00:00मर्द की नफसियात को समझना एक काम्याब और पुर्सकून रिष्टे की बुनियाद होता है क्यूंकि मर्द और और ओरत दोनों
00:11जजबात रखते हुए भी उन्हें जाहिर करने और समझने के अंदाज में मुख्तलिफ होते हैं
00:19अकसर ऐसा होता है कि औरत अपने दिल की बात सिर्फ इजहार के लिए करती है वो चाहती है कि
00:28उसे सुना जाए समझा जाए और उसके एहसासात की कदर की जाए
00:34Jibkye mard jib baat karta hai,
00:37to uske pichhe ek maksad hota hai,
00:40wau aapni baat manwana chaahta hai,
00:43ya kisiy maslae ka hal nikalna chaahta hai.
00:47Yehi fark baz auqat,
00:49galat fahimiyo ko joanm dayta hai.
00:52Is liye zarauri hai,
00:54ke aurat mard se vayasahhi bertao karay,
00:58jaysa uski fitrat ke mutaabik ho,
01:01ना के अपने अंदाज को उस पर मुसलत करे।
01:06मर्द के लिए ये आसान नहीं होता
01:09कि वो एक नाखुश या मुसलसल शिकायत करने वाली औरत की बात को तहम्मुल से सुने।
01:17क्यूंकि वो खुद दिन भर जिन्दगी के मुख्तलिफ दबाओ,
01:22जिम्मेदारियों और मसायल से लड़कर आता है।
01:26ऐसे में अगर उसे घर में भी वही बोज महसूस हो,
01:31तो वो सुकून के बजाए मजीद परिशानी महसूस करता है।
01:36इसलिए दानिशमंदी इसी में है कि औरत अपनी नाराजगी या खफकी को इस तरहां पेश करे
01:44कि वो मर्द के लिए एक बोज ना बने, बलके वो खुद को इसका सहारा महसूस करे,
01:53ना कि उससे दूर होने का बहाना तलाश करे।
01:57कभी-कभी मर्द का खामोश हो जाना या तनहाई इक्तियार करना इस बात की अलामत नहीं होता
02:06कि वो मुहबबत नहीं करता या दिल्चस्पी खो चुका है, बलके ये उसकी फितरत का हिस्सा है।
02:15मर्द अक्सर अपने मसायल को खामोशी में हल करने की कोशिश करता है,
02:22वो वक्त लेकर सोचता है और खुद को संभालता है।
02:26ऐसे लमहात में उस पर सवालात की बारिश करना या उसकी खामोशी को घलत मतलब देना तालुक में फासले पैदा
02:36कर सकता है।
02:37बहतर यही है कि उसे इसकी जगह और वक्त दिया जाए ताके वो खुद अपनी मर्जी से बात करे।
02:47जब औरत अपनी परिशानी या मनफी जजबात का इजहार करे तो मर्द के लिए ये सुनना आसान होता है अगर
02:58उसे ये यकीन दिलाया जाए कि वो इस मसले का जिम्मेदार नहीं है।
03:04इससे मर्द दिफाई रवय्या इख्तियार नहीं करता बलके वो खिल कर सुनने और समझने की कोशिश करता है।
03:14मुश्किल वक्त में एक दूसरे को जजबाती सहारा देना ही असल रिष्टे की ताकत होती है ना के एक दूसरे
03:23पर इलजाम डालना।
03:25ये भी एक हकीकत है कि मर्द हमेशा खुद से बात शुरू नहीं करता खास दौर पर जजबाती मामलात में।
03:35इसलिए अगर औरत चाहती है कि कोई बात हल हो तो उसे मुनासिब वक्त देखकर खुद पहल करनी चाहिए।
03:46सही वक्त का इंतखाब आधी काम्याबी के बराबर होता है क्यूंकि जब मर्द जहनी तोर पर पुरसुकून होता है तो
03:58वो ज्यादा बेहतर तरीके से बात सुन और समझ सकता है।
04:03मर्द के नजदीक पैसा सिर्फ एक जरिया होता है जिसके जरिये वो अपनी जिम्मेदारियां पूरी करता है और मसायल हल
04:13करता है।
04:14वो अकसर अपने आप को इस बात से जोड लेता है कि वो कितना कमा रहा है और अपने घर
04:22को कितनी सहूलत ते पा रहा है।
04:25अगर उस पर हद से ज्यादा माली मुतालिबात किये जाएं तो वो खुद को नाकाम या बेबस महसूस कर सकता
04:36है।
04:36इसलिए जरूरी है कि घर के मामलात में तवाजन रखा जाए और एक ऐसा निजाम बनाया जाए जो दोनों के
04:46लिए आसान हो।
04:48मुसलसल मुतालिबात करना या जिद करना भी मर्द को जहनी दबाओं में डाल देता है।
04:56अगर उसे ये महसूस हो कि वो जितना भी करे काफी नहीं है तो वो आहिस्ता आहिस्ता दूर होने लगता
05:05है।
05:06एक समझदार औरत वो होती है जो अपनी खाहिशात को नर्मी और हिकमत के साथ पेश करे ताके मर्द खुद
05:17खुशी से उन्हें पूरा करना चाहे ना के मजबूरी में।
05:21मर्द औरत में सबसे ज्यादा इन खूबियों की कदर करता है जब वो उसकी गलतियों को माफ कर दे उसके
05:31साथ मुश्किल वक्त में खड़ी रहे और उसका साथ न छोड़े।
05:37मर्द भी अंदर से कमजोर हो सकता है उसे भी सहारा चाहिए होता है और जब वो तूटता है तो
05:47वो अल्ला के बाद सबसे ज्यादा अपनी शरीके हयात की तरफ देखता है अगर उसे वहां सुकून मिले तो वो
05:57दुनिया के हर मुश्किल का मुकाबला कर सकता है
06:00अकसर मर्द औरत के कुछ जुमलों को घलत अंदाज में ले लेता है जैसे अगर कहा जाए तुम देर से
06:10क्यूं आए तो वो उसे इलजाम समझता है या अगर कहा जाए जिन्दगी बोरिंग हो गई है तो वो उसे
06:20अपनी नाकामी समझ लेता है ये उसकी मनफी सोच नहीं बल
06:27की एक दिफाई रद्दे अमल होता है क्योंकि वो पहले ही जिन्दगी के दबाओं में होता है और हर बात
06:36को खुद से जोड लेता है इसलिए अलफाज के इंतखाब में नर्मी और समझदारी बहुत जरूरी है जब ही मर्द
06:47से किसी काम या मदद की दरखास्त करनी हो तो मु
06:56बहुत एहम होता है अगर उसे अचानक या सख्त अंदाज में कहा जाए तो वो दबाओं महसूस करता है लेकिन
07:06अगर मुहपत और तर्तीब के साथ बात की जाए तो वो खुशी से तावन करता है इसी तरहां अगर वो
07:15किसी बात पर नहीं कह दे तो उसे जाती अना का मसला ब
07:24कोशिश करनी चाहिए क्योंकि हर इनकार के पीछे कोई ना कोई मजबूरी या सूच होती है एक मजबूत रिष्टा वही
07:35होता है जहां दोनों एक दूसरे की फितरत को समझें एक दूसरे की कमजोरियों को कबूल करें और एक दूसरे
07:45के लिए सुकून का बाइस बनें जब �
07:48If women can understand the value of their own,
07:54then they are not only about the relationship,
07:57but also love also will be the same time.
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