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  • 3 months ago
Mandira Dayan Scary Pumpkin Horror stories

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Transcript
00:00इस कहानी की लेखी का है स्नेहा बस तोड कर वानी
00:04करीब चार साल पहले की बात है
00:06मैं मेरे पती अनिल और हमारा चार साल का बेटा शांतनू
00:12एक गाउं में शादी के लिए गए थे
00:14अनिल के दोस्त के शादी हो रही थी
00:17जन्वरी का महीना होने के कारण मौसम बहुत ठंडा था
00:21इसमें रात का समय
00:24लेकिन शादी में मौजूद लोगों को ठंड की ज़्यादा परवा नहीं थी
00:28हॉल के बाहर एक बड़ा डीजे था और सभी नाच रहे थे
00:32हाला के ठंड के कारण हमारी हालत और भी खराब थी
00:36क्योंकि हमें इसकी आदत नहीं थी
00:38वह हॉल गाउं से बहुत दूर था
00:41खुली जगा और आसपास बस्तियां भी कम थी
00:45रात के अंधेरे में वह जगा बहुत ही डरावनी लग रही थी
00:49हम हाल के अंदर मेहमानों के लिए रखे
00:52एक मोटी रजाई और कंबल में बैठे थे
00:54वहां हमारी तरह अनिल के कुछ और दोस्त भी थे
00:58एक दोस्त विनोत और उनकी पत्नी हमारे साथ थे
01:02कहने की जरूरत नहीं है
01:04लेकिन पुराने दोस्तों के बगबग से
01:07माहौल और भी रंकीन हो जाता है
01:09हम सब बातों में उल्चे हुए थे
01:11और हमारा लड़का शांतनू
01:13हमसे कुछी दूरी पर खेल रहा था
01:15विनोत उसी गाउं की एक पुरानी भयानक घटना सुनाने लगा
01:19ये किस्सा लगभग साठ साल पुराना होगा
01:23मेरी माह का माई के इस जगह से थोड़ी दोर पर था
01:27कहा जाता है कि एक डायन बच्चों पर जादू करके
01:30उनकी आत्मा को वश्मे कर लेती थी
01:34वहाँ सभी उसे मंदीरा डायन कहते थे
01:37लेकिन वास्तव में किसे ने उसे कभी देखा नहीं था
01:40यह ऐसा था जैसे वो सिर्फ बच्चों को ही दिखती थी
01:44और कुछ ऐसा कर रही थी जिससे भी बिमार हो जाएंगे
01:48और अंतता मर जाएंगे
01:51एक बार मेरी माँ और उसका छोटा भाई
01:53घर के बाहरांगन में खेल रहे थे
01:56तब वो बहुत छोटी थे
01:59लग बग तीन-चार साल के
02:02तभी एक गरीब बुढ़िया उनके दर्वाजे पर भीक मांगने आई
02:05तो मेरी दादी उसे कुछ देने के लिए अंदर चली गई
02:09इसे बीच बुढ़िया ने मेरे मामा को पास बुलाया
02:13और उसके कान में कुछ कहा
02:16तभी मेरी दादी बासी रूटी ले आई
02:18और वो बुढ़िया बासी रूटी लेकर चली गई
02:21शाम होने से ठीक पहले मामा जी सोने चले गए
02:26तेज बुखार के साथ उन्हें छीक आने लगी
02:30कई दिन बीच गए
02:31पर मामा का बुखार कम होने का कोई नाम नहीं था
02:45कोई सुधार नहीं हुआ
02:47घर में बिमार बच्चे को देख दादी पूरी तरह तोट गई थी
02:52उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था कि अब क्या करें
02:55मामा पर किसी भी दवा का असर ही नहीं हो रहा था
02:58और दादी के आसो दिन बदिन बहते रहे
03:02अब इन सब के बाद उन्होंने एक तांत्रिक का सहरा लिया
03:07जब वो गहर आया तो उसने मामा के माथे पर हाद रखा
03:11और कहने लगा
03:13उसने इस बच्चे की आत्मा को जीत लिया है
03:17इसकी मृत्य वटल है
