00:00कभी बर्ष से ढखे पहाडों के बीच खड़ा एक शिक्षक जिसने बच्चों को नई शिक्षा दी
00:04पर्यावन बचाने की लड़ाई लड़ी और पूरे देश में
00:08फ्री इडियेट्स वाले फुनसुक वांग्रों की असली प्रेणा के रूप में भी पहचान बनाई
00:13फिर वही शक्स लड़ाख की पहचान बचाने के लिए सड़क पर उत्रा
00:17हाथ में तिरंगा था, जुबान पर संविधान था और हत्यार था अहिंसक अंशन
00:23लेकिन आज तस्वीर बदल चुकी है
00:25अब सोनम वांग्चुक दिल्ली के जंतर मंतर पर बैठे हैं
00:29इस बार लद्धाख के बैनर तले नहीं बलकि कौकरुजंता पार्टी यानि की सीजेपी के मंच पर
00:34उन्होंने फिर से भूख हर्ताल का एलान किया है
00:36वेज़े बताई जार ये पर्यावरन की रक्षा और सीजेपी के आंदोलन को समर्थन
00:41यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होने लगा है
00:44क्या ये वही सोनम वाग चुक हैं जिन्होंने कभी कहा था कि उनका आंदोलन राजनीती से उपर है
00:49क्या लद्धाख की लड़ाई अब राष्ट्य राजनीती का हिस्सा बन चुकी है
00:53क्या एक पर्यावरन कारेकरता धीरी धीरी राजनीती का आंदोलन का चेहरा बनता जा रहा है
00:59और सबसे एहन सवाल
01:012019 में शुरू हुआ लद्धाख का आंदोलन आखिर जंतर मंतर तक कैसे पहुँच गया
01:06एक शिक्षक से आंदोलन कारी और अब एक राजनीतिक मंच पर बैठने तक की पूरी कहानी क्या है
01:12नमस्कार मैं हुरी चाप राष्टर और आप देख रहे हैं वरेंडिया हिंगी
01:20आज हम सिर्फ ये नहीं बताएंगे कि सोनम वांचुक आज क्या कर रहे हैं
01:25बलकि समझेंगे कि पिछले साथ वर्षों में उनका आंदोलन किन किन पड़ाओं से गुजरा
01:30कैसे उनकी मांगे बदली, सरकार का रुख क्या रहा, उन पर कौन-कौन से आरोप लगे
01:35और क्यू आज उनका नाम फिर से देश की राजवीती के केंदर में आ गया है
01:39इन सवालों का जवाब समझने के लिए हमें साथ साल पीशे लोटना होगा
01:42साल 2019 में
01:44पांच अगस 2019 जब केदर सरकार ने अनुछे 370 को समाप किया
01:49और जमू कश्मीर का उनर गठिन करते हुए लद्दाख को अलग केंदर शासित प्रदेश बना दिया
01:54तेश के कई हिस्सों में इस फैसले का स्वागत हुआ
01:57लद्दाख में भी शुरुआत में लोगों ने इसे कहती हासिक अवसर माना
02:00लोगों को लगा कि अब दिल्नी से सीधा विकास होगा
02:03तुशासन तेज होगा और छेतर को नई पहचान मिलेगी
02:07लेकिन कुछी महीनों बाद तस्वीर बदलने रगी
02:10लद्दाख के कई सामाजिक संगठनों, छात्र समूहों और स्थानियन नेताओं ने कहना शुरू किया
02:16कि केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद विधान सबह खत्म हो गई
02:19स्थानिय राजनिती अतिकार सिमित हो गए
02:22और अब जमीन प्राकृतिक संसाधनों ततसरकारी नौक्रियों पर बाहरी प्रभाव बढ़ सकता है
02:27यहीं से सोनम वांग्चुक पहली बार खुलकर इस बहस का हिस्स्ता बढ़े
02:32उन्होंने कहा
