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Guru Purnima पर करें ये खास उपाय, जानें पूजा विधि और दान का महत्व! आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा के पावन अवसर पर जानिए गुरु पूर्णिमा क्यों मनाई जाती है और इसका धार्मिक व आध्यात्मिक महत्व क्या है।

आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा का दिन सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य परंपरा का सबसे पवित्र पर्व माना जाता है। इस दिन ज्ञान, संस्कार और आध्यात्मिक मार्ग दिखाने वाले गुरुओं के प्रति कृतज्ञता और श्रद्धा व्यक्त की जाती है। इसी पावन तिथि पर चारों वेदों के विभाजक और महाभारत के रचयिता महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था, इसलिए इस दिन को 'व्यास पूर्णिमा' भी कहा जाता है और वेदव्यास जी की विशेष पूजा की जाती है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी तिथि पर भगवान शिव ने भी आदिगुरु के रूप में सप्तऋषियों को योग और अध्यात्म का उपदेश दिया था। शास्त्रों में गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊंचा बताया गया है। इस दिन सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर गुरु, महर्षि वेदव्यास या उनकी चरण पादुका का पूजन, दीप प्रज्वलन, चंदन, पुष्प अर्पित करने और गुरु मंत्रों का जाप करने का विधान है।

गुरु पूर्णिमा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं बल्कि आत्मशुद्धि और दान-पुण्य का अवसर है। इस दिन वस्त्र, अन्न, पुस्तक और दक्षिणा का दान करने से जीवन में सुख, शांति और ज्ञान का आशीर्वाद प्राप्त होता है। जानिए इस पावन पर्व से जुड़ी पूरी पौराणिक कथा और शुभ मुहूर्त के बारे में।


Guru Purnima, also known as Vyasa Purnima, is a sacred Indian festival dedicated to honoring spiritual teachers and mentors. Celebrated on the full moon day of the Ashadha month, it marks the birth anniversary of Maharishi Veda Vyasa, who compiled the Vedas and wrote the Mahabharata. This video covers the religious significance, mythological stories involving Lord Shiva and Veda Vyasa, and step-by-step puja rituals to receive divine blessings.


