00:00कि कोई महिला आई है उसको माता बोल दो तो ये सबसे बड़ा सम्मान है
00:03तो मैं पता भी नहीं है कि तुमने चुपचाप उसके भीतर कितना दबाव पैदा कर दिया है अब माता बनने
00:09के लिए
00:10तुमने ये थोड़ी कहा कि इस तरीका सम्मान करना है तो मैं बोलूँगा विदुशी
00:15पर आप कभी ये नहीं बोलते है विदुशी, नहीं बोलते न, आप कभी नहीं बोलते है बोधवती, नहीं बोलते न,
00:21आप क्या बोलते हो, माता
00:23और ये बड़ी अच्छी बात मानी जाएगी
00:25इसका मतलग क्या है कि आपने उसके ब्रेन से ज्यादा महत्तो उसके वूम्ब को दिया है
00:30अगर आप उसकी ज्यान को उसकी बौधिक शमता को महत्तो देते होते
00:35तो सम्मान व्यक्त होता विदुशी कह करके
00:38ये आपको नहीं समझ में आता, आपको ये बड़ा अच्छा लगता है
00:41मेरे तो दोस्त के सारे ये बच्चे न मुझे मम्मी जी बोलते है
00:44आप प्रोफेसर जी भी हो सकती थी, आप मैंजर जी भी हो सकती थी
00:48आप सिर्फ मैम भी कहला सकती थी
00:50बहुत उचे उचे तरीके से आपको एड्रेस या संबोधित किया जा सकता था
00:57पर आपको सबसे प्यारा यही लगता है कि मुझे सब ममी जी बोलते हैं
01:01अब भोले हो आपको नहीं समझ में आता कि वो सब कुछ जिसको हम मनुष्य की संस्कृते सभ्यता बोलते हैं
01:10हमारे नियम कानून हमारे रिवाज हमारी परंपराएं हमारा इतिहास हमारी सारी mythology ये एक पुरुष्य प्रधान समाज द्वारा लिखी गई
01:24थी
01:25उसमें महिलाओं के लिए कुछ नहीं है
01:34भारतिये दर्शन में आपके लिए बहुत कुछ है भगवत गीता में आपके लिए बहुत कुछ है लेकिन ये जो contemporary
01:42culture है इसमें आपके लिए कुछ नहीं है
01:45जब कुछ मिलना नहीं है तो महिलाओं को सबसे आगे होना चाहिए सिस्टम को बाय बाय करने में कि अपना
01:53सिस्टम अपने पास रखो मैं अपनी जिंदगी अपने इसाब से अलग जीऊंगी मुझे तुमारे सिस्टम की किसी चीज़ पर नहीं
01:58चलना है
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