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  • 2 days ago
Daayan Banjaran - Horror Story बंजारन SHAITANI DASTAN Hindi Horror Stories

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00:05ये कहानिया केवल मनोरंजन के लिए बनाई गई है इनका किसी भी धर्म जाती या व्यक्ति से कोई संबंध नहीं
00:14है कृप्या इन्हें एक कालपनिक कहानी के रूप में देखे
00:18बहुत साल पहले शतरंज गर्द नाम का एक राज्य हुआ करता था जहां राजा तारामल का राज्य था जो अपने
00:29शक्ति और न्याय के लिए दूर दूर तक मशूर था
00:33राजा का एक ही बेटा था जिसका नाम राजकुमार अर्णव था राजा उससे अपनी जान से भी ज्यादा चाहता था
00:42पर कुछ महिनों से अर्णव एक अजीब सी बिमारी से गुजर रहा था
00:48उसके चहरे पर हमेशा मायूसी च्छाई रहती वो दिन रात एक आंत में बैठा रहता उसकी आँखे भी खोकली और
00:59बेजान दिखाई परती थी
01:04बेटा क्या हो गया है तुझे दिन भर एक की जगा क्यों बैठा रहता है कुछ तो बोल मेरे बच्चे
01:12दादी मा वो मुझे बुला रही है वो मुझे अपने साथ ले जाएगी
01:18कौन बुला रही है बेटा वो बंजारन मुझे अपने पास बुला रही है
01:33कौन बंजारन बेटा
01:39ए बुलिया मैं तेरे पोते को अपने साथ लेकर जाने वाली हूँ समझी तू
01:54अर्नव के कमरे से में चीखने किया वाद सुनका राजा दोड़ते हुए अर्नव के कमरे में पहुँचा
02:01क्या हुआ मा मा उठो आप फिक तो हो अर्नव बेटा अर्नव
02:08इस हादसे के बाद राजा की मा का दिहान थो गया और राजकुमार अर्नव जीते जी मरे खुए आदमी के
02:16समान दोड़ते हुए
02:34दिन बदिन राजा के मन में घपराहट बढ़ती जा रही थे राज्य के लोग भी आपस में फुसफुसाने लगे थे
02:42अरे राजकुमार अर्नव पर किसी आत्मा का कवजा है हाँ तुम सही कह रहे हो एक दिन राजा तारा मन
02:51ने एक महरीशी को बुलाया जो अपने अद्भूत ग्यान तपस्या और दिब्य द्रिष्टी के लिए प्रसिद्ध थे
02:59जैसे ही उनके कदम हवेली के अंदर पड़े माशालों की लप्टे अपने आप तेज जलने लगे
03:11आईए महराज मैं आप भी का इंतिसार कर रहा था बताईए क्या बात है राजन आपने मुझे कैसे याद किया
03:21महराज मेरा बेटा किसी अजीब रोग से पीडित है महिनोता की इलाज कराने के बाद भी मेरे बेटे की सिहत
03:28पर कोई असर नहीं पड़ा
03:32महरिशी राजकुमार अर्णव के पास जाकर उसकी नवस को छूप कर देखते हैं और नवस छूते ही उनका चहरा गंभीर
03:44नजर आने लगता है
03:48ये रोग सामान में नहीं है राजन
03:51क्या मतलब स्पष्ट कहिए महराज
03:54राजन इन पर किसी बुरी शक्ति का असर है और ये असानी से राजकुमार का पीछा नहीं छोड़ देगी
04:03घर के सभी लोग महरिशी की बात सुनकर कांप जाते हैं
04:09कुछ दिन पहले क्या आपके साथ कोई विशेश घटना घटी थी जिसमें आपके हाथों से किसी की जान चली गई
