00:00I will train you things which you will make your life.
00:09Everyone is a son, son, who has a situation in a situation.
00:13First, I know this is a situation.
00:16What is the situation? I have a situation in my situation.
00:19You have a situation in my situation.
00:22Gaurakpur, BJP, Sansead and film, Abhineta, Ravikishan,
00:27परदे पर Abhinay और Sansead में लोगों की आवाज उठाने के साथ ही,
00:32अब छात्रों को जीवन का पाठ भी पढ़ा रहे हैं.
00:35दिन्दयाल उपाध्याय गोरकपूर विश्व विद्याले के ललित कला इवं संगीत विभाग में,
00:41प्रोफेसर और प्राक्टिस के तौर पर उन्होंने अपनी पहली क्लास ली, करीब एक घंटे के इस समवाद में,
00:47रavikishan ने संघर्ष से सफलता तक के अपने सफर, अनुशासन, अभिने की बारीकियों और देश सेवा के लिए
00:55राजनीती में आने के फैसले पर खुलकर बात की, गोरकपुर के दीन दयाल उपाध्याएक गोरकपुर विश्व विद्याले के ललित कला
01:04एवं संगीत विभाग में,
01:05सुबह 11 बजे से प्रोफेसर आफ प्राक्टिस राविकिशन की कलास थी, राविकिशन 15 मिनट पहले ही विभाग में पहुँच गए,
01:14लेक्चर के दौरान बिजली गुल हो गई, लेकिन राविकिशन ने अपना लेक्चर जारी रखा, उन्होंने माईक को एक तरफ रखा
01:22औ
01:24और अभिने की बारी किया सिखाना जारी रखा, प्रोफेसर आफ प्राक्टिस राविकिशन ने छात्रों को अपनी जिंदेगी का मकसर धूनने
01:32के लिए भी प्रेरित किया, अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि अंगिनत अपमान और रिजेक्शन
01:51का सामना की था, मैं लड़ता रहा है, अपने आप पर से विश्वास नहीं खोया है, पैसे तो थोई नहीं,
02:01पहचांग कोई नहीं थी मेरे पास, कोई Godfather नहीं था, किसी बड़े व्यक्ति को मैं नहीं जानता था, लेकिन ये
02:13एक वर्ड था कि मैं जान मौत नहीं मरुआ, मैं
02:15जनवाद हुमा सब को क्या आज, ओ, खोज में हम निकले, फिर मा की लेक साड़ी खरीदना था, मा को
02:24हम तेवार पे एक अच्छी साड़ी में देखना चाहते है, पिता की फटी भी धोती को मुझे बदलना था, उनकी
02:32तुटी भी साइकल को बदलना था, खेट जो गिर्वी �
02:35उसको छुड़वाना था, एक अच्छी जिंदगी मैं अपने परिवार को देना चाहते है, वो गुस्सा और जुनून और तिरसकार को
02:45मैंने अपना हदियार बनाया है, और आज आप लोंके समक्षिक प्रोफेसर के रूप में, एक सांसत के रूप में, भारत
02:54का सबसे बड�
02:55सुपरस्टार के रूप में, पुरे देश के हर भाशाओं में काम करके ओसकर तक हम पहुच गए, यह वहीं है।
03:26जिन्दगी के थपेडे मार बहुत खाई है मैंने, तब जाके कलाकार थोड़ा बन पाया हूँ, जो बना हूँ, मैं अपने
03:33गाउदेहाद के गरीब बच्चों को वो सारी सिख्षा देना चाता हूँ, अंगीनत रवी किशन मैं देखना चाता हूँ, इस धरती
03:40पर ना की मैं
03:54सांसत बने गरीबों की मदद करने के लिए, हमको ऐसी सिख्षा नहीं मिली थी, ना इसी इमारत मिली थी, ना
04:01गोरक पर युनिवरसिटी मिला था, अब यहां आके उन गरीब यहां गाउदेहाद के बच्चे आते हैं, सब गरीब बच्चे आते
04:07हैं, इन्नों को मिडिल क्लास
04:08पर मिली क्लास पईवार के, इन्नों को सिख्षा रवी किशन आके यहां पर दे, बच्चरते मैं शहर में किसी अमीर
04:16बच्चों को सिखाऊं, उससे अच्छा मैं अपने गरीब बच्चों को इस दिहाद के बच्चों को ट्रेंड करूं, इनमें भूक और
04:23ललक बहुत जादा
04:27संघर्ष से सफलता का अपना सफर साजा करते हुए प्रोफेसर आफ प्राक्टिस रवे किशन ने छात्रों को सिफ अभिने की
04:35बारी किया ही नहीं, बलकि जीवन जीने का नजरिया भी दिया, उनका कहना था कि अगर लक्ष असपस्थ हो, सोच
04:42सकारात्मक हो और संघर्ष जा
04:49कर छातर अपनी पहली कलास से बाहर निकले
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