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  • 6 minutes ago
हमीरपुर: जहां अधिकांश लोग सेवानिवृत्ति के बाद आरामदायक जीवन बिताना पसंद करते हैं, वहीं कांगड़ा जिले के गंदड़ गांव के 75 वर्षीय डॉ. मिल्खी राम ने यह साबित कर दिया है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती. अब तक 32 डिग्रियां हासिल कर चुके डॉ. मिल्खी राम ने एक और उपलब्धि जोड़ने का संकल्प लिया है. 75 वर्षीय मिल्खी राम इग्नू सेंटर हमीरपुर में आचार्य की पढ़ाई के लिए पहुंचे हैं. डॉ. मिल्खी राम वर्ष 1972 में वन विभाग में भर्ती हुए थे और 2010 में ग्रेड-वन पद से सेवानिवृत्त हुए. नौकरी के साथ-साथ उन्होंने अपनी पढ़ाई भी लगातार जारी रखी. सेवानिवृत्ति तक वे 26 डिग्रियां प्राप्त कर चुके थे और अब यह संख्या बढ़कर 32 हो चुकी है.मिल्खी राम ने बीए प्रभाकर, बीएड, एलएलबी, जेएमसी, संस्कृत, एमए हिंदी, एमए राजनीति विज्ञान, एमए समाजशास्त्र, एमए इतिहास, एमए अंग्रेजी, एमए अर्थशास्त्र, एमबीए, एम.फिल. और हिंदी में पीएचडी सहित अनेक उच्च शिक्षाएं प्राप्त की हैं. अब उनका अगला लक्ष्य आचार्य की डिग्री हासिल करना है. डॉ. मिल्खी राम का मानना है कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवनभर सीखते रहने की प्रक्रिया है. उनका कहना है कि यदि सीखने का जज्बा हो तो उम्र कभी भी बाधा नहीं बनती. उनके परिवार ने भी शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है. उनकी पत्नी विद्या देवी भी वन विभाग से ग्रेड-वन पद से सेवानिवृत्त हुई हैं, जबकि उनके पुत्र राकेश कुमार भारतीय रेल में आईआरटीएस अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं.

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00:08पोते पोतियों की उम्र के बच्चों के साथ परिक्षा देने पहुंचे 75 साल के मिल्खी राम
00:14हाथ में एड्मिट काट, सिर पर सफेद बाल, आखों पर चश्मा, चेहरे पर जुर्या आ गई है
00:22लेकिन पढ़ाई का जुनून आज भी बरकरार है
00:26जैसे ही मिल्खी राम हमीरपूर के इग्णू एक्जाम सेंटर में आचारी की परिक्षा देने पहुंचे
00:32तो हॉल में मौजूद छात्र भी दादा की उम्र के शक्स को परिक्षा देते देख हैरान रह गए
00:40इनकी डिग्रियों की लिस्ट इतनी लंबी है कि गिंते गिंते ठक जाएंगे
00:44इनके पास एक, दो या तीन नहीं पूरी 32 डिग्रिया है
00:49इने मिली डिग्रियों को तराजों में दोला जाए तो लगभग 2 खिलो वजन होगा
00:55इसमें में से लेकर PhD तक की डिग्रिया है
01:13अब बात करें आपके परिवार में कौन-कौन है उसके वरता है
01:32दस फरवरी 1952 को कांगडा जिले के गंदर गाओं में जन्में
01:36डॉक्टर मिल्खी राम ने साल 1976 में धर्मशाला के एक नीजी कॉलेज से सनातक की डिग्रिया हासिल की
01:44हाला कि उन्होंने 1972 में ही वन्विभाग में नौकरी शुरू कर दी थी
01:50पारिवारिक जिम्मिदारियों के बीच भी उन्होंने अपनी पढ़ाई कभी नहीं छोडी
01:56साल 2010 में ग्रेड वन पत से रिटायर होने तक मिल्खी राम 26 डिग्रिया हासिल कर चुके थे
02:03जबकि अभी आकडा बढ़कर 32 तक पहुँच चुका है 32 डिग्रियों के बाद भी मंजिल अभी बाकी है इसलिए इस
02:14बार आचारी के परिक्षा देने पहुँचे
02:35डॉक्टर मिल्खी राम की सैक्षनिक उपलब्धियों के सूची किसी यूनिवर्सिटी से कम नहीं है
02:41उन्होंने BA, BA, LLB, पत्रकारिता, संस्कृत, MA हिंदी, MA राजनीती शास्त्र, समाज शास्त्र, इतिहास, अंग्रेजी, अर्थ शास्त्र, MBA, M.Phil
02:54और हिंदी में PhD सहित कई डिग्रियां हासिल की है
02:58स्कूली सिक्षा के बाद भले ही स्कूल छूट गया
03:01लेकिन पढ़ाई से न नाता तूटा और न लगन कम हुई
03:06वो सिक्षा को जीवन की कठनाईयों से लडने का ब्रह्मा स्त्र मानते है
03:28मिल्खी राम की उम्र में लोग अपने दवाईयों का टाइम टेबल संभालते है
03:32या रिटार्मेंट का आनन ले रहे होते है
03:35लेकिन मिल्खी राम एक अलग शक्सियत है
03:39उनके हातों से 75 साल की उम्र में भी किताब और कलम नहीं छूटी
03:44मिल्खी राम शायद हिमाचल के सबसे पड़े लिखे शक्स होंगे
03:4932 डिग्रिया कागस पर लिखी जा सकती है
03:52लेकिन सीखने का जुनून किसी डिग्री से नहीं मापा जा सकता
03:57शायद यही डॉक्टर मिल्खी राम की सबसे बड़ी उपलब्थी है
04:0275 साल की उम्र में मिल्खी राम ने सिर्फ एक और परिक्षन ही दी
04:07बलकि ये भी बता दिया कि अगर सीखने की भूग जिन्दा हो तो उम्र कभी आड़े नहीं आती
04:15हमीरपुर से समित राठोर की रिपोर्ट
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