00:00कुछ चीजें घर बैठे नहीं मिल जाती जाओ यात्रा करो यात्रा क्यों करो ताकि आप खुद से दूर जा सको
00:08काम धंधे छोड़ो दिखाओ कि तुम हफता दस दिन पंदरा दिन जितने दिन की भी यात्रा थी पूरी इतने दिन
00:16के लिए तुम अपनी सामाने जिंदगी को �
00:20पीछे छोड़ सकते हो हमने समझा नहीं हमें लगा कि वहाँ एकदम पहाड के ऊपर खास उर्जा वगेरा है कोई
00:28खास उर्जा नहीं है बगा जो तिलमाही तेल है जो चकमग में आग तेरा साहीं तुझ में बस जाग जाग
00:40सके तो जाग तो ऐसा नहीं है कि साहीं वहाँ प
00:50तो फिर हाँ घर में बैठे रहेंगे हर जगह है पर तुम कमोड पर बैठ कर गरंथ पढ़ोगे तो तुम्हें
00:56नहीं मिलेगा आपके नहीं साहब हम तो कमोड पर बैठ के भी पूरे ध्यानते सुनते हैं देखो अहंकार तो महौल
01:03का ही गुलाम होता है महौल बनाओगे तो काम
01:06हो पाएगा महाल नहीं बनाओगे तो काम नहीं हो पाएगा जो महाल नहीं बना रहा उस
01:11तक कोई बात नहीं पहुचेगी आपके घर कोई साधारण महमान भी आता है तो पहले
01:15महौल बनाते हो कि नहीं बनाते हो
01:17भोलो तो
01:19तो आपके हर कृष्णा रहे तो यूँ ही मिल लोगे
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