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Transcript
00:00आशार शुकल पूर्णिमा का दिन भारती संस्कृति में गुरू शिश्य परंपरा का सबसे पवित्र पर्व माना जाता है
00:06यही वो दिन है जो अब ज्यान, संसकार और आध्यात्मिक मार्ग दर्शन देने वाले गुरू के प्रती श्रधा व्यक्त की
00:13जाती है
00:14इस दिन महरशी वेद व्यास की जोयनती भी मनाई जाती है इसलिए व्यास पूर्णिमा भी इसको कहा जाता है
00:20लेकिन आखिर गुरु पुर्णिमा क्यों मनाई जाती है? इसका धार्मिक महत्व क्या है? और इस दिन गुरु पुजन की सही
00:28विधी क्या है? आईए जानते हैं इस पावन पर्व से जुड़ी पूरी जानकारे
00:33नमस्कार मेरा नाम है रिचा पराशर और आप देख रहे हैं वनेंट्य हिंदी
00:36भारत की सनातन परंपरा में गुरु का स्थान इश्वर से भी उंचा माना गया है
00:41गुरु के वलब शिक्षा देने वाला व्यक्ति नहीं होता है
00:44बलकि जीवन को सही दिशा दिखाने वाले मार्क दर्शक भी होते हैं
00:48इसे गुरु शिषए परंपरा को समर्पित पर्व है गुरु पुनिमा
00:51जिसे हर वर्ष आशाड मास के शुकल पक्ष की पुर्णिमा तिथी पर पुरे देश में शुरधा और भक्ति के साथ
00:58मनाया जाता है
01:00धार्मिक मानेताओं के अनुसार इसी पावन तिथी पर महर्शी वेद्व्यास का जन्म हुआ था
01:05वेद्व्यास ने चारों वेदों का विभाजन किया महभारत की रचना की और अठारव पुराणों को उनका संकलन करके मानों समाज
01:16को अमुल्य ज्यान प्राप्त किया
01:18इसी कारण उन्हें आदी गुरु भी कहा जाता है और इसी दिन व्यास पूजा भी की जाती है इसलिए गुरु
01:24पुर्णिमा को व्यास पुर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है
01:27भारत्य संस्कृति में सद्यों से कहा जाता है
01:30गुरू गोविंद दोव खड़े, काके लागू पाए, बलिहारी गुरू आपने गोविंदियों बताए
01:37इस दोहे का आर्थ है कि यदि गुरू और भगवान दोरों सामने खड़े हूँ
01:42तो सबसे पहले गुरू को प्रणाम करना चाहिए क्योंकि गुरू ही भगवान तक पहुशने का मार्ग बताते हैं
01:48शास्त्रों में भी गुरू को ब्रह्मा, विश्नु और महेश के समान पूजनियम आना गया है
01:53एक प्रसिद गुरू मंत्र भी है जो हम बच्पन से सुनते आ रहे हैं
01:57गुरूर ब्रह्मा, गुरूर विश्नु, गुरूर देवो महेश्वरा, गुरूर साक्षात परब्रह्मा, तस्मै श्री गुरूवे नमा
02:03गुरू के सर्वोच स्थान को दर्शाता है और मना जाता है कि गुरू के मारदर्शन के बिना ज्यान, आत्मबोध और
02:12मोक्ष के प्राप्ति कठिन है
02:13गुरू पुर्णिमा का संबंध केवल महरशिव वेद्व्यास सही नहीं बलकि भगवान शिव से भी जुड़ा हुआ है
02:19और आडिक कथाओ के अनुसार, भगवान शिव ने इसे दिन सबतरिशियों को योग, तंत्र और आध्यात्मिक ज्यान का उप्तेश दिया
02:27था
02:28इसलिए भगवान शिव को भी आदि गुरू कहा जाता है
02:31अब बात करते हैं गुरू पुजन की विधी की
02:34गुरू पुणिमा के दिन प्रात्यकाल सनान करके स्वक्ष वस्तर धारन करें
02:37पुजा स्थल पर अपने गुरू महर्शिवेद व्यास या उनके चरन पादुका का चितर स्थाबित करें
02:43इसके बाद दीपक जलाएं चंदन अक्षत पुष्पुफल नवैद्य अर्पित करें
02:49शधा पुरू अप गुरू मंत्र का जाप करें
02:51यदि आपके गुरू साक्षा तो पस्थित हो तो उनके चरन स्पर्श कर आशिरवाद ले और यह जो विदिया है यह
03:12तो शास्त्रों से आ रही है
03:13आज के यूग के लिए यही प्रासंगिक है इस दिन अपनी श्रधा के अनुसार वस्त्र पुस्तक अन्फल्या या फिर कोई
03:21भी फल दान किया जाता है यह भी शुब माना जाता है
03:23कई लोग इस अफसर पर सत्संग जाप ध्यान और सेवा कारियों में भी भाग लेते हैं ऐसा माना जाता है
03:29कि गुरु सेवा और दानपुन्य से ज्ञान विवेक और अध्यात्मिक उन्नतिक आशिरवाद प्राप लागता है और इस कल यूग में
03:35जो भी हमें यह सारी शिक्�
03:50हैं जो भी हमारे गुरु हैं जो भी हमें ग्यान देता है वो सभी हमारे गुरु है और सबका इज़त
03:57और मान सम्मान सर वो परीवना चाहिए अब आध्यात्मिक दृष्टी पर भी बात करते हैं तो आध्यात्मिक दृष्टी से गुरु
04:02पर निमा कीवल एक धार्मिक परव
04:17या ऐसा कोई व्यक्ति जिसने कठिन समय में हमारा मार्ग दर्शन किया हूँ
04:21इसलिए गुरु पुर्णिमा भारतिय संस्कृति में किवल एक तिवहार नहीं होता
04:25बलकि ज्यान, संस्कार, सम्मान, प्रितग्यता सबका उच्चा होता है
04:31ये संदेश हमें याद दिलाता है कि जीवन में सफलता का मार्ग हमेशा एक सच्चे गुरु के मारग दर्शन से
04:37ही प्रकाशित होता है
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