00:00अचार जी मेरे ये सवाल है कि ये मन क्या होता है? मारा मन इतना चंचल क्यों होता है? ये
00:07एक जगा लगता क्यों नहीं है?
00:08बेटा मन में जो होता है वही मन होता है तो मन में अगर दिवाल है तो मन क्या है?
00:14दिवाल है
00:15मन में अगर पैसा है तो मन में, तो मन क्या है, पैसा है, मन की सामगरी ही मन है,
00:21तो मन अपने आप में कुछ नहीं होता है, जो आप डाल दोगे, वही मन है, और डालने वाला कौन
00:27होता है, वो हम है, मन में क्या होगा, उसका फैसला हमीं करते हैं, तो इसलिए मन में जो भी
00:32लाए
00:33वो थोड़ा साउधानी से लाएं ठीक है और क्या पूछा था मन क्या होता उसके बाद क्या बोला था कि
00:42मारा मनी तो चंचल क्यों होता है
00:44मन चंचल नहीं होता आप मन में कोई चीज डाल रहे हो ताकि आपको उससे पीस मिले शांती मिले
00:53मन है अब समझे लो मन आपका एक घड़ा है आप मन में कोई चीज डालते हो ताकि आपको शांती
00:59मिले ठीक है
01:00शांति मिलती नहीं क्योंकि हमें पता ही नहीं है बीकार निकली है
01:20मन 주सरी चीज लेके आ हो भी बेकार निकली थी तीसरी चीज लेके आ हो यह मेरी चंचलता है
01:25प्योंग
01:26प्योंग
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