00:00देश की राजनीती स्वक्टे के ऐसे मोड पर खड़ी है जहां एक तरफ नीट यूजी परिक्षा विवाद ने छात्रों अभिभावकों
00:07और विपक्ष को सड़कों पर लाकर खड़ा किया तो दूसरी तरफ केंद्रिय शिक्षा मंतरी को लेकर सियासी गलियारों में तेज
00:13हल
00:25पर है कि सरकार अब शिक्षा मंतराले की जिम्मेदारी किसी नए चेहरे को सौपने पर विचार कर रही है जुसके
00:32बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि कौन बनेगा देश का अगला नया शिक्षा मंतरी नमस्कार मेरा नाम है
00:39रिचा पराशर और आप देख रहे हैं वन
00:55प्रशिता और सरकार की जवाब देही यही मुद्दे एक ही केंद्र पर आकर टिक गए यही वजह है कि छात्र
01:02लगतार आक्रोशित रहे और विपक्ष ने भी सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं चोड़ा प्रदर्शन ग्यापन प्रेस कॉन्फरेंस संसत
01:11से सड़क तक उठ
01:25कैसे संभाला चाएगा फिलहाल चार प्रमुख विकल्पों पर चर्चा हो रही है सबसे पहला विकल्प है कि शुक्षा मंत्राले के
01:33मौजूदा राज्यमंत्रियों को अस्था या फिर ततकाल प्रभार दे दिया जाए इसी सूची में जयंत चौधरी और सुकांत मजूमद
01:41सरकार के नाम सबसे अधिक चर्चा में बतायो जा रहे हैं दूसरा विकल्प है प्रधानमंत्रि नरेंडर मोदी काविनेट के किसी
01:47वरिष्ट मंत्री को अतरिक्त प्रभार देकर इस्तिती को और श्ताई रूप से संभालें तीसरा और सबसे राज्रतिक विकल्प यह है
01:56कि स
02:11तरकार ऐसे नेता की तलाश में है जो सिर्फ राजनितिक रूप से मजबूत ना हो बलके छात्रों और युवाओं के
02:18बीच भरोसा भी जगा सके इसी संदर्व में कुछ नाम हवा में तैरने लगे हैं और उन्ही नामों में अब
02:24रागव चज्जा का नाम इसका उलेक सबसे उ
02:40और आते हैं जब अप्रत्याशित नाम भी चर्चा का विशह बन जाते हैं नाम इसलिए भी सामने आता है क्योंकि
02:47वे युआ चेहरे के रूप में देखे जाते हैं और नीती बहसों में उनकी सक्रियता ने उन्हें एक अलग पहचान
02:53दी है अलकि दूसरी और ये भी सच है कि
02:56किसी भी मंत्राले की जिम्मदारी सिर्फ लोग प्रियता या फिर मीडिया उपस्तिती से तय नहीं होती चुक्षा मंत्राले की जिम्मदारी
03:03बेहत सम्वेदंशील होती है यहां नीतिगत अनुभाव, प्रशास्निक समाज, परिक्षा सुधारों की स्कुष्ट दिशा, रा
03:23इस से पहला काम होगा विश्वास बहाल करना, छात्रों को यह भरोसा दिलाना कि परिक्षा प्रणाली उनके भविश्य के साथ
03:31खिलवाड नहीं करेगी, इसे बीच महराश्र की राजुनीती से भी एक बड़ा संकेत मिला है, खबर है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र
03:39पड़
03:53सवाल यह है कि क्या ये किवल सगठनात्मक चर्चा है, क्या महराश्र से जुड़े किसी प्रिशासनिक मुद्दे पर बात हो
04:01रही है, या फिर केंद्र की राजुनीती में किसी बड़े फेर बदल की भूमी का अब तयार हो रही है,
04:07अभी इसके जवाब सामने नहीं आये है,
04:10लेकिन राजुनीती के तापमान जरूर बढ़ गया है और अटकलों और सोर्स के मुताबिक हम आपको कुछ इस पर सपश्टत
04:17जरूर दे सकते हैं, दिल्ली में जब भी अमित शाह और किसी बड़े राज्य के नेता की अचानक बैठा की
04:23खबर आती है, तो उसका असर केवल �
04:25उस राजय तक सभित नहीं रहता, राष्टिय राजनीती में इसका असर दूर तक जाता है, खास का तब जब पहले
04:32ही शिक्षा मंत्रा ले चात्र आंदोलन और संभावित काबिनेट बदलाव जैसी खबरें हवा में हो, और अब संभावित काबिनेट बदलाव
04:40के बीच शि
04:53परिक्षा मंत्री किसको भार दिया जाएगा, इन चर्चाओं के बीच ये सब ख़वरें अपने आप में उवाल पकड़ चुके हैं,
05:00ऐसे में हर मुलाकात, हर फोन कॉल और हर दिल्ली तलब को राजनीतिक संकेत की तरहे ही पढ़ा जाता है,
