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Transcript
00:08गाडियां चला रहे हैं खिड़की खोल करके सड़कों पर चिपस और पानी की बोतल और सब तरीके का प्लास्टिक फेक
00:14रहे हैं
00:14चाहे ओड़की झालग सब्साफ सड़क क्यों ना हो उसको गंदा करना है तो अपने घर को ऐसे थोड़ी गंदा करते
00:22हैं
00:22सारजनिक जगह है तो कर देंगे क्योंकि वो हमारी जिम्मेदारी में नहीं आती
00:26मेरी जिम्मेदारी तो वोस अपने लिए है
00:27अपने घर को कौन गंदा रखता है अपने कमरे को अपने कपड़ों को कौन गंदा रखता है
00:31मैंने रेलवेज में देखा
00:33एसी में वो बिछाने के लिए चादर दे देते हैं उड़ने के लिए भी
00:37लंबी दूरी की आतरा एक देवी जी के कई छोटे छोटे बालक उनको लेकर को चड़ी हुई हैं
00:42उनमें से दो-चार इतनी छोटे उन्होंने वही पर टटी पशाप कर दी
00:45अभी कई घंटे बाकी थे मनजिल आने में देवी जी ने वही जो वो रेलवे ने दिया हुआ था सफेद
00:51रंका होता है वो
00:51उसको लेकर के फर्श साफ कर दिया और जो बाकी के मुसाफिर थे वो भी आपक्ति कर रहे थे
00:56ना ना सफाई करने पर नहीं जब बदबू आ रही थी तो आपक्ति कर रहे थे बाकी आत्री उन्हें भी
01:01बड़ी रहात में ली कि चलो सफाई हो गई
01:03परेलवे की चादर है भाई कर दो साफ मेरे घर की थोड़ी है और फिर हम कहते हैं कि हम
01:07देश भक्त हैं और ऐसे ही लोग होते हैं जो ज्यादा देश भक्ति के नारे लगाते हैं
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