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ईरान के नए सुप्रीम लीडर अयातुल्ला सैयद मोजतबा खामेनेई ने पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आधिकारिक संदेश भेजा है। वहीं, पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में पीएम मोदी को औपचारिक निमंत्रण भी दिया गया है। ऐसे में भारत के सामने ईरान, अमेरिका, इज़राइल और खाड़ी देशों के बीच कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। इस वीडियो में जानिए इस पूरे घटनाक्रम का राजनीतिक और रणनीतिक विश्लेषण।

Iran's new Supreme Leader has sent his first official message to Indian Prime Minister Narendra Modi, thanking him for Eid-ul-Adha greetings and expressing hope for stronger India-Iran ties. At the same time, PM Modi has been invited to the state funeral of former Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei, creating a major diplomatic balancing act for India amid its relations with Iran, the US, Israel and Gulf nations.

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00:00क्या सिरफ एक चिट्थी दुनिया की राजनिती बदल सकती है?
00:03क्या एरान ने ऐसा दाव चल दिया है जिसने भारत को सबसे मुश्किल खुटनितिक मोड पर लाकर खराकर दिया है?
00:10आखिर क्यों नई सुप्रीम लीडर ने सबसे पहले प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को खास संदेश भेजा?
00:16और क्यों दोस्ती का पेगाम आने के कुछ ही दिनों बाद पीएम मोदी को अंतिम संसकार का नियोता भेज दिया
00:23गया?
00:24क्या भारत इरान का साथ देगा या फिर अमेरिका, इस्राइल और खाड़ी देशों के साथ अपना संतूलन बनाए रखेगा?
00:31और सबसे बड़ा सवाल अगर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी इरान नहीं जाएंगे तो दुनिया भारत के इस फैसले को कैसे
00:39देखेगी?
00:54कुछ ही समय बाद उन्होंने ऐसा कदम उठाया है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी और खीच लिया है.
00:59मौश्तवक हमेनी ने पहली बार भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को आधिकारिक संदेश भीजा है.
01:05पहली नदर में ये सिरफ एक धन्यवाद संदेश लगता है, लेकिन विदेशनिती के जानकार इसे एक बड़े राजनितिक और कुछ
01:12नितिक संकेत के तौर पर देख रहे हैं.
01:14दरसल प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने ईदुल अजा के मौके पर इरान के नए सुप्रीम लीडर को शुप कामनाई वेजी
01:21थी.
01:21इसके जवाब में मौश्टबा खामीनी ने लिखा कि उन्हें प्रधान मंत्री मोदी का संदेश मिला और उसके लेवे तैय दिल
01:30से शुक्र गुजार हैं.
01:31लेकिन इसके बाद उन्होंने जो लिखा उसने इस पूरे संदेश को और जादा महत्वपूर बना दिया.
01:36उन्होंने कहा कि भारत और इरान की अतिहासिक दोस्ती आपसी समान और साजा हितों पर अधारित है.
01:42और उन्हें पूरा विश्वास है कि दोनों सरकारे मिलकर इस रिष्टे को आने वाले समाए में और मजबूत करेंगी.
01:48यानि ये सिरफ अपचारिक धन्यवाद नहीं, बलकि भारत के साथ संबंदों को आगे बढ़ाने का पहला सारवजनिक संदेश भी माना
01:56जा रहा है.
01:57लेकिन कहानी हैं खतम नहीं होती, इसी बीचे रान ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोधी को एक और विशेश निमंत्रन भेच
02:04दिया.
02:04यह निमंत्रन था पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्ला लिखामेनी के राज के अंतिम संसकार में शामिल होने का.
02:11यहीं से भारत के सामने एक बड़ी खुटनितिक चुनौती खड़ी हो गई.
02:15क्योंकि आज की दुनिया में एक तरफ अमेरिका और इस्राइल है तो दूसरी तरफ इरान.
02:20भारत के रिष्टे दोनों पक्षों के साथ बेहत महत्वपूर्ण है.