02:33कि लद्दाख सिर्फ खुपसूरत पहाडों का नाम नहीं है
02:37यह एक बेहद संविधनशील हिमालेई छेत्र है
02:40जिसकी संस्कृती पर्यावरन और जनसंख्या
02:43तीनों को विशेश संरक्षन की जरूरत है
02:46दीर दीरे उन्होंने चार प्रभुख मांगों को आंदोलन का आधार बनाया
02:50पहला लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा मिले
02:54दूसरा संविधान की छटी अनुसुची अनिकि सिक्स शिडूल के तहत
02:59संविधानिक आरक्षन दिया जाए
03:01ताकि जमीन, संस्कृती और स्थानिय संसाधनों पर स्थानिय लोगों का अधिकार सुरक्षित रहे
03:06तीसरा स्थानिय युवाओं के रोजगार और भरती में सुरक्षा सुनिश्चित की जाए
03:11और चौथा, हिमालेई परियावरण को ध्यान में रखते हुए विकास की अलगनीती बनाई जाए
03:16शुरुवात में उनका अंदोलन पूरी तरह सामाजिक और परियावरण के इंद्रित दिखाई देता था
03:20वो प्रस कॉंफरेंस करते थे, वीडियो संदेश जारी करते थे, छात्रों और युवाओं से समबाद करते थे
03:26और बार-बार कहते थे कि ये किसी राजश्रितिक दल की लड़ाई नहीं है, बलकि लद्दाह के भविश्य की लड़ाई
03:33है
03:33उनकी भाष्य टकराव की नहीं समबाद की थी, वे सरकार से बादशीत की अपील करते रहे
03:39उनका कहना था कि अगर आज समयधानी सुरक्षा नहीं मिली, तो आने वाले वर्षों में लद्दाह की पहचान, पर्यावरण और
03:45स्थानिय समाज पर गंभीर असर पड़ सकता है
03:48इसी दोरान केदे सरकार ने भी बादशीत का रास्ता चुना, बाद में ग्रिह मंत्राले की ओर से हाई पावर्ड कमेटी
03:55बनाई दे, जुसमें लद्दाह के प्रतिनिधियों से कई दोर की चक्चा
03:59सरकार ने अनुसुची जन जाती आरक्षिन बढ़ाने, स्थानिय भाषाओं को मान्यता देने, महिलाओं के प्रतिनिधित्व और भरती जैसे कदम भी
04:07गिनाए
04:07लेकिन आंदोलन कारियों का कहना था कि उनकी मूल मांग, राज्य का दर्जा और छट्टी अनुसुची अब भी अधूरी है
04:16यही से सोनम वांग्चु का आंदोलन धीरे विरे लद्दाह के सीमाओं से निकल कर राष्ट्वे बहस का हिस्ता बनने लगा
04:22और फिर आया साल 2024, जब उन्होंने फैसला किया कि अब वो आवाज सिर्फ लेह में नहीं, बल्कि दिल्ली तक
04:29पहुँचाएंगे
04:30यही से शुरू होती है आंदोलन की दूसरी और सबसे चर्चित कहानी
04:35तो अब कहानी पहुँचती है साल 2024, सोनम वांग्चु कांदोलन सिर्फ लद्दाह कांदोलन अब नहीं रहा था, बल्कि दाष्ट्री राज़्वीती
04:43की सुर्खियां बनने लगा था
04:44कई महीनों तक बाच्ची चली थी, पतिर निति मंडल दिल्ली आता जाता रहा, हाई पावर्ड कमीटी की बैठके होती रही,
04:51लेकिन आंदोलन कारियों का आरुख वही था जो हमने आपको बताया कि सरकारुं की सबसे इंपोर्टेंट जो मांग थी, राज़्य
04:56का दर्जा औ
05:09इसी सोच के साथ सितंबर 24 में उन्होंने पैसला लिया कि दिल्ली चलो पध्यात्रा इसका एलान की, योजनाथी की लद्दाख
