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00:00ऐसे येद में पूछा था
00:01राम को इतनी भी अगल नहीं थी कि सोने का मिरग नहीं होता
00:06सीता ने बोला मेरे लिए सोने मरुग लेकर आओ
00:09और वो तीर बांद के चल दिये कि हम सोने का मिरग मारने गार रहे
00:13राम को नहीं पता था कि सोने का मिरग नहीं होता
00:16निराम को नहीं पता, तुम्हें तो पता है न?
00:21तुम का है बीगी के दाई पर चल देते हो, फ्रिज लाने?
00:25तुम्हें नहीं पता के फ्रिज से दिमाग नहीं ठंडा होता?
00:29इस तरीके के तुम सवाल पूछते हो, मैं बिलकूँ, अवाक रह जाता हूँ, क्या बोलूं क्या?
00:35हरुमान को समझ में नहीं आता था, कि बूटी कहां पर उन्हें उठाना ही था, तो बीजी बैद को पहले
00:41ही उठा के ले जाते हैं, वो वहाँ पर पहले ही छानवीन करके बता देता, कि बेटा ये रही संधीवनी,
00:49मेरे पास कोई जवाब नहीं था, तुम ये नहीं देखते
00:53कि तुम कैसे, तुम पचास तरीके के आदर्श संतों और मनीशियों और अवतारों पर थोप देना चाहते हैं, और जानते
01:01हो तुमारी मन्शा ये है, कि बस जाहिर हो जाए, कि संतों ने भी गल्तियां किये, अवतारों से भी चूख
01:08होती है, और अगर उनसे चूख होती है,
01:10उन्होंने गल्तियां किये तो फिर हमें तो गल्तियां करने का हग मिल गया ना
01:15निकालो रहे समोसा
01:18राम के विशे में जानते हो क्या कहते हैं तुलसी
01:22पग के बिना चलते हैं और कान के बिना सुनते हैं
01:26वो है तुलसी के आरात
01:29सुना ही बिनु काना
01:31तो बताओ किस राम की बात कर रहे है तुलसी
01:34निराकार की बात कर रहे है न
01:35तुम्हें ये विवेक आना चाहिए
01:37कि तुम राम को जब सशरीर भी देखो
01:40तो देखो तुम निराकार राम को ही
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