00:06देश में सैकड़ों हजारों ऐसे मामले हर साल सामने आते हैं और खेद की खतरे की बात ही है कि
00:12ये मामले प्रतिवर्श बढ़ते ही जा रहे हैं कारण पारिस्थिक और सामाजिक और पारिवारिक दबाओं के अलावा कुछ नहीं है
00:20चैकशनेक, संस्थागत, हर तरह का दबाओ पड़ रहा है उसके उपर, ये हमारे माबाप है, इनकी अपनी जिंदगी का ही
00:27केंद्र भी, इनकी दिशा, इनके लक्ष ये सब गड़ बड़ रहे होते हैं, और फिर इन्होंने जो दिशा चली होती
00:34है, जिस केंद्र से, ये अपन
00:48को जानता ना जिन्दकी को जानता अब हम इतना तो नहीं करने वाले कि जो गलतियां हमने की वही वही
00:55अब तुमसे भी करवाएं पुल्टे माबाब कहते हैं तुम वही करो जो हमने किया और इतना ही नहीं हमारे सारे
01:00अधूरे अर्मान अब तुम पूरे करोगे तो अब इतना
01:15यह भाव कभी मट डालिएगा कि जीवन की कोई भी उपलब भी जीवन से बड़ी होती है, जिन्दगी में जो
01:20कुछ भी पाया जा सकता है, गवाया जा सकता है, उस सब से कहीं ज्यादा बड़ी चीज है जिन्दगी, जब
01:25बहुत छोटे हों, इतने बड़े हों, इतने बड़े
01:45और बच्चों को भी खुद से आजाद करिए हाँ अनुभाव है आपके पास दुनिया आपने ज्यादा देखी है तो एक
01:51साथी की तरह मौजूद रहिए
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