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Breaking News: छत्तीसगढ़ की शान और महान पंडवानी गायिका तीजन बाई (Teejan Bai) का 70 वर्ष की आयु में रायपुर एम्स में निधन हो गया है। महाभारत की कथाओं को अपनी बुलंद आवाज और जीवंत अभिनय से वैश्विक पहचान दिलाने वाली तीजन बाई का जाना भारतीय संस्कृति के एक स्वर्णिम युग का अंत है।

Legendary Pandavani folk singer and Padma Vibhushan awardee Dr. Teejan Bai passed away at the age of 70 on July 5, 2026, at AIIMS Raipur after a prolonged illness. Born in Chhattisgarh's Durg district, she broke immense social barriers to bring the traditional storytelling form of Pandavani, based on the epic Mahabharata, to international prominence. PM Narendra Modi and Chhattisgarh CM Vishnu Deo Sai expressed their deep condolences on the demise of the iconic cultural ambassador.

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~PR.250~ED.348~GR.538~HT.178~VG.HM~

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00:0036 गड़ की महान पंडवानी गाई का तीजनबाई का सत्तर वर्ष की आयू में 5 छुलाई 2026 को राइंपूर एम्स
00:07में निधन हो गया
00:08महाभारत की कथाओं को अपनी बुलन दावास और जीवन तभिनए से अपनी वैश्विक पहचान दिलाने वाली तीजनबाई का जाना भारती
00:16लोग कला चकतकिल के एक अपून्य अक्षती है
00:19बायसरकार द्वारा पदमश्री और पदमवी भूशन से सम्मानेत सम्माहान कलाकार ने परंपरिक पंडवानी कलाकू अंतराश्ट्रय मंचों पर स्थापित किया था
00:29उनके निधन पर धानमंत्री नरेंद्रमोधी और चत्तीस कड़ के मुख्य मंत्री विश्णोदेव साय सहित देश के अन्या प्रमुख्वी भूतियों ने
00:36गहरा शूक व्यक्त करते हुए
00:37इसे भारतिय संस्कृति कोई और उसके कस्वर्णे में युग का अंत बताया बड़ी शती बताया
00:43तीजन भाई का जन 24 सेप्रिल 1956 को 36 गड़ के दुर्गजिले के एक साधारन से परिवार में हुआ
00:50उनके पिता हुनुक लाल पार्थी और माता सुखवती देवी थी
00:54बच्पन से ही तीजन भाई की रुचिक कला और लोक कताओं की तरफ थी
00:58उन्हें महाभारत की कहानियों के प्रती आकरशित करने का श्रय उनके नाना बिशलाल पार्थी कुझाता है
01:03जो उन्हें बच्पन से ही पौराने कताएं सुनाया करते थे
01:06इन कहानियों ने तीजन बाई के मन में इतनी गहरी चाप छोड़ी कि उन्होंने इसे ही अपने जीवन का मुख्या
01:12ध्याय बना लिया वो देश्या बना लिया।
01:36तमाम सामाजिक बंधनों और रूडियों को तोड़ते हुए अपनी कला को उचारी रखा। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं
01:43देखा और लगातार सफलता की सीन्या चड़ती गई। पर्णवानी चटीस गड़ की एक बेहत सम्रिद्ध और पारंप्रिक लो
02:03कार मानी जाती थी। इस विशिष्ट शैली में कलाकार अपने हाथ में एक तंबूरा लेकर खड़ा होता है और पूरे
02:10मंच पर घूम घूम कर अभिनय समवाद और गायन के जरिये महाभारत की शौरे गात्राओं को प्रस्तुत किया करता है।
02:17तीजन भाई के हाथ में तंब
02:33कलाकू देश के महानगरों से होते हुए अमेरिका, याराप और इश्या के कई देशों के बड़े अंतराश्रिय मंचों पर पहुचा
02:40दिया। उनके इस अद्वित्या योगदान के कारण ही भारसरकार ने उन्हें 1988 में पदमश्री और साल 2019 में देश के
02:48अत्यांतर प्रत्र�
02:53प्रिधानमंद्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने 36 गड़की संस्कृति को दुनिया भर
02:59में एक विशिष्ट पहचान दिलाई है जिसे हमेशा याद रखा जाएगा। मुक्यमंद्री विष्णो देव साय ने भी उन्हें
03:04श्रद्धानच्री देते हुए कहा तीजन भाई ने अपनी कला से राज्यकराम पूरी दुनिया में रौशन किया है उनका जाना लोग
03:11कला के लिए एक महान अध्याय का समापन है
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