00:04इसने पर नहीं देखी होती तो वो कहता है मज़ा ठीक है जितना है उतने है पर देखने की बात
00:09कहता है नहीं मज़ा ऐसा होना चाहिए वैसा मिलता नहीं है तो फिर डाइवोर्स होते है
00:13and 70% of the divorces are initiated by women क्योंकि वो जो पर्न में देख रही है वो उनको
00:17real life में मिली नहीं रहा है
00:18मिल सकता भी नहीं है वो जो मज़े की definition है वो तो आपके शरीर से भी नहीं आ रही
00:22है एक तो होता है चलो tickling में मेरे शरीर ने कहा दिया मज़ा आ गया
00:25या कि गर्मी बहुत लग रही थी ठंडा पानी मिल गया तो शरीर ने कहा दिया मज़ा आ गया
00:28हम जिन चीजों को मज़ा बोल रहे हैं वो तो शारीरिक तक नहीं है शारीरिक मज़ा भी समाजिक बन चुका
00:33है
00:34sexual pleasure भी society determined कर रही है कि sex में ऐसे ऐसे ऐसे ऐसे ऐसे इतनी देर तक होगा
00:39तो उसको pleasure मानेंगे नहीं तो नहीं मानेंगे और वो नहीं हो रहा है
00:43मज़ा मने क्या फिर अध्याप में कहता है एक मज़ा ऐसा होता है जो काल पर स्थान पर समाज पर
00:50अश्रित नहीं होता
00:51उसको आनंद कहते हैं
00:52उसके लिए किसी object की दरूपत नहीं है
00:54उसके लिए कोई नहीं चाहिए जो आगर के बताए
00:56कि ऐसी चीज मज़ेदार है
00:58तो दुख भी चल रहा है तो उसको समझो
01:00दुख हमें भी आनंद दित रहो
01:01और सुख चल रहा है तो समझो ही समझो
01:03कुछ भी चल रहा है जो भी चल रहा है उसको समझो
01:05वो आनंद है, that's joy beyond all kinds of pleasure