05:19से कारेकरता पैदल चलते हुए दिल्ली पहुँचेंगे और दिल्ली की संसद के सामने अपनी बात रखेंगे, आंदोलन पूरी तरह गांधि�
05:39पर पुलिस ने इस रोनम वांग्चुक समेत करीब 120 प्रदर्शिन कारियों को रोप दिया, कई घंटों तक उन्हें आगे बढ़ने
05:46की अनुमती नहीं मिली और बाद में हिरासत मिले लिया गया, जैसे ही ये खबर सामने आई सोचल मीडिया पर
05:51बहस शुरूरी पूरी, कई �
06:05समय बाद वांग्चुक और उनके साथियों को रिहा भी कर दिया गया, दो अक्टूबर, या निकांधी चुहनती के दिन उन्हें
06:11राजगाट जाकर स्रद्धानजली देने की अनुमती भी दिन दे, यही से उन्होंने एक नया रास्ता चुना, अनिश्चित कालीन भूख हर
06:20उनका संदेश साथ था, अगर हमारी आवाज बातचीत से नहीं सुनी जा रही, तो हम अहिंसक सत्याग रह का रास्ता
06:27अपनाएंगे, वो खर्ताल कई दिनों तक चलिए, देशपर के कई परियावरण विद्ध, शिक्षा विद्ध, समाजी कारे करता और कुछ विपक्षिन
06:37इताओं ने उनके समठन में बयान के, सोशल मीडिया पर सेव लद्धाक और सिक्स के शिड्यूल पर लद्धाक जैसे अभ्यान
06:44भी चलने लगे, दूसरी तरफ केंदर सरकार का कहना था कि बातचीत का रास्ता बंद नहीं हुआ है, सरकार ने
06:51बार-बार कहा कि हाई पावर्�
07:07समठन समवाद से निकलेगा सड़क के दवाब से नहीं, अब करीब दो सप्ताहबाद 21 ओक्टूबर 2024 को आश्वासनों के बाद
07:15सोनम वांग्चुक ने अपना अंशन समात कर दिया, उस समय लगा कि शायद अभिवाद धीरी-धीरी सुलह चाहेगा, वेकिन ऐसा
07:24हुआ नहीं
07:24करीब एक साल बाद सितंबर 2025 में सोनम वांग्चुक ने एक बार फिर से ले में बुखरताल शुरू कर दिया,
07:31इस बार माहौल पहले से ज्यादा गर्म था, युवास संगठनों में नाराजगी बढ़ चुकी थी, सोशल मीडिया पर अभियान और
07:39टेज हो चुके थे, स्था
07:54कारी दफ्तरों पर हमला हुआ, कई वाहनों में आग लगा दी गई और सुरक्षा वलों के साथ टकराओ की खबरे
07:59सामने आने रही, यही वो मोड था, जहां आंदोलन पहली बार हिंसा की छाया में आ गया, हलाकि सोनम वांग्चुक
08:06ने तुरंट सारवजनिक अपील की, उन्
08:21से शांती बनाए रखने की अपील की, लेकिन हालात बदल चुके थे, कुछी समय बाद उन्हें आपचारिक रूप से गिरफतार
08:29कर लिया गया, सरकार की कारवाई के समर्थकों का खहना था कि कानून अपने तरीके से काम करेगा और इंसक
08:35घटनाओं को किसी भी कीमत पर स्व
08:49नहीं रहा, ये लोगतांत्रिक अधिकार, विरोध प्रदर्शन और केंट्र लग्दाख संबंधु पर राष्ट्री राजुनितिक बहस का हिस्ता मन गया, यही
08:58से सोनम वांग्चु की छवी एक पर्यावरन कारेकर्टा से आगे बढ़कर एक बड़े राजुनितिक विवा
09:19बदला आंदोलन का स्वरत, मार्च दोहजार चवीस में जब सोनम वांग्चु की रिहाई की खबर सामनी आई, तब लोगों को
09:27लगा कि वे फिर से केवल लदाख और पर्यावरन के मुद्वों पर सिमुत आंदोलन करेंगे, लेकिन इसके बाद जो तस्वीर
