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Transcript
00:00गर परिवार में कोई ऐसा हो जो बिल्कुल नालायक किसमगा हो फिर भी आप उसके पैर झाके छू जाते हो
00:06आपको पता है कि वो लायक नहीं है कि आप इसद करो या पूची से करो
00:11तेकिन फिर भी आप
00:12सोशल नॉम्स के चलते या
00:14ऐसी चीजों के चलते पैर्श हो जाते हो
00:16सोशल नॉम्स के चलते माने क्या
00:18सोशल नॉम्स के डर में
00:19ये बोलो ना खुल के
00:21सोशल नॉम्स के चलते ऐसे जैसे वहाँ कोई चल रहा हो
00:23वहां उपर कोई चल रहा हूँ social norm है सीधे बोलो ना कि social norm के आगे
00:32दर्म है उसके डर्म है उसके डर्म है तो मेरा सवाल यह था इसमें कि उसके कुछ फायदे भी मिल
00:38जाते हैं
00:49जब उसको follow करते हैं तो उसके फायदे भी मिल जाते हैं एक जटके में इमानदारी खुल गई सारी
00:58जब कि हम अंदर से जानते हैं कि कोई दम है नीशीज में जिसके पाउं छू रहे हो उसी पर
01:05आश्रित हो कि उसी इसे पैसे ले के संसा को डोनेशन दो के तो रोज छुआ करो
01:11कर लो
01:13जब तक तुम्हें दिखाई दे रहा है कि सत्मुच मजबूर यह छू लो पर जितनी बार छूओ उतनी बार खुद
01:21से घिनाया भी करो
01:22बारी बदलाओ तकाल नहीं आ जाते ठीक है पर कम से कम हर ऐसा अवसर जरूरी है कि तुम्हें तुम्हारे
01:30प्रती घ्रणा से भर दे
01:32और यह बहुत जरूरी होता है अपनी वर्तमान इस्थिति से नफरत करना बहुत जरूरी होता है
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