03:19दादी के बाद सुनकर मेरी दादी मौके पर ही गिर पड़ी
03:22तवी दादा ने उनसे कहा
03:24कुछ उपाए करो बाबा
03:26हम अपने कलेजे के टुकडे को उस डाइन को नहीं दे सकते
03:31हबारे बच्चे को उस डाइन के चंगुल से बचाओ बाबा
03:36दांत्रिक ने कहा
03:37ये कोई आम डायन नहीं, बलकि मंदीरा डायन है
03:42बाबा कुछ तो उपाय कीजिए, जो भी खर्चा लगे हम करने के लिए तयार है
03:48चाहिए तो मेरी जान ले लीजिए बाबा, पर मेरे बच्चे को उस डायन से बचाईए
03:54मैं उसकी मौत नहीं रोक सकता
03:59लेकिन हम उसे वापस लाने का एक आखरी प्रयास कर सकते हैं
04:03ऐसा कहते हैं, कि मौत की रात वो छोटे बच्चों का शव कबर से बाहर निकालती है
04:09और उसमें प्रान डाल कर उसे जिन्दा करती है
04:13और फिर उसके प्रान वो अपने साथ ले जाती है
04:17तांत्रिक ने ये जैसे बताया
04:19वैसे ही मेरी मामा की कुछी घंटों में मृत्ति हो गई
04:22उनके पार्थिव शरीर को इस्थानी रिवाज के अनुसार कबरिस्तान में दफनाया गया
04:27मेरे दादा, तांत्रिक और कुछ गाउं के लोग वहां कबरिस्तान में बैठे थे
04:47के पास रुक गई, हाथ के नुकेले पंजी मिट्टी खोदने लगे, हवा तुफान की तरह चली, देखते ही देखते उसने
04:56हाथ से कुछ फिट गड़ा खोदा
04:57और लाश को बाहर निकाला, और एक हाथ से एक आच की बोतल निकाली, और ढकन खोल दिया
05:05उसके शरीर से सफिद धुआ निकल रहा था, अगले ही पल उसने अपनी आँखे खुली, और अपने दोनों पैरों पर
05:13खड़ा हो गया
05:14यह देख सभी गाउं वाले उसकी और दोड़ पड़े, लेकिन उन्हें आते देख वो पल भर में गाये हो गई,
05:21भले ही भीड में वो डायन उनके हाथों से निकल गई हो
05:25लेकिन उनके लिए ये बात बहुत ही मैतोपून थी, कि मेरे मामा उन्हें सुरक्षित मिल गए, कहा जाता है कि
05:32उसके बाद फिर कभी डायन नहीं देखी गई
05:34ये पूरी कहानी सुनकर हमारे रोंग्टे खड़े हो गए, शादी में शामिल होने वालों की संख्या कम हो गई, मैं
05:42भी एक मा होने के कारण एक मा का दुख समझ सकती थी, मैं भावुक हो गई, अन्जाने में मेरे
05:48लड़के शांदन उपर मेरा ध्यान गया, वह वहीं खेल �
05:53लेकिन अचानक उसने खेलना बंद कर दिया, और सामने दिवार की तरफ देखने लगा, हम सब उसे देख रहे थे,
06:00वो अभी भी उस दिवार को देख रहा था, जैसे ही मैं उसे लेने ही वाली थी, वो मेरे पास
06:06दोड़ा और दिवार की और इशारा किया और कहा,
06:20हमें कुछ समझ नहीं आया, हमने उधर देखा तो वहाँ कोई नहीं था, एक महिला जो वहाँ से कुछ दूरी
06:26पर शादी के लिए आई थी, वह बहुत मेकप के साथ बैठी थी, हमने उससे पुछा, क्या तुम उस आँटी
06:33को देख कर डर रहे हो, लेकिन वह मना कर रहा था,
06:35हम उसे समझाने की इतनी कोशिश कर रहे थे कि वहाँ कोई नहीं था, लेकिन फिर अनिल के दोस्त ने
06:42मुझसे कहा, बाबी, तुम उस दिवार की और देखो, और गुस्से से उसे जाने के लिए कह दो, मैंने बिना
06:48कुछ सोचे समझे बिल्कुल वैसे ही किया, जैसा विनोध
06:51ने कहा, उस समय मेरा बेटा शांतनू जो मुझे कसकर गले लगा रहा था, पीछे मुड़कर देखो और कहा, ममा,
06:59वो चली गई, और वा पहले की तरह फिर से खेलने लगा, मैंने शांतनू को पहले कभी भी इतना डरा
