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Breaking News: Bihar Govt का बड़ा फैसला, Protesters पर दर्ज FIR होंगी वापस, शुरू हुई सियासत! बिहार सरकार ने छात्र आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने का ऐलान किया है, लेकिन इस फैसले ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

बिहार सरकार ने राज्य में हुए छात्र आंदोलनों और बिहार बंद से जुड़े प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर (FIR) और दर्ज आपराधिक मामलों को वापस लेने तथा गिरफ्तार लोगों को रिहा करने का फैसला किया है। गृह विभाग की ओर से जारी बयान में तर्क दिया गया है कि निर्दोष छात्रों का भविष्य आपराधिक मुकदमों की वजह से प्रभावित नहीं होना चाहिए। हालांकि, सरकार के इस रुख के बाद कानून व्यवस्था और आपराधिक न्याय प्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
हालिया प्रदर्शनों के दौरान सीवान, छपरा, पटना और अन्य जिलों में बड़े पैमाने पर हिंसा, पुलिस पर पथराव, गाड़ियों में तोड़फोड़ और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने की घटनाएं सामने आई थीं। सीवान में पथराव के दौरान एसपी (SP) समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए थे और पुलिस को स्थिति संभालने के लिए कार्रवाई करनी पड़ी थी। प्रशासन ने सीसीटीवी (CCTV) और वीडियो फुटेज के जरिए उपद्रवियों की पहचान भी की थी।

कानून के जानकारों का मानना है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन हिंसा और पुलिस पर हमला करना कानून की नजर में गंभीर अपराध है। ऐसे में यह सवाल बड़ा हो गया है कि क्या शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों और हिंसक प्रदर्शन का हिस्सा रहे उपद्रवियों दोनों के खिलाफ दर्ज केसों को एक समान राहत देना उचित है?


The Bihar government has announced the withdrawal of all criminal cases and FIRs registered against student protesters, citing the protection of young careers. However, the decision has sparked debate following violent incidents during recent state-wide protests in districts like Siwan and Chhapra, where stone-pelting injured senior police officers and public property was damaged. Critics question whether granting immunity to violent offenders alongside peaceful demonstrators sets a risky precedent for law and order.


#BiharNews #StudentProtest #SamratChaudhary #BiharPolice

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Transcript
00:00बिहार सरकार ने छात्र आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों को राहत दने का फैसला लिया है
00:04सरकार ने घोश्टा की है कि आंदोलन की दौरान छात्रों पर दर्ज कई मामलों को वापस लिया जाएगा
00:09उन्हें राहत दी जाएगी
00:10सरकार का कहना है कि ये फैसला चात्रों के भविशों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है लेकिन इस
00:15फैसले नेक नई बहस भी छेट दी है
00:17सवाल उचा है कि अगर किसी प्रदर्शन के दोरान हिंसा हुई है पुलिस पर पत्रा हुआ है सरकारी संपत्ती को
00:24नुकसान पहुँचा है लोगों के दुकानों को नुकसान पहुँचा है और पुलिस अधिकारी गायल भी हुए है तो क्या ऐसे
00:30मामलों में भी केस वापस लेन
00:43की प्रक्रियाश शुरू करने का फैसला किया है सरकार का तर्क है कि बड़ी संख्या में ऐसे चातर भी आंदोलन
00:49का हिस्सा थे जिनके जिनका उदेश केवल अपनी मांगो को शांतिपूर्ण धंग से रखना था ऐसे युवाओं का भविश्य आप
00:55राधिक मामलों की विज़े
00:56से प्रभावित नहीं होना चाहिए लेकिन इस फैसले के बाद कारून में वस्था को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं
01:02अब हाली में बिहार बंद के दौरान सिवान छप्रा और अन्य जिलों में हिंसा की तस्वीरें पूरे देश ने देखी
01:09कई स्थानों पर प्रदर्�
01:25समेत कई पुलिस कर्मी घायल हो गए प्रिशासन को भीड को नियंत्रत करने के लिए लाठे चार्ज आसू कैस और
01:31अन्य भीड नियंत्रत के उपाय अपनाने पड़े बाद में कई संदिग्दों की पहचान वीडियो फुटेज और सिसी टीवी के अधार
01:37पर की गई यही सब
01:38से बड़ा सवाल खड़ा होता है अगर कोई चात्र केवल शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहा था तो उसके खिलाफ कारवाई की
01:45समीक्षा होना एक अलग विशय है लेकिन यदि किसी व्यक्ति पर हिंसा पथरा और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या
01:53पुलिस प
02:07पर हमला करना भारतिय दंड कानूनों के तहत गंभीर अपराध की श्रेनी में आता है यही कारण है कि सरकार
02:13के इस फैसले पर अलग अलग प्रतिक्रियाय सामने आ रहे हैं कुछ लोगों का कहना है कि छात्रों के भविश्यों
02:18को बचाने के लिए ये मानविया फैसला है वही
02:34हिंसक प्रदर्शन के बाद भी उन्हें कानूनी रहत मिल जाएगी ये तो अस समाजिक तत्तों को बढ़ावा देने की स्थी
02:40हो गई ये बहस केवल बिहार तक समित नहीं है हर लोग तांतरिक व्यवस्था में ये चुनोती रहती है कि
02:45शांते पुर्ण प्रदर्शन करने वा
03:01इस पर हमले जैसे गंभीर आरोपो वालों वामलों में भी यही निती अपनाई जाएगी आने वाले दिनों में सरकार के
03:07विस्तरित अधिसूचना और प्रिशासने कारवाई से ये तस्वीर और सपष्ट होगी लेकिन इतना ताय है कि लोगतंत्र में विरोध का
03:14अधिकार ज
03:28हैं संभार राइट की बाते हैं संभीधान में को यही चोड़ देना चाहिए क्या इलेक्शन का ला-लज क्या सरकार
03:55इसकदर मजबूर हो गई है
03:56कि उपद्रवियों पर बात करने से भी कत्रा रही है
03:59आपके जो भी राय है हमें कॉमेंट बॉक्स में ज़रूर बताईए
04:02और अपडेट्स के लिए देखते रहिए One India हिंदी
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