00:00जानकी स्तुती भई प्रकट कुमारी भूमि विदारी जन हितकारी भय हारी अतुलित छबिभारी मुनिमन हारी जनक दुलारी सुकुमारी
00:23सुन्दर सिंहासन तेहि पर्यासन कोटि हुताशन द्युति कारी सिर छत्र बिराजय सक्षंग भ्राजय निज निज कारज करधारी
00:44सुरसिद्ध सुजाना हन निशाना चड़ बीमाना समदाई
00:54बरश ही बहु फूला मंगल मूला अनुकुलासि गुन गाई
01:05देख ही सब ठाड़े लोचन गाढ़े सुख बाढ़े उर अधिकाई
01:15अस्ति मुनिकरही आनंद भरही पायन परही हरशाई
01:27रिशिनारद आये नाम सुनाये सुनि सुख पाये निप ज्यानी
01:36सीता सनामा पूरन कामा सब सुख धामा गुन खानी
01:47सीयसन मुनिराई विनय सुनाई सते सुहाई मृद बानी
01:57लालनी तननी जय चरित सुकी जय यह सुख दी जय निर्प रानी
02:08सुनि मुनि बरबानी सीय मुसे कानी लीला ठानी सुख दाई
02:18सुवत जनु जागी रोवन लागी निर्प बड़ भागी उरलाई
02:29दंपतिय नुरागेऊ प्रेम सुपागेऊ यह सुख लायं मन लाई
02:39अस्ति सीय केरी प्रेमल तेरी बरनि सुचेरी सिरनाई
02:50निजित छामक भूमिते प्रगट भई सीय आय चरत किये पावन परम बरधन मोद निकाय
03:09झाले झाले
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