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Devshayani Ekadashi 2026: हर साल आषाढ़ एकादशी से चातुर्मास की शुरुआत होती है और मान्यता है कि भगवान विष्णु क्षीर सागर में सो जाते हैं। लेकिन क्या ईश्वर सच में नींद लेते हैं? इस वीडियो में जानिए इसके पीछे की पौराणिक कथा, 'योगनिद्रा' का गूढ़ दर्शन और इसके पीछे का छुपा वैज्ञानिक व व्यावहारिक कारण।

Devshayani Ekadashi 2026: Every year, Chaturmas begins with Devshayani Ekadashi, marking the cosmic slumber of Lord Vishnu in the Kshira Sagara. But does the Supreme Preserver actually sleep like humans? In this video, we explore the Puranic legends, the spiritual depth of 'Yoganidra', and the hidden scientific relevance behind this ancient Hindu tradition.

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Transcript
00:04हर साल असार महीने के शुकलपक्ष की एकादशी को हम देवशेने एकादशी मानते हैं और जैसे ही ये तिथी आती
00:10हैं घर के बड़े बजुर कहने लगते हैं कि अब चार महीने तक कोई भी शुपकाम नहीं होगा क्योंकि भगवान
00:15विश्णु छिर सागर में सोने चले गए ह
00:18लेकिन क्या आपने कभी सोचा है जो इश्वर पूरे ब्रह्मान को चलाता है जो स्रिस्टी का पाला नहार है क्या
00:23वो सच में चार महीने के लिए सोचाता है अगर पाला नहार ही सोचाए तो इस दुनिया का ख्याल कोन
00:29रखेगा किसके पीछे क्या है पुरानी कथा और क्या ह
00:46वर्दान मांगने को कहा, बली ने मांगा कि आप हर समय मेरे पाताल लोग के महल में रहें
00:51भगवाण विष्णूह बली के साथ पाताल चले गए, इससे माताल लक्ष में चिंतित हो गए
00:56उन्होंने राजा बली को राखी बांध कर भाई बनाया
01:00और उपहार में भगवान विष्णू को पाताल लोक से मुक्त करा लिया
01:04लेकिन अपने भक्त बली को दिये वचन का मान रखने के लिए
01:08विष्णू जी ने वर्दान दिया
01:09कि वो आसाड एकादशी से कार्थिक एकादशी तक पाताल लोक में निवास करेंगी
01:14इसी चार महिने की अबधी को हरी शेयर यानि भगवान विष्णू का शेयर अनकाल कहा जाता है
01:20उमीद करती हो आपको जानकारी पसंद आई होगी
01:22फिलाल हमारी इस वीडियो में इतना ही वीडियो को लाइक शेयर और चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूले
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