00:22बारत में अक्सर कहा जाता है कि धरम सबसे उपर है
00:25लेकिन क्या धरम के नाम पर किसी दूसरे व्यक्ति की परिशानी को
00:29नजर अंदास किया जा सकता है
00:31क्या आस्ता का मतलब ये है कि सामने वाले के अधिकारों की कोई एहमियत ही ना रहे
00:36सोशल मीडिया पर वारल हो रहा ये वीडियो
00:38सिर्फ एक ट्रेन का नहीं बलकि हमारे सिविक सेंस का आयना बन गया है
00:44बताया जा रहा है कि ट्रेन में सफर कर रहा एक यूवक करीब 24 घंटे से सोया नहीं था। उसने
00:50कोच में भजन गा रहे हैं लोगों से सिरफ इतनी गुजारिश की कि अवाज थोड़ी कम कर दीजे ताकि वे
00:57कुछ देर अराम कर सके।
00:59लेकिन आरोप है कि उसकी बात सुनने के वज़ाए उसे जवाब मिला कि तो हम क्या करें हम ठीक कर
01:06रहे हैं जो कर रहे हैं। यही से सवाल सिरफ भजन का नहीं रह जाता सवाल बन जाता है सिविक
01:12सेंस का। अगर कोई ट्रेन में तेज अवास में गाने बजाए अगर कोई स्प
01:28की कीमत नहीं है। सारवजन एक जगों पर अजादी सब ही को है। लेकिन वे अजादी वहीं तक है जहां
01:35से दूसरे व्यक्ति की असुविदा शुरू नहीं हो। जब यूवक की बात नहीं सुनी गई तो उसकी रेलवे हेल्प लाइन
01:41139 पर शिकायत की। इसके बाद TTI और
01:45RPF मौके पर पहुचे और स्तीती को संभाला। इस घटना ने एक बार फिर वही पुराना सवाल खड़ा कर दिया
01:51है। क्या भारत में हमें कानून से पहले सिविक सेंस सीखने की जुरत है। क्योंकि आस्ता नीजी हो सकती है
01:58लेकिन ट्रेन, बस, मेट्रो और अस्पताल जैसे
02:00सारवजनिक स्थान सभी के हैं। वहां किसी की पूजा, किसी की बातचीत, किसी का संगीत या किसी की कोई गतिविदी
02:07दूसरे लोगों के अधिकारों पर हावी नहीं हो सकती। बहस भजन बनाम नेंद की नहीं है। बहस इस बात की
02:14है। क्या हम सारवजनिक जगों पर दूस
02:31हाँ, मैं अपने आप भगवान की बाद सही है, आप के आस्ता के लिए पूल रहा हूं है, पर कल
02:36रात से नहीं सोय है, इसलिए बोल रहा हूं बस
02:39मैं जैपुर में पर बात तो गलत है नो ये गलत है, आप आप आवास कर लो, शोर कर लो
02:51अरे अंटीची आप मेरे कुछ तो दया भाओ दिखाओ आप
02:59आपको लग रहा है आप सही कर रहे हुए
03:02सही कर रहे हुए आप शोर करके
03:04शोर कर रहे बद्लान का कि कर रहे
03:13अरे तो अंटीची आप अवास थोड़ी करोगे
03:16शोर थोड़ी करोगे आप
03:20तो क्यों आई की ट्रेन इसके लिए बनी है क्या
03:27अरे आपके अभी तो बेटे-बेटी होंगे
03:31मैं कल राज से नि सोया 24 गंटे होगे
03:33मुए सोय हुए
03:38आप चले जाओ ना अंटीच मैं कर रहे हुए
03:40मैं आपके घर के बाहर आके डीजे बजाओं कैसे लएगा आपको
03:44कैसे लएगा आपको
03:51क्यों कंप्लेंड कर सकता हुए अंटीच मैं आपको पता है
03:55कर दूं आ
03:57अगर दूं
03:57और दूं
03:59अगर वोली पर दूंग
04:05कि अज़े होगे
04:06के बिजाओं में अपने नियुक कर लो आपको
04:09किक राज सब्थार्शन में तुरल बला बले आपको
04:11कर ने स्थेसं में एपको
04:13फ्राय लोग नुटीच कि याबाद
04:15आपकर लुट है तो कर दो आपकर दोचा है?
04:20बस्ते सब्सक्तानी विए नब भी फ्लीजा है?
04:22आपकर अपकर दोच्तानी केख जिए अब भी आपकर अपकर अब करते है?
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