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Transcript
00:06अब बाज़ायब तूरी
00:30कोई बहुत पुरानी इमारत हो सकती है
00:32और वहाँ पर हम जाकर के
00:34खुरेद का राजाते हैं
00:35पिंकी लव्ज मोनू
00:37राजे पारियों गयरा कि बसे होती हैं
00:39लोग पैन लेके सामने की पहले सीट आड़ देंगे
00:41और उसे उंगली डाल डाल के उसको नोच रहे हैं
00:43रेलवे में बैठे हुए हुए मुंपली के छिलके फैला दिये
00:45यह आदमी गंदा है
00:47इसका विष्टा गरीबी से नहीं है
00:49अत्मा आत्यंतिक निजता का नाम है
00:52हमारी रहने ही नहीं दी जाती
00:54कौन सा आत्मसम्मान बचा और जब हमें हर तरफ से
00:58गंदगी गंदी मिल रही है
00:59हर कोई हक रख के बैठा है कि आएगा
01:01और हमारी जिंदगी पर थूप के चला जाएगा
01:03तो फिर हम भी सण को पर थूपते हैं
01:05हम अपनी नदियों गंदा करते हैं
01:08क्यों कि निजता जैसी तो कुई बात होते ही नहीं न
01:11कुछ भी होता रहा है हमें हमें बरदाश्ट हो जाता है हम जेल लेते हैं और इसको हम कह देते
01:15हैं कि हम तो बड़े सहिश्रों हैं संतोशी हैं ना सहिश्रों है ना संतोशी हैं
01:19कैसे बन सकते हैं कुछ बहतर सबसे पहले तो कुछ ऐसा थोड़ा बहुत ही सही आंशिक ही सही पाईए तो
01:26पूरी तरह अपना है फिर उसकी रक्षा में आप जीजान लगा दोगे जो सचोच अपना होता है ना इंसान उस
01:32पर इसी को थूकने नहीं देता है
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