04:18सच बताईए राजन आपका सच ही आपके बेटे की जान बचा सकता है
04:25राजा कुछ देर तो चुप रहा जैसे वो कुछ याद करने की कोशिस कर रहा हो
04:31लेकिन फिर उसने लड़कडाते शब्दों से कुछ बताना चाहा
04:37महराज एक रात मैं शिकार के लिए जंगल में गया था
04:41वहाँ घंए जंगलों की बीच मेरी नजर एक काले तेंदुए पर पड़ी
04:46मैंने उस तेंदुए का पीछा किया
04:48और इससे पहले कि वो वहाँ से भाग पाता
04:51मैंने अपना निसाना ताना और तीर उस पे छोड़ दिया
04:56एक पल के लिए सब कुछ शांत हो गया
04:59मुझे लगा वो तेंदुए जखमी होकर वहीं गिर गया
05:02लेकिन जैसे ही मैं उसे पकड़ने के लिए आगे बढ़ा
05:06जारियों की बीच से किसी के कराने की आवाज सुनाई देने लगी
05:11मैंने देखा
05:13कि वहाँ एक बंजारन औरत खड़ी थी
05:16उसकी दोद में एक छोटा सा बच्चा था
05:19जिसकी जाती से लहू बह रहा था
05:22उस वरत का रूप बहांकर था
05:25आखों में अंगारे जुलस रहे थे
05:28और चेहरे पर गुस्जा दिखाई पड़ रहा था
05:41मुझे मुझे माफ कर दीजिए
05:43मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गए
05:46मैंने तुम्हारे बच्चे को जान बूच कर नहीं मारा
05:49मैं तुझे जिन्दा नहीं छोड़ूँगी
05:53मैं तुझे
05:56छोड़ दो मुझे
05:57मुझे माफ कर दो
05:59तुम सब
06:01तुम सब मेरे बच्चे की
06:03मौत के गुनेकार हो
06:11मैंने जान बुच कर कुछ नहीं किया, माफ़ कर दो
06:16हर किस नहीं, जिस तरह मैंने अपने बच्चे को तडपते हुए देखा
06:22उसी तरह तू भी अपनी अउलाद को तडपते हुए देखेगा
06:28मैं तेरे पूरे पूरे बंश को मिटा दूँगी
06:33आसे तेरा घर मातम मातम से बरा रहेगा
06:41यह ऐसा मत करो, तुम अपने बेटे की मौत का बदला मेरे प्रान लेकर ले लो
06:46लेकिन मेरे परिवार को कुछ मत करना
06:49नहीं, उलाद के बदले उलाद, खून के बदले खून, तुझे भी अपने बेटे की बेट चड़ानी होगी
07:00नहीं, नहीं
07:07उस आउरत ने एक एक करके मेरे सभी साथियों को मौत के घाट उतार दिया
07:12और मुझे तड़पने के लिए जिन्दा छोड़ दिया
07:16उस रात में जैसे तैसे घर को लोट आया
07:19लेकिन उस आउरत का चेहरा, उसकी लाल आँखें, उसकी आवाज मेरे जहन में घूम रही थी
07:30मैं ये सारी बात सोची रहा था, कि तभी मेरे कानों में मेरी पत्नी की चीख गुण जूठी
07:37मैं बाता हुआ अपने कमरे के अंदर गया, तो दिखा, मेरे पत्नी जमीन पर बेहोश पड़ी थी
07:44उसकी आँखें पूरी सफेद हो चुकी थी, और सांसे एकदम थम चुकी थी
07:52राजवती
08:03क्या हुआ राजवा, अपनी पत्नी को मरा हुआ देखकर तकली पूरी, अभी तो शुरुआत हुई, थोड़े आसो अपने बेटे के
08:16लिए भी बचा कर रख
08:18नहीं, उसे बख्ष दो, मैं तुम्हारे आगे हाथ जोडता हूँ
08:28आने वाली अमवस्या की रात को मैं उसे अपने साथ ले जाओंगी
