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  • 5 hours ago
गोरखपुर से बीजेपी सांसद और फिल्म अभिनेता रवि किशन पर्दे पर अभिनय और संसद में लोगों की आवाज उठाने के साथ ही अब छात्रों को जीवन का पाठ भी पढ़ा रहे हैं। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के ललित कला एवं संगीत विभाग में प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के तौर पर उन्होंने अपनी पहली क्लास ली। करीब एक घंटे के इस संवाद में रवि किशन ने संघर्ष से सफलता तक के अपने सफर, अनुशासन, अभिनय की बारीकियों और देश सेवा के लिए राजनीति में आने के फैसले पर खुलकर बात की। गोरखपुर के दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के ललित कला एवं संगीत विभाग में सुबह 11 बजे से प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस रवि किशन की क्लास थी। अपने पहले लेक्चर के बाद रवि किशन ने कहा कि जीवन में अनगिनत संघर्ष और ठोकरें खाने के बाद उन्होंने जो कुछ सीखा और हासिल किया है, वही अनुभव अब वह गांव-देहात के गरीब बच्चों तक पहुंचाना चाहते हैं।

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Transcript
00:00I will train you things which you will make your life.
00:09Everyone is a son, son, who has a situation in a situation.
00:13First, I know this is a situation.
00:16What is the situation? I have a situation in my situation.
00:19You have a situation in my situation.
00:22Gaurakpur, BJP, Sansead and film, Abhineta, Ravikishan,
00:27परदे पर Abhinay और Sansead में लोगों की आवाज उठाने के साथ ही,
00:32अब छात्रों को जीवन का पाठ भी पढ़ा रहे हैं.
00:35दिन्दयाल उपाध्याय गोरकपूर विश्व विद्याले के ललित कला इवं संगीत विभाग में,
00:41प्रोफेसर और प्राक्टिस के तौर पर उन्होंने अपनी पहली क्लास ली, करीब एक घंटे के इस समवाद में,
00:47रavikishan ने संघर्ष से सफलता तक के अपने सफर, अनुशासन, अभिने की बारीकियों और देश सेवा के लिए
00:55राजनीती में आने के फैसले पर खुलकर बात की, गोरकपुर के दीन दयाल उपाध्याएक गोरकपुर विश्व विद्याले के ललित कला
01:04एवं संगीत विभाग में,
01:05सुबह 11 बजे से प्रोफेसर आफ प्राक्टिस राविकिशन की कलास थी, राविकिशन 15 मिनट पहले ही विभाग में पहुँच गए,
01:14लेक्चर के दौरान बिजली गुल हो गई, लेकिन राविकिशन ने अपना लेक्चर जारी रखा, उन्होंने माईक को एक तरफ रखा
01:22
01:24और अभिने की बारी किया सिखाना जारी रखा, प्रोफेसर आफ प्राक्टिस राविकिशन ने छात्रों को अपनी जिंदेगी का मकसर धूनने
01:32के लिए भी प्रेरित किया, अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि अंगिनत अपमान और रिजेक्शन
01:51का सामना की था, मैं लड़ता रहा है, अपने आप पर से विश्वास नहीं खोया है, पैसे तो थोई नहीं,
02:01पहचांग कोई नहीं थी मेरे पास, कोई Godfather नहीं था, किसी बड़े व्यक्ति को मैं नहीं जानता था, लेकिन ये
02:13एक वर्ड था कि मैं जान मौत नहीं मरुआ, मैं
02:15जनवाद हुमा सब को क्या आज, ओ, खोज में हम निकले, फिर मा की लेक साड़ी खरीदना था, मा को
02:24हम तेवार पे एक अच्छी साड़ी में देखना चाहते है, पिता की फटी भी धोती को मुझे बदलना था, उनकी
02:32तुटी भी साइकल को बदलना था, खेट जो गिर्वी �
02:35उसको छुड़वाना था, एक अच्छी जिंदगी मैं अपने परिवार को देना चाहते है, वो गुस्सा और जुनून और तिरसकार को
02:45मैंने अपना हदियार बनाया है, और आज आप लोंके समक्षिक प्रोफेसर के रूप में, एक सांसत के रूप में, भारत
02:54का सबसे बड�
02:55सुपरस्टार के रूप में, पुरे देश के हर भाशाओं में काम करके ओसकर तक हम पहुच गए, यह वहीं है।
03:26जिन्दगी के थपेडे मार बहुत खाई है मैंने, तब जाके कलाकार थोड़ा बन पाया हूँ, जो बना हूँ, मैं अपने
03:33गाउदेहाद के गरीब बच्चों को वो सारी सिख्षा देना चाता हूँ, अंगीनत रवी किशन मैं देखना चाता हूँ, इस धरती
03:40पर ना की मैं
03:54सांसत बने गरीबों की मदद करने के लिए, हमको ऐसी सिख्षा नहीं मिली थी, ना इसी इमारत मिली थी, ना
04:01गोरक पर युनिवरसिटी मिला था, अब यहां आके उन गरीब यहां गाउदेहाद के बच्चे आते हैं, सब गरीब बच्चे आते
04:07हैं, इन्नों को मिडिल क्लास
04:08पर मिली क्लास पईवार के, इन्नों को सिख्षा रवी किशन आके यहां पर दे, बच्चरते मैं शहर में किसी अमीर
04:16बच्चों को सिखाऊं, उससे अच्छा मैं अपने गरीब बच्चों को इस दिहाद के बच्चों को ट्रेंड करूं, इनमें भूक और
04:23ललक बहुत जादा
04:27संघर्ष से सफलता का अपना सफर साजा करते हुए प्रोफेसर आफ प्राक्टिस रवे किशन ने छात्रों को सिफ अभिने की
04:35बारी किया ही नहीं, बलकि जीवन जीने का नजरिया भी दिया, उनका कहना था कि अगर लक्ष असपस्थ हो, सोच
04:42सकारात्मक हो और संघर्ष जा
04:49कर छातर अपनी पहली कलास से बाहर निकले
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