00:24बारत दुनिया के सामने लगातार
00:30एक ही बात कह रहा था
00:31कि साल 1985 में एयर इंडिया की विमान कनिश्क में जो दुमा का हुआ था
00:36वो कनड़ा की जमीन से काम करने वाले खालिस्तानी आतंकियों ने किया था
00:40लेकिन कनड़ा की सरकार ने कभी भी इस बात को इतने साफ शब्दों में नहीं माना था
00:45बगर अब कूट नीटी के मोर्चे पर एक बहुत बड़ा बदलाव आया
00:49कनड़ा की अपनी खूफी एजेंसी ने तियास में पहली बार सरयाम ये कभूल किया
00:54कि कनिश्क विमान में बंग कनड़ा में रहने वाले खालिस्तानी शरबब्दों ने ही रखा था
00:58जिसमें सवार सभी 339 लोग मारे गए थे
01:02अब सवाल ये उठता है कि आखिर 41 साल बाद कनड़ा को अपना रुख क्यों बदलना पड़ा
01:08और कनड़ा की इस बात का भारत के लिए क्या मतलब है
01:12जून 1985 में एयर इंडिया की फ्लाइट 182 यानी 182 यानी कनिश्क विमान पर हुआ ये हमला कनाड़ा के इतिहास
01:21का सबसे बड़ा आतंकी हमला है
01:22टोरेंटो से मुंबई आ रहा ये बोईंग विमान अट्लांटिक महासागर के उपर हवा में ही फट गया था
01:29क्योंकि इसके सामान रखने वाले हिस्से में बम चिपाया गया था
01:33इस हादसे में 329 बेकसूर लोगों की मौत हो गई थी
01:38जिन मैंसे ज़ादातर कनाड़ा के ही नागरिक थे
01:41भारतिय जाच एजेंसियों ने शुरू से ही इसके तार प्रतिबंदित आतंकी संगठन बंपर खालसा से जोड़े थे
01:48लेकिन कनाड़ा की सरकार हमेशा सीधे तोर पर खालिस्तान का नाम लेने से बचती रही
01:53लेकिन अब कनाड़ा की सोच बदल कही है
01:56और इस हादसे की बरसी पर वहाँ की सबसे बड़ी खूफी एजेंसी सीएस आईएस ने सीधे तोर पर माना है
02:03कि बम रखने वाले कनाड़ा के ही खरिस्तानी चर्म परती थे
02:06ये बाशा बहुत माइने रखती है
02:09तो कि पहली बार कनाड़ा की सरकारी एजेंसी ने सच को ऑन रिकॉर्ड सुईकार किया
02:13अब बड़ा सवाल ये है कि कनाड़ा को ये सच मानने में
02:1840 साल से जाना का वक्त क्यों लग गया
02:20दरसल ये कनाड़ा की खूफीय व्यवस्ता की सबसे बड़ी नाकामी थी
02:25जाच में सामने आया था कि वहां की एजेंसियों ने बबबर खालसा के सरकना
02:29तल्विंदर सिंग परमार की फोन रिकॉर्डिंग्स को नस्च कर दिया था
02:32पलिस और खूफीय अपसरों की आपसी लड़ाई ने केस को कमजोर किया
02:37गवाहों को डराया गया और कुछ का तो मडर कर दिया गया
02:41नतीजा ये हुआ कि 2005 में सबूतों की कमी के कारण मुठ्षा रोपी बरी हो गए
02:46जिससे वहां की जनता में भारी गुस्वा फैल गया था
02:49और इसके लावा वहां की राजजनीती ने भी इस सच को दबाए रखा
02:53क्योंकि कनाडा की सरकारें इसे अपना नहीं बलकि भारत का अंदूर्णी मामला मानती रही
02:59लेकिन अब पानी सरसे उपर जा चुका है
03:01खुद कनाडा इक होफी अजनसी ने सरकार को चेताबनी दी है
03:04कि कनाडा में बैठे चेरम पंतिकुट वहां के संस्थानों का इस्तिमाल करके नफरक फैला रहे हैं
03:09और टेरर फंडिंग कर रहे हैं
03:11जो अब खुद कनाडा की सरक्षा के लिए बहुत बड़ा खत्रा बग चुका है
03:15भारत के लिए कनाडा की ओर से सिर्फ पुरानी गल्ती का सुधार नहीं है
03:18बलकि एक बहुत बड़ी कूट नीतिक जीत है
03:20नई दिल्ली हमेशा से कहती आई है कि कनाडा अपनी जमीन पर भारत विरोधी ताक्तों को बड़ावा दे रहा है
03:26पूरू प्रधान मंत्री जस्टिन टूडो के कारेकाल में तो ये रिष्टाट बिलकुल तूटने की कगार पर पहुँझ गया था
03:45इस फैसले की टाइमिंग भी बहुत एहम है
03:47कनाडा के नई परधान मंत्री मार्क कारनी के नेतरत में अब वहां की सुरक्ष एजेंसिया खालिस्तानी खत्रे को एक नई
03:54सेरे से देख रही है
03:54ये सिर्फ इत्यास सुधारने की बात नहीं है
03:56बलकि ये संकीत है कि कनाडा वो अपने घर में पल रहे चरंपल्थ पर कड़ा रुख अपनाने को मच्पूर हुआ
04:03दश्कों के इंकार और बहानिवाजी के बाद आखिरकार कनाडा ने वही भाषा बोली जो भारत दश्कों से सुनना चाहता था
04:11अब देखना होगा कि क्या कनाडा इन आतंकी नेटवर्कों के खिलाफ कोई ठोस कारवाई करता है या नहीं
04:19लेकिन एक बात बहुत साफ है कि कनाडा का पुरान जोट अब पूरी तरह से बेनकाब हो चुका है
04:25कूटनेती में आज इतना ही
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