00:00जो प्रिश्ण पर और गीता पर आरोप लगता है कि इन्हों ने तो कुंखचर कराया
00:04फुल संधी भी तो करा सकते थे जब इतने ही बड़े त्रकाल द्रश्टा थे और अंतर्यामी थे और सरवग्य थे
00:10तो क्यों नहीं कुछ करके चमतकार इत्यादी दुर्योधन की मति शुद्ध कर दी
00:14जब जैदरत को मारने के लिए सूरज के साथ लीला कर सकते हैं
00:18तो ऐसी ही कुछ लीला कर दी होती कि कौरवों की बुद्धी साफ शुद्ध हो जाना
00:21तो इस तरह के भूत सारे आरोप लगते रही हैं
00:24मेरा भरोसा पर यह मैं जानता हूँ
00:25कृष्ण अगर बचा सकते कंस को तो कंस को भी बचा लिए होता है
00:31तीने ही मौकों पर कृष्ण ने कर्ण को उलहना दी है
00:33लगभग फटका रहा है लेकिन युद्ध से ठीक पहले करण के सामने ऐसे गए थे कृष्ण पहली बार कि कुछ
00:39मांग रहा हूँ दानवीर हो कुछ मांग रहा हूँ
00:40जो वो अधिक्तम प्रेत्न कर सकते थे इन लोगों के प्राण बचाने का वो उन्होंने किया था
00:46उतना मत गिर जाए कि फिर उसके बाद आपको कोई कृष्ण भी न बचा पाए यह चलती फिरती लाशे घूम
00:51रही है अर्जुन तुम क्यों संकोच कर रहे हो इनको गिराने से
00:54मनुष्य सम्मान का यहां तक कि बचाने का यानि संगरक्षन का अभी अधिकारी तभी है जब वो चीतना से जिन्दा
01:00और चीतना से जिन्दा नहीं है अर्जुन मालों को यह वात हमें समझ में नहीं है कि मुझे मालों मैं
01:05आप सब को उडचन हो रही होगे भी इस विकार कर �
01:07तरियले
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