08:34नहीं, तुम्हेंसा नहीं कर सकती, मैं तुम्हारे आगे हाथ जोडता हूँ
08:39भगवान के लिए मुझे और मेरे परिवार को और मत सताओ, यही तेरी सजा है, राजा, तू तड़ब तड़ब कर
08:50मरेगा,
08:56मेरी पत्नी और मा की मौत की बाद, अज़ अपका हाल देखकर धीरे धीरे हवेली में दहशत और फैल गई,
09:04धीरे धीरे सब हवेली छोड़ कर भाग निकले, अब इस हवेली में बस कुछ ही बूढ़े सेवक मौजूद है, पर
09:13उन सब के चेहरों पर भी डर साफ दिखाई पड
09:16करता है, महराज, अब आप ही हमारी मदद कर सकते हैं, राजन, तुम जिस बंजारन की बात कर रहे हो,
09:27तुम्हारा बेटा उसी बंजारन के वश में है, वो आरत को याम आरत नहीं थी, बलकि एक चुडैल है, जिसने
09:37तुम से अपने बेटे की मौत का बदला लिया है, अगर �
09:41अपने बेटे की जान बचाना चाहते हो, तो तुम्हें एक कठिन तरीका अपनाना होगा, आप जो बोलोगे मैं सब करने
09:50को तैयार हूँ महराज, बस मुझे मेरा बेटा सही सलामत चाहिए, ठीक है, मेरी बात ध्यान से सुनो, तुम्हारे बेटे
10:00के पास अब सिरफ एक दिन
10:02बचा है, अब मवस्या की रात, वो तुम्हारे बेटे की जान लेने आएगी, पर घबराओ मत, हम उसे बचा लेंगे,
10:12कल तुम्हें गाओं के बाहर वाले जंगल में जाना है, जहां उस बंजारन के बच्चे की एक कबर दफन है,
10:20रात बारा बजे से पहले, तुम्हें उस क
10:23कबर को खोद कर उस बच्चे के कंकाल को यहां लाना होगा, महराज, अगर ये तरकीब काम ना आई तो,
10:31भरोसा रखिये राजन, महरिशी के कहया नुसार, राजा मवस्या की रात आते ही, अपने एक सेवक के साथ उस कबर
10:41को ढोंडने निकल पड़ा, कुछ देर जंगल में �
10:45चलने के बार, वो मिट्टी से ढखी हुई कबर के पास पहांच गया, राजा का सेवक बहुत डरा हुआ था,
10:53इसलिए राजा ने खुद अपने हाथों से उस कबर को खोदना शुरू किया, जैसे जैसे मिट्टी हग रही थी, एक
11:02हजीब सी बद्वू हवा में पहलने लगी,
11:05मानो जैसे वो लाश पूरी तरह से सब्टी है, तबी राजा को इस ख़र में गाली पड़ी, सुखी लाश मिली,
11:15राजा ने उसे संभाल कर अपने हाथों में उठाया, और बिना देरी किये अपनी हवेली लौट आया,
11:24यहाँ हवेली में महरिशी पहले से ही, उस बंजारन चुणैल को रोपने की सारी तयारी कर चुके थे, जल्दी करो,
11:33हमारे पास वक्त बहुत कम है, वो किसी भी समय यहाँ आती होगी,
11:38महरिशी के इतना कहते हैं, अचानक राजा के बेटे का बदन कांप ने लगा, उसने अपने हाथ पैर पटकने शुरू
11:48कर दिये, छोड़ दो मुझे, पिता जी, वो मुझे मार देगी, वो मुझे मार देगी,
12:01डरो मत बेटा, हम सब यहीं हैं तुम्हारे पास, महरिशी ने अरनप की तरफ देखा, और कुछ मंत्र पढ़ते हुए
12:10उसकी और भूंगा, जिसके बाद, अरनप कुछ समय के लिए शान धो गया,