09:33सामनी आई, उ
09:48इसी दोरार अब उनका नाम सीजेपी यानि की कौकरोज जंता पार्टी के मंच के इसके साथ जोनने लगा, अब जंतर
09:55मंतर पर एक नए शुरुआत होगा, दिली के जंतर मंतर पर आयोग्जीत विरोध प्रदेश्वन में सोनम वांग्चुक ने हिस्सा लिया,
10:02और घोशना
10:03की कि वे परियारण संग्रक्षन तथा सीजेपी के आंदोलन की समर्थन में भूखर ताल करेगे, उनका कहना था कि ये
10:11किवल लद्दाह का बुद्दा नहीं है, बलकि पूरा हिमालय और आने वाली पीडियों का सवाल है, उन्होंने कहा कि अगर
10:19हिमालय शेत्र अन्यंतरत व
10:32क्या सोनम वांग्चूक एक गैर राजनितिक सामाजी कार्य करता नहीं रहे, क्या उनका अंदोलन पूरी तर्य राजनितिक दिशा में बढ़
10:40चुका है, क्या लद्दाह की मांगो को राष्टिय राजनितिक मन से जोड़ना उनकी पुरानी स्तिति से अलग कदम है, अब
11:00बह
11:01सरकार उनकी मांगों पर पर्याप्त कदम नहीं उठाती, तो बड़े मंचों पर आवाज उठाना स्वभाविक है, लेकिन सरकार का क्या
11:08रुख है, केंदर सरकार लगतार ये कहती रही है, कि लद्दाह के बुद्दो पर बाचीत की दर्वाजे बंद नहीं हुए
11:14है, सरकार क
11:29पर शाओं को मानेता, महिलाओं को प्रतिन धित्व, भरती प्रक्रियाओं में सुधार, लेकिन आंदोलन कारियों का कहना है, कि उनकी
11:36मुख्यमांग वही राजवे का दर्जा और छट्टियन उसुचिवों उस पर टिके हुए हैं, क्या बदल गया है सोनम वांग्चुक में
11:42क्यों पर सवाल खड़े हो रहे हैं, और यही सवाल सबसे ज़ादा पूछा जा रहा है, क्या 2019 में लदाख
11:47की पहचान बचाने निकले सोनम वांग्चुक आज राश्ट्य राजवे के किंद्र में आ गया है, क्या उनका आंदोलन पर्यावरन से
11:54आगे बढ़कर सत्ता और मीत
11:55की बहस बढ़ चुका है, या फिर वही कर रहे हैं, जो किसी भी जन आंदोलन का अंगला चरण होता
12:01है, स्थानिया मुद्धों को राश्ट्य मंच तक ले जाना, अब आज की जो तस्वीर है, आज जंतर मंतर पर बैठे
12:08सोनम वांग्चुक सिर्प लद्दाख की बात नहीं क
12:25लोग को अक्रोचों पर भी सवाल उठा रहे हैं, कि आपका नीट पेपर लीक और धर्विनिक प्रदान का स्थीफा मुद्ध
12:30था, इसमें पर्यावरण भी आप में गुसा दिया है, तो अलग-अलग-अलग तरह की बाते कर रहे हैं, लेकिन
12:36एक बात ताय है कि 2019 में शुरू
12:49और आंदोलन कारियों को फिर बातचीत के मेश तक लाएगा, ये तकराव की राश्डिती और तेज हो जाएगा।
13:19के प्रतनिद्यों के साथ कई दौर की बातचीत हुए, अनुसुचित जनजाती का मुद्धा आरक्षन बढ़ाया गया, महिलाओं को परिशदों में
13:28आरक्षन दिया गया, भाशाओं को माननिता दी गई, जो महां की स्थानी अभाशाएं थी, इसके लावा भी कई सुधार क
13:34सरकार का ये भी कहना है कि बाचित का रास्ता थोरने कभी बंद किया ही नहीं, लेकिन आंदोलनकारी मानते ही
13:39नहीं है, कई बैटकों में बहुत बाते हुए, लेकिन फैसले कम हुए, अब ऐसा आंदोलनकारी कह रहे हैं, और राज्य
