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यह वीडियो 22 मार्च 2026 को आयोजित "भगवद गीता" सत्र के बाद हुए अवलोकन से लिया गया है।
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Transcript
00:00आपको सुनने से पहले मैं बिल्कुल ऐसी ही थी कि बस ग्लैमरस दिखना और ये लगा लो वो लगा लो
00:07पोत के चहरा मतलब कोई मेरे सामने भी ऐसे आता था सिंपल तो इसको तो बाहर आने की तमीज नहीं
00:14है इसके घर में कोई पैसा कुछ तो होगा कि एक बिंदी लिप्ष्
00:29को सजाने की तरफ ध्यान देते हैं कुछ अच्छी खूबिया भी होती होंगी पर उनकी उदर इतना ध्यान ही नहीं
00:36देते कि इनको और कैसे निखा रहे सर इतना ज्यादा हम लोगों को कंडिशन किया जाता है कि जैसे हमें
00:42मॉडल है हम वह इनसान नहीं हमें एक मॉडल की त
00:58आजर से देखने लग जाते हैं कि वो भी ऐसा ही हो मैं खुद ऐसी ही हूँ थी मतलब अब
01:05मुझे इतनी शरम आती है
01:09और मुझे आपके पास आके प्रकिर्तिक दिखना कैसे उसमें क्या असली सुन्दरता है
01:16सर मतलब एक ट्रास्फोर्मेशन आपके यहां आके अगर शुरू हुआ है तो मैं इसका सारा श्रे आपको देना चाहूंगी
01:23आपने मुझे कब देखना शुरू करा था अभी आठ नौ महीं नहीं हुआ है
01:34दो-चार साल पहले मैं जासा देखता था मुझे देख लेती तुम्झे देखना ही नहीं शुरू करती है
01:40सर बिल्कुल सही
01:48मुझे तो पकड़ पकड़ के मेरा ट्रास्फोर्मेशन कराया जा रहा है
01:53कि कर लो नहीं कोई नहीं देखेगा तुम्हें
01:57सर आपने एक लाइन बोली थी इनसान का चहरा बरदाश नहीं होता क्या
02:01सर ये लाइन ने जादू कर दिया सर
02:04थैंक्यू सर
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