00:00गुरुद्वारों में कम सकम एक रूमाल तो रख लेते हैं ना सरपे, आप बिल्कुल कहा सकते हैं रूमाल से क्या
00:04होगा, पगड़ी तो छोड़ो हमने टोपी तक नहीं पहनी है, सिर्फ रूमाल डाल लेंगे तो क्या होगा, होगा, होगा, गरंथ
00:11माँग नहीं कर रहा है कि �
00:13आप सर को ढखें,
00:15वो आवश्यक्ता आपके अपने अहंकार की है,
00:18समझी ये बात को,
00:19जब आप सर को ढखते हो,
00:20तो आप सर को उसका स्थान याद दिला रहे हो,
00:24भाई तू ढखा हुआ ही रहे,
00:26ढखा हुआ होने का मतलब होता है,
00:28सर सर से उपर कुछ और है जो उसको ढख रहा है,
00:30ढखने के लिए उपर कुछ रखते हो नहीं यहाँ पर,
00:33ज़रा नमित हो कर रहना,
00:35ज़रा जोक कर रहना,
00:36फिर कह रहा हूँ,
00:37इससे वाहे गुरू को कोई अंतर नहीं पढ़ता,
00:40और देवाला यह नाराज नहीं हो जाएगा,
00:43किसी का कोई नुकसान नहीं हो जाएगा,
00:44आपका नुकसान हो जाएगा,
00:46आप चले जाओ ऐसे ही कि मैं तो साब,
00:48कुझे कोई फर्क नहीं पढ़ता,
00:49मैं आ रहा हूँ,
00:50तुम चले जाओ, हो सकता है कोई टोके भी नहीं
00:52पर किसी नहीं भी टोका
00:54तो भी तुम्हारा नुकसान हो जाएगा
00:56इसलिए नहीं कि वहाँ अद्रश्य शक्तियां है
00:59और वो तुमको शराब दे देंगी
01:02खारण मनोवैज्यानिक है
01:03कोई उसमें मिस्टिकल कारण नहीं है भाई
01:07मनोवैज्यानिक कारण है
01:08तुम्हारी अपनी लिस्टिनिंग ही बाधेत हो जाएगी
01:12तुम जितनी सफाई से सुन सकते थे
01:15उतनी सफाई से नहीं सुन पाओगे
01:17तुम्हारा ही नुकसान है
01:19कहते हैं इसमें तेरा घाटा उनका कुछ नहीं जाता
01:22तुम दिखा लो अपने जल्वे अपने तेवर दिखा लो ठीक
01:27और मैं तो चाहता हूँ कि घार में किस थलों पर टोका टोकी न करी जाए
01:32जिसको जो करना करो
01:34वही किसी को लाब चाहिए ही नहीं तो लाब
01:37मतलू नुकसान तुम्हारे ही है
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