00:00पुरुषों का शड़यंत्र पुरुषों पर ही बहुत भारी पड़ा है
00:03हम जिन्हें ग्रहणिया कहते हैं, हाउस वाइफ कहते हैं
00:08उनसे का गया है तुम घर का काम देखो
00:10घर का काम मने क्या?
00:11दुनिया, समय, समाज, तकनीक, विज्ञान, राजनीति
00:15ये वो जगहें हैं जहां आदमी की कृष्टतम प्रतिभा अपना रंग दिखा रही है
00:21उस सबसे तुमने काट दिया ना औरत को
00:23तुम उसे पता भी नहीं रगने दे रहे कि विज्ञान कहां जा रहा है
00:28आधुनिक टेकनालोजी से तुम उसका परिचय ही नहीं होने दे रहे
00:30तु घर में बैट, घर के काम कर, बाहर निकलेगी तो तेरे लिए जंजट है, खतरा है
00:35इस्त्री के बाजू नहीं मजबूत हो पा रहे है
00:37जब तक धूप नहीं जेलेगी, सड़क पर ठोकरे नहीं खाएगी, दुनिया की चुनोतियां नहीं सुईकार करेगी
00:43इस्त्री की मास पेशियां सबल कैसे होंगी, तो वह कोमल-कोमल ही रह गई
00:47धूप में नहीं निकली तो गोरी-गोरी ही रह गई
00:50गोरी-कोमल-मुलायम-ग्रहणी ये पुरुष के भोग के लिए अतियुत्तम है पर बड़ा दुखत जीवन बिताती है
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