05:07यही वज़ा है कि फर्णविस क
05:09दिल्ली यात्रा ने चर्चा को और गर्म कर दिया है, नीट यूजी विवाद में सरकार के लिए चुनौती सिर्फ विपक्ष
05:15का जवाब देना नहीं है, असली चुनौती है परिक्षा प्रणाली की विश्वस्नियाता को दुबारा स्थापिद करना, छात्र जब बार बार
05:24सवाल उठाते हैं, तो उनका गुस्ता केवल एक परिक्षा तक समित नहीं रहता है, वो पूरे सिस्टम पर भरोसे के
05:30संकट में बदल जाता है, और जब भरोसा तूटता है, तब मंत्री बदल देने से समस्या खत्म नहीं होती, जरूरत
05:38होती है सुधारों की, जवाब देही
05:40की और पारदर्शी जांच की, इसी वजह से अब सरकार के सामने जो भी नया चहरा आएगा, उसके लिए सबसे
05:47बड़ी परिक्षा वही होगी, क्या वो भरोसा वापस ला सकता है, अगर सरकार राज्य मंत्रियों को जिमदारी देती है, तो
05:54ये एक प्रशासनिक राहत कदम हो
06:10कि सरकार परिक्षा सुधारू को लेकर एक सख्त और व्यापक संदेश देना चाहती है, उस थिती में शिक्षा मंत्राले को
06:18सिर्फ एक विभाग नहीं बलकि एक राजनीतिक और नैतिक चुनौती के रूप में देखा जाएगा, रागाव चड़ा का नाम ऐसे
06:25समय में इसलि
06:40विधायक थे, और रातो रात बीजेपी ने उन्हें राष्ट्य राजनीती में जगे दे दी, इस बीच अभी बांगीपूर में चुनाओं
06:46हो रहा है, ये एक अलग कहानी है कि अब एक नया विधायक वहाँ पर चुना जाएगा, वहाँ पर लड़ाई
06:50हो रही है, लेकिन हम
06:51हम वापस अपने मुद्धे पर आते हैं, ये भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि इस तरह कि चर्चाओं को और
06:57तथ्य को अनुमान के बीच अलग से अलग देखा जा सकता है, किसी भी आधिकारिक मोटिफिकेशन, राष्ट्रपती भावन की घोशना
07:03या पीएमो की अधी सू�
07:05पुचना के बिना इस तरह के नाम किवल संभावनाओं की श्रिणी में ही रहेंगे, लेकिन संभावनाएं तो हैं इससे नकारा
07:11नहीं जा सकता, फिलहाल देश के निगाहें दो जगहें टिकी हैं, एक शिक्षा मंत्राले में जो बदलाव हो रहा है
07:17तो नया शिक्षा मंत्री
07:18कौन बनता है? और दूसरी, अमिद शाह और दिवेंट फर्णविस की अचानक दिल्ली बैठक का असली एजेंडा क्या है? इन
07:26दोनों घचनाओं ने मिलकर राजनीती को एक नई दिशा में धकेल दिया है, अगर शिक्षा मंत्राले में बदलाव होता है
07:32तो ये किवल कैबिन
07:46प्रणाली और राजनीती, अब एक दूसरे से अलग नहीं देखी जा सकती, नीट यूजी जैसे विवाद केवल शिक्षा शित्र के
07:53नहीं रहते, वे सीधे सीधे शासन और विश्वस्यता से जोड़ जाते हैं और जब ऐसे समय में मंत्री परिवर्दन, नई
08:01नामों की चर्
08:13में को अधिकारिक घोशना होती है, क्या शिक्षा मंत्राले को नया चेहरा मिलता है, और क्या ये राजनीतिक हल चल
08:20किसी बड़े फेर बदल की शुरुवात है, फिलाल इतना तय है कि देश की राजनीती, छात्र आंदोलन और कैबिनेट संभावनाओं
08:27का ये संगम आने वाल
08:39तो इस खबर में इतना ही, लेकिन क्या संभावनाओं होती है, पर नविस से जब अदल्ली पहुचते हैं, तो अमित
08:46शाह के साथ मीचिंग में क्या बाच्वीत निकल कर आती है, इसके अलावा जो तमाम नामों का हमने जिक्र किया,
08:52राज्य शिक्षा मंत्रियों का, या फिर
08:54रागाव चड्या का, इनके नाम पर क्या कोई आधिकारिक बयान आता है, या फिर विश्वस्निय सोर्स के द्वारा भी अगर
09:01हमें कुछ पुछ्टी मिलती है, तो वो भी आप तक हम पहुचाते रहेंगे, अगर कोई नया नाम आता है, नया
09:06चेहरा आता है शिक्षा मंत्री
09:07के लिए वो भी हम आपको पहुचाते रहेंगे, तब तक देश-दुनिया की तमाम खबरों के लिए देखते रहिए One
09:13India Hindi.
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