02:23ऐसे में कोई भी फैसला सिरफ एक यात्रा का नहीं, बलकि पूरी विदेश निती का संदेश माना जाएगा.
02:29अब सबसे वड़ा सवाल यही है क्या प्रधान मंत्री नरींद्र मोदी इरान जाएंगे?
02:34फिलाल जो जानकारी सामने आई है, उसके मताबिक प्रधान मंत्री नरींद्र मोदी के इरान जानली की संभावना बेहधी कम है.
02:41क्योंकि उसी दोरान उनकी इंडोनेशिया, न्यूजिलन्ड और उस्चेलिया की पहले से ही विदेश यात्रा तय है.
02:47हाला कि भारत पूरी तरह अनुपस्तिक भी नहीं रहेगा, जानकारी के अनुसार भारत की ओर से एक उच्छतर्य प्रतिनिद्धी मंडल
02:55भेजा जाएगा.
02:56जिसमें बिहार के राज्यपाल सैयर, अता हसनैन और विदेश राज्यमंत्री पबित्रा मार्गरिटा भी शामिल होने की संभावना जताई जा रही
03:05है.
03:05यानि प्रधान मंत्री नहीं जाएंगे लेकिन भारत अपनी मौझूद की जरूर दर्च करेगा.
03:10अब सवाल उट रहा है कि इस फैसले को लेकर इतनी साफधानी क्यों बढ़ती जा रही है?
03:14इसके सबसे बड़ी वज़ा है भारत की संतूलत विदेश निती.
03:18एक तरफ अमेरिका भारत का रणनिती साजेधार है, तो इसराइल भारत का बड़ा रक्षा सयोगी.
03:24वही दूसरी तरफ इरान भारत के लिए उट्जा सुरक्षा पश्चे मेशिया में रणनितिक संतूलन और सबसे एहम चाभार बंदरगा जैसे
03:32परियोजनाओं के लिए बेहत महत्वपून देश है.
03:35चाभार बंदरगा भारत के लिए सिरफ एक कोट नहीं.
03:38यह वे परियोजना है जो भारत को पाकिस्तान को बाइपास करते हुए सीधे अफगानिस्तान और मद्देशिया तक पहुचने का रास्ता
03:46देती है.
03:47इसलिए भारत इरान के साथ अपने संबंदों को कमजोर नहीं करना चाता.
03:51लेकिन अगर भारत इरान की तरफ बहुत जादा जुखाओ दिखाता है, तो अमेरिक और इस्राइल की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर होगी.
03:57यही वज़ा है कि नई दिल्ली हर कदम बहुत सोच समझ कर उठा रही.
04:01दिल्चस्प बात यह है कि भारत पहले भी ऐसी परस्तितियों का सामना कर चुका है.
04:05जब इरानी राष्ट्रपती इब्राहिम रईसा का निधन हुआ था, तब भी प्रधान मंसी नरेंद्र मोधी अंतिम संस्कार में शामल नहीं
04:13हुए थे.
04:13उस समय भारत के ओर से ततकालीन उपराष्ट्रपती जगतीप धनकर ने प्रतिनिधित्व किया था.
04:19यानि भारत पहले भी सम्मान और अनितिक संतुलन दोनों को साथ लेकर चलता आ रहा है.
04:24अब पूरी दुनिया की नज़र चार जुलाई से शुरू होने वाले अंतिम संस्कार के कारे क्रम पर टिकी हुई है.
04:30हर कोई ये देखना चाता है कि भारत के स्तर का प्रतिनिधित्व करता है.
04:35क्या इससे भारत और इरान के रिष्टों में नया अध्याय शुरू होगा?
04:38क्या चाभार परियोजना को नई गटी मिलेगी?
04:41और क्या अमेरिका तथा इस्राइल भारत के इस फैसले को सहचता मिलेंगे?
04:45इन सबी सवालों के जवाब आने वाले दिनों में सामने आएंगे,
04:49फिलाल इतना तो तय है कि नई सुप्रीम लीडर की पहली चथी प्रदान मंतरी को भेजा नया दोस्ती का संदेश
04:55और अंतिम संसकार का विशेश निमंतरन सिरफ अपचारिक घटना है नहीं.
04:59इन्होंने पश्चे मेश्या की बदलती राजनिती और भारत की बड़ती वैश्विक भूमिका को बड़ संकेत के तौर पर देखा जा
05:06सकता है.
05:06अब देखना होगा कि भारत अपनी संतुलित विदेश निती को किस तरह आगे बढ़ाता है और दुनिया को क्या संदेश
05:13देता है.
05:13आपकी इस पर क्या राय है? क्या प्रधान मंतरी नरेंदर मोधी को खुदर आन जाना चाहिए?
05:18या फिर प्रती निदी मंदल भेजना ही सबसे सही फैस्ता है.
05:22अपनी राय हमें कमेंट सेक्षिन में जरूर बताए.
05:24अगर आपको ये वीडियो पसंद आई, तो इस वीडियो को लाइक करें, शेयर करें और One India Hindi को सब्स्राइब
05:29करना न भूले.
05:30आप देख रहे हैं One India Hindi.

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