00:00मैं एक साल से बुक्स टॉल्स में मतलब अक्टिवली पार्टिसिपेट कर रहा हूं तो काफी ऐसे लोग आते हैं कि
00:07बोलते हैं कि ओपनी शद हैं भगवत गीता है अश्टावक्र गीता है तो इनके बुक्स के जरीए आप अपनी ही
00:14बाते सामने रख रहे हैं और इनका हो सकता
00:18है पर उन्हें कैसे पता है दो बातों के बारे में तुलनातमक बात करने के लिए आपको दोनों बाते पता
00:26होनी चाहिए तो जिसने भी बात बोली इसको किसी ऐसी कुरसी पर बठाओ जिसे तुम्हें पहले फिवी कॉल लगा रखाओ
00:31भागने न पाए उसके बात बोलो कि त
00:55कि बताओगे उपनिशदों की तो चलो बताओ कितने उपनिशद पढ़ें उसमें क्या-क्या लेखा उसकी सेंटरल फिलोसफिक है बताओ
01:06असल में एक धारा चल रही है जो कहना चाहती है कि जितने भी पुरानी किताबे हैं विशेशकर हिंदूओं की
01:15सबको एक साथ जला दो
01:16अब उनके लिए बड़े पेटदर्द का कारण हो गया है कि मैं उनको दिखा रहा हूँ कि पुरानी किताबे दो
01:23तरह की होती है शुति और सुमृति
01:24और शुति का आधार
01:27प्योर फिलोसफी है
01:28शुति में दर्शन है
01:30मैं उनको समझाना चाह रहा हूँ
01:31उनको समस्या आ रही है क्योंकि
01:33उन्होंने एक बहुत
01:35comfortable narrative सेट कर दिया था
01:37क्या उनकी परेशानी उनकी खुंदक
01:39मुझसे बाद में है
01:41उन्हें समस्या है
01:43गीता से
01:43मुझसे वो इसलिए जड़ते हैं क्योंकि
01:46मैं दिखा रहा हूँ कि गीता में
01:47philosophy है
01:49कि वेदान्त
01:51टॉप बात करता है
01:53जिसे कोई भी serious philosopher
01:55बहुत इज़त देगा
01:56अब ये बात उनको बहुत चुप रही है
01:59तो अब वो एक नया narrative
02:01चला रहे है
02:03गीता उपनिशत तो सब बेकार है
02:06आचारी जी अपनी personal अच्छी अच्छी बाते ले आकर गे
02:09गीता के ऊपर थोप रहे है
02:10गीता बुरी है
02:11आचारी जी अच्छे है
02:12और आचारी जी अपनी personal innovative बाते
02:15अपनी personal philosophy लाकर
02:17गीता के नाम पर बेच रहे हैं
02:19गीता में कुछ नहीं रखा गीता बेकार है
02:21यह चल रहा है
02:22मैं गुरू नहीं हूँ
02:24मैं आपके सामने एक दर्शन शास्त्र का अध्यापक हूँ
02:28मुझे पर अगर कोई
02:31इल्जाम लगाए भी तो वो कौन होना चाहिए
02:33दर्शन शास्त्र का ही कोई अध्यापक होना चाहिए
02:36कम से कम विद्ध्यार थी
02:38तू कौन है
02:39पीछे तेरी वहाँ केले मुमफली बेचने की दुकान थी
02:43वहाँ से तू आ करके
02:45फिलोसोफिकल एक्यूजेशन लगा रहा है
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