00:00गर्मी से जुलस्ते रेगिस्तान में एक उंट धीरे धीरे चल रहा था। अचानक पीछे से गीदर आ गया और हाफते
00:06हुए बोला। भाई उंट मुझे भी अपने साथ ले चलो। धूप में मेरी हालत बहुत खराब है। उंट हसते हुए
00:12बोला। चल बैठ जाओ। लेकिन �
00:14रास्ता लंबा है। गीदर तुरंत उसकी पीट पर चड़ गया। कुछ देर चलने के बाद गीदर ने फुस फुसाते हुए
00:21कहा। सुन रहे हो आगे एक खजूर का बाग है। वहां मीठे खजूर गिर रहे हैं। उंट के मुँ में
00:27पानी भराया। वो तेज कदम बढ़ा
00:44दंडा उठा लिया। उंट घबरा कर भाग निकला। बाहर पहुचा तो गीदर आराम से बैठा हस रहा था। उंट ने
00:51गुस्से में कहा। ये क्या हरकत थी। गीदर हसते हुए बोला। दोस्त मैंने तुम्हें खजूर तो दिलवाए। बाकी सुरक्षा तुम्हारी
00:59जिम
01:06नहीं होता।
Comments