07:06हुआ नहीं देखा था, उस घटी घटना को देख हम स�
07:21डायन चुडैल इन सब बातों पर विश्वास नहीं करती थी, पर उस रात की घटी घटना को याद करती हूँ,
07:27तो आज भी मेरे रॉंक्टे खड़े हो जाते हैं।
07:51दोस्त हसी मजा कर रहे थे, बीच में बहुत सारी खानी की चीज़े और शराब भी रखी हुई थी, सभी
07:59दोस्त मिलकर बड़ी चाओ से उन चीज़ों पर हाथ साफ कर रहे थे।
08:21कि सुनसान सड़क पर एक आटो चलता हुआ दिखाई दे रहा था। आटो ड्राइवर हलकी सीटी बजाते अपने मोड में
08:27था, कि तभी सड़क की एक तरफ कोई खड़ा नजर आया।
08:31आटो नस्दीक ले जाते हुए आटो ड्राइवर ने पुछा, कहा जाना है? अगली नुकर पर। और वो महिला आटो में
08:39सवार हो गई।
08:40और कुछी दिर में उनकी आटो दुबारा उस सुनसान सड़क पर चलने लगी। आटो में बैठे उस औरत का पल्लो
08:47देरे देरे रिक्षे से बाहर जाते हुआ में लहराने लगा।
08:57मैडम जी, आप कहीं जॉब करती हैं क्या? नहीं तो, क्यों? मतलब आप इतनी रात कोई सड़क पर खड़ी थी,
09:05है इसलिए पूछा।
09:07वैसे आपको जाना कहा है? आगे नुकर पर, जो पीला बंगला है न, मैं वहीं रहती हूँ
09:18क्यों मजाग कर रही हो मैडम जी? बताइए न, आपको कहा जाना है? मैं मजाग नहीं कर रही हूँ, मैं
09:24उसी बंगले में रहती हूँ, अकेली
09:31पर उस बंगले के बारे में मैंने तो कुछ अजीब सी बाते ही सुन रखी है
09:34अजीब सी बाते? जैसे की?
09:37मतलब उस बंगले में कोई बुरी आत्मा रहती है, जो लोगों को जान से मारती है
09:42अलो, मेरा बंगला भी आ गया
09:44ओटो उस बंगले के गेट के बाहर आकर रुख जाती है
09:48आटो वाला देरे से अपना सर आटो से बाहर निकाल कर बंगले की और देखता है
09:54बंगला काफी अजीब डरावना लग रहा था
09:57जैसे कोई विरान खंडार हो
10:00आटो से नीचे उतर कर वो महिला अपनी पर्स टोलने लगी
10:03बहिया दो मिनिट रुको मैं पैसे लेकर आती हूँ
10:07इतना क्या है कर वो औरत गेट खोल कर बंगले के बीतर चली गई
10:11आटो ड्राइवर के पास रुकने के अलावा कोई चारा ना था
10:15वो डरा सहमासा उस बंगले को नियार रहा था
10:19मैडम के बंगले के अंदर जाते ही लाइट शुरू हो गई
10:23और कुछ सेकेंड बाद दूसरे मंजिल की लाइट भी शुरू हो गई
10:27उस ओरत ने खिड़की का परदा सरकाया
10:30और आटो वाले से कहा
10:33बहिया पांसो का छुट्टा है ना
10:35उसकी आवाज सुनकर आटो ड्राइवर ने कहा
10:38जी हाँ मैडम जी छुट्टा है मेरे पास
10:41इतना कहेकर आटो ड्राइवर अपने पॉकिट में से छुट्टे पैसे निकाल कर गिनने लगा
10:46कि तभी उस ओरत का हाथ उसके सामने आ गया
10:50जिसमें पांच सो रुपए थे
10:52हाथ पूरी तरह से सफेद बढ़ चुका था
10:55आटो वाली ने उस ओरत की तरफ देखा
10:58और उसकी जबान जैसे हलक में अटक गई
11:02क्यूंकि वो ओरत अभी भी बंगले के भीतर खिलकी में खड़ी थी
11:06उसका लंबा हाथ बंगले से निकल कर उस आटो ड्राइवर के पास पहुच चुका था
11:11उस ओरत की लालाखे उसे लगातार गोरे जा रही थी
11:15उसका डरावना रूप देखकर आटो ड्राइवर ने जट से आटो स्टाट की
11:20और बिना पीछे मुड़े तेजी से निकल गया
11:23अरे फिर उस आटो ड्राइवर का क्या हुआ
