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A viral train video has reignited the debate over civic sense in public spaces. An exhausted passenger, claiming he had not slept for nearly 24 hours, requested a bhajan group to lower the volume so he could rest. When the request was reportedly refused, he contacted Railway Helpline 139, after which the TTE and RPF intervened. The incident has triggered discussions on balancing religious expression with every passenger's right to a peaceful and comfortable journey. This report focuses on civic responsibility and public etiquette.

एक वायरल ट्रेन वीडियो ने सार्वजनिक स्थानों पर सिविक सेंस को लेकर नई बहस छेड़ दी है। दावा है कि करीब 24 घंटे से नहीं सोए एक यात्री ने कोच में भजन गा रहे लोगों से केवल आवाज़ कम करने का अनुरोध किया, ताकि वह आराम कर सके। अनुरोध नहीं माने जाने पर उसने रेलवे हेल्पलाइन 139 पर शिकायत की, जिसके बाद टीटीई और आरपीएफ ने हस्तक्षेप किया। यह वीडियो धर्म या आस्था पर नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्थानों पर दूसरों के अधिकारों, संवेदनशीलता और सिविक सेंस पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

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Transcript
00:22बारत में अक्सर कहा जाता है कि धरम सबसे उपर है
00:25लेकिन क्या धरम के नाम पर किसी दूसरे व्यक्ति की परिशानी को
00:29नजर अंदास किया जा सकता है
00:31क्या आस्ता का मतलब ये है कि सामने वाले के अधिकारों की कोई एहमियत ही ना रहे
00:36सोशल मीडिया पर वारल हो रहा ये वीडियो
00:38सिर्फ एक ट्रेन का नहीं बलकि हमारे सिविक सेंस का आयना बन गया है
00:44बताया जा रहा है कि ट्रेन में सफर कर रहा एक यूवक करीब 24 घंटे से सोया नहीं था। उसने
00:50कोच में भजन गा रहे हैं लोगों से सिरफ इतनी गुजारिश की कि अवाज थोड़ी कम कर दीजे ताकि वे
00:57कुछ देर अराम कर सके।
00:59लेकिन आरोप है कि उसकी बात सुनने के वज़ाए उसे जवाब मिला कि तो हम क्या करें हम ठीक कर
01:06रहे हैं जो कर रहे हैं। यही से सवाल सिरफ भजन का नहीं रह जाता सवाल बन जाता है सिविक
01:12सेंस का। अगर कोई ट्रेन में तेज अवास में गाने बजाए अगर कोई स्प
01:28की कीमत नहीं है। सारवजन एक जगों पर अजादी सब ही को है। लेकिन वे अजादी वहीं तक है जहां
01:35से दूसरे व्यक्ति की असुविदा शुरू नहीं हो। जब यूवक की बात नहीं सुनी गई तो उसकी रेलवे हेल्प लाइन
01:41139 पर शिकायत की। इसके बाद TTI और
01:45RPF मौके पर पहुचे और स्तीती को संभाला। इस घटना ने एक बार फिर वही पुराना सवाल खड़ा कर दिया
01:51है। क्या भारत में हमें कानून से पहले सिविक सेंस सीखने की जुरत है। क्योंकि आस्ता नीजी हो सकती है
01:58लेकिन ट्रेन, बस, मेट्रो और अस्पताल जैसे
02:00सारवजनिक स्थान सभी के हैं। वहां किसी की पूजा, किसी की बातचीत, किसी का संगीत या किसी की कोई गतिविदी
02:07दूसरे लोगों के अधिकारों पर हावी नहीं हो सकती। बहस भजन बनाम नेंद की नहीं है। बहस इस बात की
02:14है। क्या हम सारवजनिक जगों पर दूस
02:31हाँ, मैं अपने आप भगवान की बाद सही है, आप के आस्ता के लिए पूल रहा हूं है, पर कल
02:36रात से नहीं सोय है, इसलिए बोल रहा हूं बस
02:39मैं जैपुर में पर बात तो गलत है नो ये गलत है, आप आप आवास कर लो, शोर कर लो
02:51अरे अंटीची आप मेरे कुछ तो दया भाओ दिखाओ आप
02:59आपको लग रहा है आप सही कर रहे हुए
03:02सही कर रहे हुए आप शोर करके
03:04शोर कर रहे बद्लान का कि कर रहे
03:13अरे तो अंटीची आप अवास थोड़ी करोगे
03:16शोर थोड़ी करोगे आप
03:20तो क्यों आई की ट्रेन इसके लिए बनी है क्या
03:27अरे आपके अभी तो बेटे-बेटी होंगे
03:31मैं कल राज से नि सोया 24 गंटे होगे
03:33मुए सोय हुए
03:38आप चले जाओ ना अंटीच मैं कर रहे हुए
03:40मैं आपके घर के बाहर आके डीजे बजाओं कैसे लएगा आपको
03:44कैसे लएगा आपको
03:51क्यों कंप्लेंड कर सकता हुए अंटीच मैं आपको पता है
03:55कर दूं आ
03:57अगर दूं
03:57और दूं
03:59अगर वोली पर दूंग
04:05कि अज़े होगे
04:06के बिजाओं में अपने नियुक कर लो आपको
04:09किक राज सब्थार्शन में तुरल बला बले आपको
04:11कर ने स्थेसं में एपको
04:13फ्राय लोग नुटीच कि याबाद
04:15आपकर लुट है तो कर दो आपकर दोचा है?
04:20बस्ते सब्सक्तानी विए नब भी फ्लीजा है?
04:22आपकर अपकर दोच्तानी केख जिए अब भी आपकर अपकर अब करते है?
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