00:00अपमान क्यों नहीं अनुभव होता जब हाथ फैला करके कहना पड़ता है कि शॉपिंग जा रही हूं पैसे दे दो
00:06क्यों नहीं अपमान अनुभव होता इसे अपना अधिकार मान ही कैसे लिया
00:10कि उसके पैसे पर मेरा भी तो हक है कैसे हक है उसने कमाया है उसका है
00:14और उसने कैसे मान लिया कि उसकी देहें पर मेरा हक है उसकी देहें उसकी देहें उसका अधिकारक्षेत्र है तुम्हारा
00:20हक कैसे हो गया उस पर
00:21ना पती के पैसो पर पत्नी का हक है ना पत्नी की देहें पर पत्नी का हक है अब सब
00:28लोकधर्मी एकदम चिला उठेंगे
00:30कहेंगा अच्छा किसी है कोई हकी नहीं है तो फिर शादी माने क्या
00:34तो यह प्यार नहीं पता जुन्नू
00:36तुम्हारे लिए एक दूसरे पर हक जमाना ही प्यार है
00:41प्यार एक दूसरे पर हक जमाने का नाम नहीं है
00:43प्यार एक दूसरे को पंख देने का नाम होता है
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