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चातुर्मास माहात्म्य | Chaturmas Mahatmy | चातुर्मास व्रत का महत्व #chaturmas #narayan

जय श्रीकृष्ण भक्तों, चातुर्मास के पावन समय में भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं। इस वीडियो में हम जानेंगे चातुर्मास का माहात्म्य, इसके नियम, और इन 4 महीनों में किए जाने वाले विशेष कार्यों के बारे में। यदि आप अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि चाहते हैं, तो चातुर्मास के नियमों का पालन अवश्य करें।

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00:00देव शैनी एकादशी तथा चातुर मास से व्रत मातमें
00:03श्रीक्रिशन जी बोले कि हे राजन आशार शुकलपक्ष की पद्मा एकादशी को देव शैनी एकादशी भी कहते हैं
00:11चातुर मास का व्रत इसी एकादशी से प्रारंब होता है
00:15युधिश्टिर बोले हे भगवन भगवान विश्नु के शैन का व्रत किस प्रकार करना चाहिए और चातुर मास के व्रत भी
00:22कहिए
00:23श्रीक्रिशन जी बोले हे राजन अब मैं आपको भगवान विश्नु के शैन व्रत और चातुर मास व्रत का महतमें सुनाता
00:30हूं
00:30आप एकागर्चित होकर ध्यान पूर्वक सुनिए, जब सुर्य कर्क राशी में आता है तो भगवान को शयन कराते हैं, और
00:38जब तुला राशी में आता है तब भगवान को जगाते हैं, अधिक मास के आने पर भी यह विधी इसी
00:44प्रकार चलती है, इसके सिवाए और महिने में
00:47ना तो शयन कराना चाहिए और ना जगाना ही चाहिए, आशार मास की एकदशी का विधीवत व्रत करना चाहिए, उस
00:55दिन भगवान विश्नु की चतुर्भुजी सोने की मूर्ती बनवा कर चातुर मास व्रत के नियम का संकल्प करना चाहिए, भगवान
01:02की मूर्ती को पितां
01:37ुद्वादशी, द्वादशी, पूर्णमासी, अश्टमी और
01:42कर्प की संक्रांती से व्रत प्रारंब किया जाता है, तथा कार्तिक शुक्र द्वादशी को समाप्त कर दिया जाता है, व्रत
01:50के करने से समस्त पाप नश्ट हो जाते हैं, जो मनुष्य प्रति वर्ष इस व्रत को करते हैं, वे सूर्य
01:56जैसे दीप्तिमान विमान पर बैठ कर स्
02:00इस व्रत में गुरु तथा शुक्र की बाल व्रधावस्था वर्जित नहीं है। यदि सुर्य धनुराशी के अंश में भी आ
02:07गया तो यह तीथी पूर्ण समझी जाती है। जो स्त्री या पुरुष पवित्र होकर शुद्धता से इस व्रत को करते
02:14हैं वे सब पापों से चू
02:29मंदिरों में रंग करते हैं उनको साथ जन्म तक ब्राम्मन योनी मिलती है। जो मनुषे चातुरमास में भगवान को दूद,
02:37दही, घी, शहद और मिश्री आदी से सनान कराते हैं और ब्राम्मनों को भूमी, स्वर्ण, आदी, दान देते हैं वे
02:45वैभवशाली होकर अंतमे
02:47स्वर्ग में जाकर इंद्र सुक भोगते हैं जो भगवान विश्नु की सोने की प्रतिमा बनाकर धूप, दीप, नवेद्य और पुष्प,
02:54आदी से भगवान का पूजन करते हैं वे इंद्र रोप में जाकर अक्षय सुक भोगते हैं जो तुलसी से भगवान
03:01का पूजन करत
03:25।
03:32का हवन करते हैं वे सुन्दर विमान में बैठ कर अपसराउं से सेवित होते हैं जो भगवान का चर्णामृत लेते
03:39हैं वे सब कश्टों से मुक्त हो जाते हैं जो नित्यपृती मंदिर में तीनों समय एक
03:44108 वार गायत्री मंत्र का जब करते हैं उनसे भी पाप सदयव दूर रहते हैं जो गायत्री का ध्यान और
