00:00मैं एक ब्रामन परिवार से हूँ और मैंने देखा है मेरे समाज में मतलब मेरा अब्जर्वेशन ये बोल रहा है
00:06ये जो हमारा लास्ट नीम हम लगाते है वो व्यवस्ता जो भी टाइम पे बनी होगी अब बनी है अभी
00:13हमें ये एक्टुली जरूरत नहीं है लास्ट नीम फै
00:29सान बनाने से मतलब मुझे तो सर्निम चाहिए ही नहीं पर जबर जस्ती रखना पड़ रहा है ऐसा मुझे लग
00:35रहा है वो फिल्म याद है ना
00:41वो बोध दृष्चे था वो दो होते हैं मस्खरे वो गाड़ी चला रहे होते हैं एक लिफ्ट मांगता उसको बैठा
00:49लेते हैं उसको बैठा लेते हैं तो बात शुरू होती है तो कहते हैं हाँ नाम बताओ तो बोलता है
00:55कहते है ठीक है नाम है तो फिर आगे बताता है फिर �
01:00और आगे बताता है। और अपने बाल खीछना शुरू कर देते हैं।
01:07और ऐसा होता हो tuh, उसो निकाली दैते हैं गाड़ी से, फिर उसो गाड़ी से फेक देते हैं।
01:11चुटकुला ही भर नहीं था, पर आप ये भी समझे होगी क्यों स्त्रियों का नाम बदल जाता है विवाह के
01:18बाद, आप के अस्तित्त के कम से कम आधे हिस्से पर समाज का अधिकार है, नाम में क्या है? देह,
01:29और सरनेम में क्या है? पूरा समाज, और इनको ले के चलो, कोई प
01:41मैं धर्म हूँ, आप मात्र चेतना होकर बैठे हो, और आप कोई किताब पढ़ रहे हो, आप भजन गा रहे
01:47हो, कोई आगे बोलेगा हे तल, उसने आपको क्या याद दिला दिया, स्त्री है तू, नाम सिर्फ नाम नहीं होता,
01:53वो आपकी गुलामी का ठपा भी हो सकता है, और
01:56आपकी मुक्तिका उद्गोश भी हो सकता है,
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