एकश्लोकी सुंदरकांड (Ek Shloki Sundarkandam) रामायण के सबसे शक्तिशाली अध्याय 'सुंदरकांड' का सार है। ऐसी मान्यता है कि यदि समय की कमी के कारण आप पूरा पाठ नहीं कर पाते, तो इस एक श्लोक का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से पूर्ण सुंदरकांड का फल मिलता है।
भावार्थ: जिनकी कृपा और आशीर्वाद के बल पर हनुमान जी ने खेल-खेल में समुद्र को पार किया, लंका पहुँचे, माता सीता के दर्शन किए, अशोक वाटिका को नष्ट किया, अक्षय कुमार सहित राक्षसों का वध किया, रावण (दशकम्) को देखा, पूरी लंका नगरी को जला दिया और पुनः समुद्र पार कर वानरों के साथ लौटकर जिन्हें प्रणाम किया—उन श्री रामचंद्र जी का मैं भजन करता हूँ।
नित्य इस श्लोक का श्रवण करने से: एकाग्रता और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होती हैं। श्री राम और हनुमान जी की संयुक्त कृपा प्राप्त होती है।