12:22वो आ गई है, जल्दी उस तरफ चलो, महरिशी और राजा अरनप की कमरी में छुप गए, कुछ देर तक
12:31महौल शान्त रहा,
12:33लेकिन फिर धेरे धेरे घुंगरूं की आवाज, अरनप के कमरे के करीब आने लगी, डर के मारे अरनप पसीने में
12:43भीग चुका था,
12:44वो अपने बिस्तर से उठने की कोशिस करी रहा था, कि तभी, दर्वाजे के पास एक परचाई दिखाई दी, उसकी
12:54आँखे लाल, और हाथों में नुकीले नाखुम जमक रहे थे,
13:00अरनप वहाँ से भागने की कोशिस करता है, लेकिन शरीर दुर्बल होने के कारण वो लड़ खड़ा कर वहीं रमिन
13:07कर जुट जाता है,
13:12आज मैं तुझे इस रोक से मुक्त कर दूँगी, मुझे मत मारो, मुझे छोड़ दो,
13:21अरनप के इतना कहते ही, बंजारन एक जटके में ही उसकी गर्दन पकड़के, उसे हवा में उठा लेती है,
13:35वारनप के सर को अपने नाखुनों से खरोचने ही वाली होती है, कि तभी राजा जोर से चीख बढ़ा,
13:43रुख जा, रुख जा, तुझे तेरे इस मरे हुए बच्चे की कसम है,
13:49बंजारन ने जैसे ही राजा के हाथों में अपने बच्चे की लाश को दीखा, उसके कदम वहीं रुख गए, ये
13:59पल के लिए उसकी आँख है, लेकिन अगले ही पल उसकी आँखों में आगसी भड़ा कुठी,
14:10ये तुने अच्छा नहीं किया, राजा,
14:18ओम शिप्रम आश्यती दुष्टात्मा, अग्नी देव, काली शक्तियो, प्रेत जुनी का नाश करो प्रेत आत्मा,
14:30महरिशी के ये शब्दों से, बंजारन का जिस्मत विठराने लगा, जिसके बाद, एक काला धुआ उसके अंदर से निकलने लगा,
14:44तो मुझे नहीं रोक सकता महरिशी, चला जा, नहीं तो मार डालूंगी तुझे, चला जा,
14:56महरिशी ने मिंत्रों का चाप करते हुए, त्रिशूल को जमीन में गार दिया,
15:01और एक चक्रकार अगनी का दाइरा बंजारन फुडैल के इर्द के इर्द बन गया,
15:12मैं लोटूँगी, जब तक मेरे आस्स सूख नहीं जाते, मैं लोटूँगी, लोटूँगी मैं,
15:23दुष्टा अत्माव अपने बच्चे के सावत बांभी जा चुकी है, अब डरने की कोई बात नहीं है,
15:30तुम इस बच्चे के शब को, दुबारा से उसी जगा दफन कर देना,
15:35ठेक है महराज,
15:36बेटा, अब तुम चुरक्षित हो, तुम्हारे शरीर में जो काली शक्ती थी, वो अब जलकर नाश हो चुकी है,
15:48मेरी जान बचाने के लिए आपका धन्यवाद महराज,
15:52खुश रहो बेटा,
15:55महरी शी के जाने के बाद,
15:57राजा ने उस बच्चे के शब को वापस उसी जगा दफन कर दिया,
16:02और शपत ली कि वो फिर कभी शिकार नहीं करेगा,
16:07आपको ये कहानी कैसी लगी,
16:10नीचे कॉमेंट करके जरूर बताए,
16:12और हाँ, अगर आपने भी कभी कोई ऐसी जगा महसूस की हो,
16:17तो हमें लिख कर भेजें,
16:20शायद अगली कहानी आपकी हो,
16:23हलो दोस्तू,
16:24हमारे चैनल की लेटिस्ट वीडियोज और सभी अपडेट्स के लिए,
16:28हमें फेस्बुक और इंस्टाग्राम पर जरूर फालो करें।

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