Skip to playerSkip to main content
एकश्लोकी सुंदरकांड (Ek Shloki Sundarkandam) रामायण के सबसे शक्तिशाली अध्याय 'सुंदरकांड' का सार है। ऐसी मान्यता है कि यदि समय की कमी के कारण आप पूरा पाठ नहीं कर पाते, तो इस एक श्लोक का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से पूर्ण सुंदरकांड का फल मिलता है।

यस्य श्रीहनुमाननुग्रह बलात्तीर्णाम्बुधिर्लीलया
लङ्कां प्राप्य निशाम्य रामदयिताम् भङ्क्त्वा वनं राक्षसान् ।
अक्षादीन् विनिहत्य वीक्ष्य दशकम् दग्ध्वा पुरीं तां पुनः
तीर्णाब्धिः कपिभिर्युतो यमनमत् तम् रामचन्द्रम्भजे ॥

भावार्थ: जिनकी कृपा और आशीर्वाद के बल पर हनुमान जी ने खेल-खेल में समुद्र को पार किया, लंका पहुँचे, माता सीता के दर्शन किए, अशोक वाटिका को नष्ट किया, अक्षय कुमार सहित राक्षसों का वध किया, रावण (दशकम्) को देखा, पूरी लंका नगरी को जला दिया और पुनः समुद्र पार कर वानरों के साथ लौटकर जिन्हें प्रणाम किया—उन श्री रामचंद्र जी का मैं भजन करता हूँ।

नित्य इस श्लोक का श्रवण करने से:
एकाग्रता और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
श्री राम और हनुमान जी की संयुक्त कृपा प्राप्त होती है।

#hanuman #sundarkand #एकश्लोकीसुंदरकांड #हनुमानजी #ramayan #devotional #lordkrishnabhajan #jaihanuman

Category

📚
Learning
Transcript
00:00एक श्लोकी सुन्दर कांडम
00:32तीर्णांभिकपि भिर्युतो
00:39यमनमत्तम्रामचंद्रम्भजे
Comments

Recommended