00:00आशार शुकल पूर्णिमा का दिन भारती संस्कृति में गुरू शिश्य परंपरा का सबसे पवित्र पर्व माना जाता है
00:06यही वो दिन है जो अब ज्यान, संसकार और आध्यात्मिक मार्ग दर्शन देने वाले गुरू के प्रती श्रधा व्यक्त की
00:13जाती है
00:14इस दिन महरशी वेद व्यास की जोयनती भी मनाई जाती है इसलिए व्यास पूर्णिमा भी इसको कहा जाता है
00:20लेकिन आखिर गुरु पुर्णिमा क्यों मनाई जाती है? इसका धार्मिक महत्व क्या है? और इस दिन गुरु पुजन की सही
00:28विधी क्या है? आईए जानते हैं इस पावन पर्व से जुड़ी पूरी जानकारे
00:33नमस्कार मेरा नाम है रिचा पराशर और आप देख रहे हैं वनेंट्य हिंदी
00:36भारत की सनातन परंपरा में गुरु का स्थान इश्वर से भी उंचा माना गया है
00:41गुरु के वलब शिक्षा देने वाला व्यक्ति नहीं होता है
00:44बलकि जीवन को सही दिशा दिखाने वाले मार्क दर्शक भी होते हैं
00:48इसे गुरु शिषए परंपरा को समर्पित पर्व है गुरु पुनिमा
00:51जिसे हर वर्ष आशाड मास के शुकल पक्ष की पुर्णिमा तिथी पर पुरे देश में शुरधा और भक्ति के साथ
00:58मनाया जाता है
01:00धार्मिक मानेताओं के अनुसार इसी पावन तिथी पर महर्शी वेद्व्यास का जन्म हुआ था
01:05वेद्व्यास ने चारों वेदों का विभाजन किया महभारत की रचना की और अठारव पुराणों को उनका संकलन करके मानों समाज
01:16को अमुल्य ज्यान प्राप्त किया
01:18इसी कारण उन्हें आदी गुरु भी कहा जाता है और इसी दिन व्यास पूजा भी की जाती है इसलिए गुरु
01:24पुर्णिमा को व्यास पुर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है
01:27भारत्य संस्कृति में सद्यों से कहा जाता है
01:30गुरू गोविंद दोव खड़े, काके लागू पाए, बलिहारी गुरू आपने गोविंदियों बताए
01:37इस दोहे का आर्थ है कि यदि गुरू और भगवान दोरों सामने खड़े हूँ
01:42तो सबसे पहले गुरू को प्रणाम करना चाहिए क्योंकि गुरू ही भगवान तक पहुशने का मार्ग बताते हैं
01:48शास्त्रों में भी गुरू को ब्रह्मा, विश्नु और महेश के समान पूजनियम आना गया है
01:53एक प्रसिद गुरू मंत्र भी है जो हम बच्पन से सुनते आ रहे हैं
01:57गुरूर ब्रह्मा, गुरूर विश्नु, गुरूर देवो महेश्वरा, गुरूर साक्षात परब्रह्मा, तस्मै श्री गुरूवे नमा
02:03गुरू के सर्वोच स्थान को दर्शाता है और मना जाता है कि गुरू के मारदर्शन के बिना ज्यान, आत्मबोध और
02:12मोक्ष के प्राप्ति कठिन है
02:13गुरू पुर्णिमा का संबंध केवल महरशिव वेद्व्यास सही नहीं बलकि भगवान शिव से भी जुड़ा हुआ है
02:19और आडिक कथाओ के अनुसार, भगवान शिव ने इसे दिन सबतरिशियों को योग, तंत्र और आध्यात्मिक ज्यान का उप्तेश दिया
02:27था
02:28इसलिए भगवान शिव को भी आदि गुरू कहा जाता है
02:31अब बात करते हैं गुरू पुजन की विधी की
02:34गुरू पुणिमा के दिन प्रात्यकाल सनान करके स्वक्ष वस्तर धारन करें
02:37पुजा स्थल पर अपने गुरू महर्शिवेद व्यास या उनके चरन पादुका का चितर स्थाबित करें
02:43इसके बाद दीपक जलाएं चंदन अक्षत पुष्पुफल नवैद्य अर्पित करें
02:49शधा पुरू अप गुरू मंत्र का जाप करें
02:51यदि आपके गुरू साक्षा तो पस्थित हो तो उनके चरन स्पर्श कर आशिरवाद ले और यह जो विदिया है यह
03:12तो शास्त्रों से आ रही है
03:13आज के यूग के लिए यही प्रासंगिक है इस दिन अपनी श्रधा के अनुसार वस्त्र पुस्तक अन्फल्या या फिर कोई
03:21भी फल दान किया जाता है यह भी शुब माना जाता है
03:23कई लोग इस अफसर पर सत्संग जाप ध्यान और सेवा कारियों में भी भाग लेते हैं ऐसा माना जाता है
03:29कि गुरु सेवा और दानपुन्य से ज्ञान विवेक और अध्यात्मिक उन्नतिक आशिरवाद प्राप लागता है और इस कल यूग में
03:35जो भी हमें यह सारी शिक्�
03:50हैं जो भी हमारे गुरु हैं जो भी हमें ग्यान देता है वो सभी हमारे गुरु है और सबका इज़त
03:57और मान सम्मान सर वो परीवना चाहिए अब आध्यात्मिक दृष्टी पर भी बात करते हैं तो आध्यात्मिक दृष्टी से गुरु
04:02पर निमा कीवल एक धार्मिक परव
04:17या ऐसा कोई व्यक्ति जिसने कठिन समय में हमारा मार्ग दर्शन किया हूँ
04:21इसलिए गुरु पुर्णिमा भारतिय संस्कृति में किवल एक तिवहार नहीं होता
04:25बलकि ज्यान, संस्कार, सम्मान, प्रितग्यता सबका उच्चा होता है
04:31ये संदेश हमें याद दिलाता है कि जीवन में सफलता का मार्ग हमेशा एक सच्चे गुरु के मारग दर्शन से
04:37ही प्रकाशित होता है
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