13:47के मांग का दर्जा जो है, आनि कि केंद
14:02लग्दा सामने रखते हैं और सरकार कहते हैं कि हमने और अपके पांच मुद्दों को एक्सेप्ट कर लिया है उसकर
14:07काम भी कर दिया लेकिन वो कहते हैं कि नहीं हमारा तो बस यह है तो क्या लग्दा का अंदूलन
14:11अपूरी तरह पर्यावरण और समय धानी का दिकारू कांद�
14:30पूछ पूछ रहे हैं कि अगर आंदोलन पूरी तरह गया राजनितिक था तो अब राजनितिक संगठनों के मंज पर क्यों
14:36दिखाई दे रहे हैं कुछ लोग ये भी आरोप लगा रहे हैं कि अलग अलग राजनितिक दल और संगठन इस
14:41आंदोलन को अपने अपने एजेंडे क
14:43के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं हो पियला के इन आरोस पर सूनंब वांक्चुक लाघार कहते रहे
14:48कि उनका संगर्श किसी पार्टी के लिए नहीं बलकी हिमालय लधाक और आने वाली
14:53पीडियों की दिये है
14:54तो अब सवाल सिर्थ सोनम वांग चुक का नहीं है
14:57सवाल ये भी है
14:58किया लोगतंतर में लंबे समय तक चलने वाले आंदोलनों का अंद हमेशा राज़ुनिती में ही होता है
15:03क्या हर समाजिक आंदोलन किसी ना किसी राजनितिक घुरुविकरण का हिस्सा बन जाता है
15:08या फिर ये व्यवस्था की मजबूरी है कि बिना राजनितिक दबाब के बड़े फैस्वे नहीं लिये जाते हैं
15:15फिलहाल जंतरबंतर पर आंदोलन जारी है ब्युखरताल की घुशना हो चुकी है
15:18सरकार की ओर से अभी तक कोई बड़ा आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है
15:22लेकिन ये तय है कि आने वाले दिनों में ये मुद्धा केवल पर्यावरण या लादाख तक सिनित नहीं रहने वाला
15:27है
15:27बलकि राश्टिय राजनिती में भी इसकी गूंच सुनाई दे सकती है
15:30अब देखना ये होगा कि क्या सरकार फिर बाच्वित का रास्ता चुनती है
15:34क्या आंदोलन अपनी पूरानी गांधिवादी दिशा में आगे बढ़ता है या फिर ये संगर्ष एक नए राजनितिक मोड पर पहुंच
15:41जाता है
15:42फिल्हाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि सोनम बांग्चु का सफर सिर्फ एक इंजीनियर या शिक्षा सुधारक का सफर
15:49नहीं रहा
15:49ये कैसे व्यक्ति की कहानी है जिसने विज्ञान से शुरुआत की पर्यावरन तक पहुंचे
15:54सम्मेधानिक अधिकारों की लडाई लड़ी और आज देश की राजधानी में एक नए आंगोलन के केंदर में खड़े हैं
16:00लेकिन इस पूरे विवाद का अंतिम फैसला सड़क पर नहीं बलकि बाचीत सम्मेधानिक प्रक्रिया और राजनितिक इक्षा शक्ती से ही
16:08निकलेगा
16:09इस खबर में इतना ही और इस नए प्रोटेस्ट से जो भी नए खबरे आएंगी कोपरोजुंत पार्टी के जो अंशन
16:15का प्रोटेस्ट है वांग्चु का उससे जो भी अपडेट्स आएंगे आपको हम ज़रूर बताएंगे
16:40subscribe to one India and never miss an update
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