03:51जब करते हैं उनसे भगवान व्यास प्रसन्न होते हैं इसके उद्यापनों में शास्त्र की पुस्तक दान में की जाती है
03:58जो पुराण वर धर्म शास्त्र को पढ़ते य
04:12अत्वा उनकी सोने की मूर्ति दान करते हैं साथ ही यह प्रात्ना करते हैं हे शिव आपने त्रिपूर नामक दैत्य
04:20को मारा है मेरे दोशों को भस्म करके मुझको सद्गुन दीजिए वह पापों से रही थोकर धन्वान गुणवान हो जाते
04:28हैं जो नित्यकर्म के पश्चात स
04:31ब्रत की सम entities फूर्ण लाल वस्त्र और गवदान करते हैं बेहारोग्यता पूण आयूंधर धन और बल पाते हैं चातूरमास
04:41में जो मनुष्य है घयत्री मंत्र द्वारा तिल से होम करते हैं
04:44and when people have power to acquire it, they use them to manage their own
04:49and every person doesn't usually use their own
04:54and they use a full body for us
04:57where everybody's body will perform
05:00and to protect their own those who ask people
05:05who use their own
05:06should make them
05:09and go to the other
05:27ॐ ॐ ॐ
05:43. . . . . . .
06:13. . . .
06:44. . . . .
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06:47ुप्रवἵजी के प्रसन्नार्थ, चान्दी या तांबे का दान करते हैं।
07:46वे भोग और मोक्ष को प्राप्थ होते हैं।
07:47चातुरमा स्वरत करने वाला मनुष्य गंधर, विद्या में निपोन और स्त्रियों का प्रिय होता है।
08:46प्राप्थ होते हैं।
09:16और पती अपनी पत्नियों के साथ सुख भोगते हैं।
09:45अंत में मोक्ष को प्राप्थ होते हैं।
09:47जो वस्त्रों राभूशनों सहित गउ और बच्छडे का दान करते हैं।
09:51वे ज्यान प्राप्थ करके ब्रह्म लोक को जाते हैं।
09:55और पितरों के साथ अनेक सुखों को भोगते हैं।
09:57जो मनुशे चाथुर्मास में प्राजा-पत्यवरत करते हैं और उसकी जमाप्ति पर गउदान और ब्रह्मनों को भोजन करते हैं।
10:07और जो वस्त्रों वा बैलों सही धल का दान करते हैं तथा शाक, मूल और फलों का आहार करते हैं
10:14वे विश्णू लोक को जाते हैं।
10:16जो मनुष्य केले के पत्र या पलाश के पत्रों में भोजन करते हैं, कांसी के पात्र और वस्त्र दान करते
10:22हैं, तथा तेल नहीं खाते, उनके समस्त पाप नाश को प्राप्थ हो जाते हैं.
10:27जो मनुष्य पयोवरत करते हैं और अंत में दूद वाली गवदान देते हैं, वे विश्नु लोग को जाते हैं. चातुरमास
10:34वरत के प्रभाव से ब्रह्म घाती, सुरापान करने वाला, बाल घाती, असत्य भाशन करने वाला, स्त्री घाती, किसी वरत में
10:42विग्न डालने वाल
10:43foreign
11:13Undko kisij shatruka bhay nlahi hota
11:15Aur ant may swurg log ko jaitate hay
11:17Bel ka Dasan karne se Shatres Bhojan Miltate hay
11:21Chaturmashivrita mejhjem j excellente
11:22Nitabhrati jagran karate hay
11:23Tathah ant may bra
11:25B Sanskrit co Bhojan karate hay
11:36Bhaagwan Takes sishan karne par bhoomiy live
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Comments
Mere Krishna
Creator
Jai Shriman Narayan 🙏🙏🙏

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