11:26क्या होना था ऐसा खौपनाग द्रिश्य देखकर अगले आट दिन तक बुखार से घर के बिस्तर पर पड़ा रहा
11:33ये घटना बचपन से सुनता आया हूँ
11:36कोई नया किस्ता सुनाओ यार
11:38यार फिर भी ये काफी डरावनी घटना थी
11:41विजु ने कहा
11:43और कोई डरावना किस्ता बताओ न
11:45इस अंधेरी रात में डरावने किस्ते सुनने में बड़ा मज़ा आता है
11:50ठीक है तो सुनो
11:52एक लड़की रोज सुभा जल्दी उठकर गाउं के एक लोती कोई में पानी भरने के लिए जाती थी
11:57सुरज निकलने के बाद बेड़ होने के कारण
12:00वो सुरज निकलने से पहले ही कोई में पानी भरने के लिए पहुँच जाती
12:04उस दिन भी वो सवेरी सवेरी कुएं पर पानी बरने के लिए पहुँची
12:08अभी भी काफी रात थी
12:10कुएं गाउं से थोड़ा दोर होने के कारण
12:13एक कच्ची सडक से जाना पड़ता था
12:16लड़की कुएं के पास पहुँची
12:18और बाल्टी कुएं में गिरा दी
12:22कोई से एक बाल्टी पानी निकाल कर वो अपने बर्तंद होने लगी
12:26रात के सन्नाटे में उसके चूडियों की खनक साप साप सुनाई दे रही थी
12:31पुनम का चांद अभी पश्चिम दिशा की और जोक रहा था
12:35आस्मान भी साप होने के कारण काफी अच्छी रौश्णी बिखरी हुई थी
12:39वो लड़की अपने काम में मश्कूल थी
12:43बर्तंद होते वक्त एक चूड़ी तूट गई और उसके हाथ में जागुसी
12:47पर उस लड़की ने हाथ से बहते हुए खून पर ध्यान नहीं दिया
12:52उसने बाल्टी दुबारा से कूई मदादी और धीरे धीरे उपर खीचने लगी
12:57तभी उस सुनसान गहरे सन्नाटे से उसे एक अजीब सी आवाज सुनाई दी
13:03काफी स्वादिश्ट है
13:09उस पल की आवाज ने उस लड़की का ध्यान अपने तरह पाकरशित कर लिया
13:14वो कुछ सेकेंड वैसे ही चुपचाप खड़ी रही
13:18आवाज की दिशा समझ में नहीं आ रही थी
13:21पर आवाज बिलकुल साफ साफ सुनाई दे रही थी
13:24और दुबारा वो ही आवाज उसके कानों में गुंज उठी
13:28काफी स्वादिश्ट है
13:33वो चारो तरफ अपनी नजरे गुमाते हुए बाल्टी को उपर की और खीचने लगी
13:39बाल्टी उपर आ गई
13:41उसने बाल्टी उठाई
13:42पर बाल्टी के अंदर का पानी काफी गंदा नजर आ रहा था
13:47उसने देरे से बाल्टी के पानी में हाथ डाला
13:58डलके मारे उस लड़की के मूँ से चीख निकल गई
14:02उसने उस बाल्टी को वैसे ही कुए में फैक दिया
14:05और भागने की कोशिश में बाल्टी की रस्ती उसके पैर में अटक गई और वो दढ़ाम से नीचे गिर गई
14:13वो लड़की काफी डर गई थी डर के मारे वो पैरों में लिप्टी हुई रस्ती खोलने की कोशिश करने लगी
14:20कि तभी उस गहरे में वैसे ही दुबारा किसी की आवाज आने लगी
14:26आवाज धेरे धेरे गूंच में लगी जैसे कोई कुएं की दिवारे चड़कर उपर आ रहा हो इस तरह की आवाजे
14:34जमीन पर गिरी लड़की कुएं की और देखकर उस रस्ती को पैर से चुड़ाने के कोशिश कर रही थी
14:40पर लग रहा था कि वो रस्ती देरे देरे पैरों को कस के जकड़ रही वो
14:45वह लड़की काफी डर गई थी
14:48उसके दिल की धरकनी उसको खुद बे सुनाई दे रही थी
14:52बदन पसीना पसीना हो गया था
14:55आखों में मौत का खौफ साफ साफ दिखाई देने लगा
15:00जैसे तैसे वो रेंगते हुए वहां से दूर जाने की कोशिस करने लगी
15:04और अगले ही पल सब कुछ शान्थ हो गया
