की ब्यापता है और गहरा चिंतन है जिनोंने एक ही तत्त का इतने बिविद रूप से
20:04वर्णन किया है
20:05चाहे हमारा कोई संप्रदाए हो, चाहे पंत हो, चाहे कोई मार्ग हो, जो भी हैं, सब एक ही परमात्मा का
20:13तरे तरे से वरिणन कर रहे हैं, हमने उसको शिव रूप में गा दिया है, अब महराज जी अगर राम
20:18को गाना चाहेंगे, तो क्या कोई तत तो बदल जाएगा क्या?
20:40उसको हमें दानना पड़ेगा वहां जाकर के, जिस दिन ये समझ में आ जाएगा, कि जैसे एक ही इस तरी
20:47सोला सरंगार करती है, काजल की जगे काजल संदर लगता है, लाली की जगे लाली संदर लगती है, बिंदिया की
20:55जगे बिंदिया संदर लगती है, मांग की जगे मां�
21:01और चपल भी त्याज नहीं होती है
21:04ऐसा ही सनातन में जो कुछ भी हम देख रहे हैं
21:07सुन रहे हैं जान रहे हैं
21:09यह सब एकसेप्टेड है
21:10पर उसके लिए वहां तक जाना पड़ेगा
21:13जहां तक यह महराजी पहुँचे हुए है
21:15तब समझ में आएगा महराजी
21:17तो यह इस confusion को दूर करने के लिए
21:20एक last, एक आखरी सवाल आपसे
21:22क्योंकि समय है हमारे पास अतने
21:23इस confusion को दूर करने के लिए
21:25एक शब्द कैसे उस shift तक पहुँचे
21:28सीधी सी बात
21:29जो कहते हैं
21:31हम कैसे भरोसा करें
21:33परमात्मा है की नहीं है
21:36मैं उनसे ही एक प्रशन
21:37पूछना चाहूंगा
21:38आपको डॉक्टर की डिगरी लेने के लिए
21:41कितने साल पढ़ाई करनी पढ़ती है
21:43किस-किस युनियोरसिटी में
21:45आपको जाना पढ़ता है
21:46कौन-कौन से मेडिकल कॉलेज में आपको
21:48दाखिला लेना पढ़ता है
21:50आप मेहनत करते हो
21:52पढ़ाई करते हो
21:53दिन रात आप
21:54कड़ी मेहनत करते हो
21:56तब जाकर आपको
21:57एक सांसारिक एक शारीरिक
22:00जो ग्यान है वो आपको प्राप्त होता है
22:02तो लोकिक ग्यान के लिए
22:04आप पांस साल देते हो
22:06तीन साल देते हो, तो क्या अध्यात्म का ज्यान, जो पारलो की ज्यान है, वो क्या इतना सरल है कि
22:12आपको एक मिनट में प्राप्त हो जाएगा, बिना महत पादर जो भी शेकम, हमारे महेश गुरू जी ने बहुत अच्छी
22:19बात कही, कि बगेर सद्गुरू के चरणों के धूल
22:23का आश्रे कि ये बगेर, उस ज्यान की प्राप्ति नहीं हो सकती है, तो जिनको भी सत्य को जानना है,
22:29इश्वर को जानना है, पहले आप इस मार्ग पर चल कर तो देखो, पहले आप प्रेक्टिकल करो तो सही, आओ
22:37तो सही, फिर आपको ज्यान होगा, और निश्चित है, भ�
22:45अगवान राम के विशे में जानना चाहते हैं, अचा एक कन्फ्यूजन में और दूर करना चाहूंगा, अभी जैसे श्रावन का
22:52महिना है, सब बंबं भोले बंबं भोले कर रहे हैं, अभी थोड़े दिन के बाद गणपती दिया जाएंगे, फिर उनके
22:59थोड़े दिन के बा
23:13हैं कि गणेशी बड़े हैं, बड़े कौन हैं, जादा कौन देता है, एक ही इसका मैं उत्तर देना चाहूंगा, हम
23:21सब लोग आरती गाते हैं ना,
23:24ब्रह्मा बिष्नु सदाशिव जानत विवेका, प्रणवाक्षर के मधे ये तीनों एका, ओम हर हर हर महादेव
23:44चाहे ब्रह्मा जी हों, नारायन हों, शिव हों, यदि हम प्रणव के रूप में उनको देखें, तो कोई अलग नहीं
23:51है, हिश्वर एक ही है, अलग-अलग रूपों में उतार लिकर आते हैं, अलग-अलग नाम हो जाएक हैं, बहुत
23:57-बहुत शुक्रिया, आज तक धर्म संस
23:59मैं आप दोनों का यहाँ पर आने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद, धन्यवाद आस्थक का, धन्यवाद आस्थक के मेनेजमेंट का,
24:07धन्यवाद आस्थक की ठीम का, धन्यवाद जोतीजे आपका.
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