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  • 11 minutes ago
माया की योजना

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00:02नमस्कार, मैं श्वेता दिवारी आप सभी का अभिनन्दन करती हूँ, आईए आज आपको सुनाती हूँ राजस्थान पत्रिका के प्रधान संपादक,
00:11विद्या वाजस्पती गुलाब कोठाजी जी का परिवार में प्रकाशित आलेक, जिसका शीर्षक है माया की योजना.
00:30कोई भी व्यक्ती, दूसरे व्यक्ती के सामने समर्पन करना नहीं चाहेगा, घर के कामकाज में पती न बोले, जीवी को
00:39पारजन में पत्नी न बोले, अर्थात हस्तक्षेप न करे, यही समर्पन का रूप होता है.
00:45वर्तमान सामाजिक परिवेश में मानव व्यहवार अमर्यादित होता जा रहा है, नई पीड़ी संसकारों से दूर होती जा रही है,
00:54संसकारों का रास ही आज की सभी विसंगतियों का प्रमुक कारण है, आज कोई भी बांध कर, बंध कर नहीं
01:03जीना चाहता, सभी को अपनी स
01:05स्वतंत्रता चाहिए, स्वयम का शाशक बनना ही श्रेयसकर लगता है, किन्तो उससे उच्छिंखलता ही वर्ति लिखाई दे रही है, किसी
01:14भी युग में परिवर्तन लाने के लिए यह आवश्यक है कि बड़े इस्तर का देवासुर संगाम भी हो, बड़ी संख्या
01:22में पु
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