15:08ना किसी की आवाज ना कोई आहट बिलकुल खौफनाक सन्नाटा चारो और फैला हुआ था
15:17उसने अपने खौफ वरी नजरों से कुएं की और दिखा
15:21वहां पर उस जगा कोई भी नहीं था
15:24वहां के लिए वहां पर थी
15:26वह लड़की दुबारा अपने पैरों में अटकी रसी छोड़ाने की खोशिश करने लगी
15:31और फिर एक अजीब सी आवाज उसके कानों पर पड़ी
15:35देरे से अपनी नजरे उठा कर उसने कुएं की और देखा
15:39और सन्ना रह गई
15:41कुएं के अंदर की दिवार से एक खौफनाक चेहरा उसकी आख रहा था
15:45उसकी आखे फटी की फटी रह गई
15:48वह कुछ समझ पाती
15:50इससे पहले ही किसी ने उसके पैर में बंदी हुई रसी को कुएं के अंदर खीच लिया
15:56और वो लड़की कुएं के उस गहरे पानी के अंदर समा गई
16:00यार ये तो काफी डराओने घटना थी फिर उस लड़की का क्या हुआ
16:05और क्या होता तिन दिन बाद उसकी लाश कुएं के पानी के ओपर तैरती नजर आई
16:10यार चलो एक और किस्ता सुनाओ मज़ा आ रहा है
16:14अरे पागल बहुत रात हो गई है अभी यहां से जाना होगा
16:18वरना हमारा किस्ता लोग सुनाएंगे वैसे भी ये काफी डराओनी जगा है
16:23और इस जगा के बारे में भी बहुत सारे किस्ते मशूर है
16:26हाँ पता है इस तालाब के भी तर एक आत्मा है
16:29जो लोग पानी में तेरने के लिए आते हैं उन्हें पानी के अंदर खीच लेती है
16:34अब बखवास बंद करो ये सब मनकरन कहानिया है
16:38मैं कई बार यहां तेरने के लिए आया हूँ
16:41मुझे तो कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ
16:42ऐसा कहकर वोट कर खड़ा हो गया
16:46और पानी से बारे तालाब की और देखकर चलाने लगा
16:50ए पानी वाले भूत चल निकल बाहर
16:54मैं तुझसे नहीं डरता
16:56देखा कोई भूत भूत नहीं है
16:58खाली वहम है यार
17:00इतना कहकर वो पीछे मुड़ा
17:02और वहीं बेहोश हो गया
17:05अगले दिन
17:06अस्पताल के बेट पर वो बेहोशी की हालत में पड़ा था
17:10उसके पास मा और पिता जी गुमसुम से बैठे थे
17:13कि तभी उसे होश आ गया
17:15पास खड़े डॉक्टर ने पूछा
17:17अब कैसी है तभीयत
17:18ठेखूं डॉक्टर साहब
17:20वैसे हुआ क्या था
17:26चारों की काफी गहरी दोस्ती थी
17:28महीने में एक बार वे खाना पका कर मस्ती करने उस तलाब के पास जाते थे
17:33दो महीने पहले भी वह तलाब के पास पहुंचे
17:36हमारा राकेस उस दिन थोड़ी देर से पहुंचा
17:40पर वहां पहुंचने के बाद देखा
17:42तो तलाब के पास उसके दोस्तों का सारा खाने का समान बिखरा पड़ा था
17:47उसने सब को फोन किया
17:49पर किसी का भी फोन नहीं लग रहा था
17:51वो परिशान होकर घर वापस आया
17:54और है उसके दोस्त
17:55सभी की लाशें दो दिन बाद पानी में तैरती मिली
17:58पुलिस कहती है
18:00एक दूसरे को बचाते वक्त सभी डूप गए
18:03पर कहते हैं कि तलाब के अंदर के पिसाच ने
18:06सब को निकल लिया
18:09मेरा बेटा महीने में एक बार खाना बनाकर
18:11तलाब के किनारे अपने दोस्तों को मिलने जाता है
18:15उसका मानना है कि वे सब आज भी जिंदा है
18:18पता नहीं ये सब कब खत्म होगा
18:21और नमाखों से उसने अपने बेटी की तरफ देखा

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